(चंद्रकुमार दुबे )जिले में पुलिस के पास 1274 मौतों की जांच अभी तक पेंडिंग है। इसमें बहुत सारे ऐसे केस भी हैं जिनमें हत्या का संदेह है और उनकी जांच 10-10 साल पहले से अटकी हुई है। इनमें मर्ग कायम है और इनकी फाइलें धूल खा रही हैं। मौत के मामलों में खुदकुशी,जलने से व दुर्घटना के केस सबसे अधिक हैं।
जांच पूरी नहीं होने से अपराधी खुलेआम घूम रहे हैं और उन्हें कानून से सजा नहीं मिल पा रही है। जांच में देरी के चलते ऐसे मामलों के सबूत भी नष्ट हो जा रहे हैं। थानों में दर्ज मर्ग प्रकरणों की जांच में पुलिस की रुचि भी नहीं है। इसी के चलते ही प्रकरणों की जांच अटकी हुई है। पेंडिंग मामलों में 2010 के 42,012 के 22,013 के 32,014 के 16,2015 के 27,2016 के 65,2017 के 96,2018 के 119,2019 के 402 व 2020 के 540 केस हैं।
जानिए जिले के थानों में जांच की स्थिति
- सिविल लाइन 83
- तारबाहर 16
- सकरी 36
- कोतवाली 77
- सिरगिट्टी 89
- तोरवा 46
- चकरभाठा 49
- हिर्री 26
- बिल्हा 40
- पचपेड़ी 24
- सरकंडा 65
- कोनी 66
- मस्तूरी 103
- सीपत 78
- तखतपुर 99
- कोटा 280
- रतनपुर 97
- कुल 1274
संदिग्ध मामलों में दर्ज होता है मर्ग
कानूनी मामलों के जानकार अधिवक्ता अजय अयाची के अनुसार किसी व्यक्ति की आत्महत्या,जीव जंतुओं के काटने, उपकरण के चपेट में आने, जलने दुर्घटना में मौत या ऐसी परिस्थितियों में किसी की मौत हुई हो जिनका उचित कारण संदेहजनक हो उन केसों में मर्ग कायम होता है। थानों के मर्ग डायरी में यह दर्ज होता है। इनकी जांच होती है और जांच में मौत के पीछे के कारण सामने आने पर ऐसे प्रकरणों में अपराध होने की स्थिति में केस तैयार किया जाता है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट बाधा
एएसपी ग्रामीण संजय ध्रुव के अनुसार संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के प्रकरणों में जांच पोस्टमार्टम को अहम माना जाता है। रिपोर्ट में देरी के चलते लंबित केस का प्रमुख कारण है। सिम्स व जिला अस्पताल में 150 से अधिक केस की रिपोर्ट नहीं आई है इस कारण जांच की दिशा तय नहीं हो पा रही है।
अधिकांश मामले खुदकुशी के : जिले में थाने में खुदकुशी के मामलों में पुलिस मर्ग कायम कर जांच करती है। खुदकुशी के पीछे कोई न कोई वजह होती है। जांच करें तो खुदकुशी के लिए प्रेरित करने के मामले सामने आएंगे ही।
पिछले 10 साल में 2011 में सभी प्रकरणों की जांच : पुलिस ने मर्ग डायरी की जांच करने में 2011 में अच्छी रुचि दिखाई। पिछले 10 सालों की दर्ज रिकार्ड में इस साल सभी प्रकरणों की जांच पूरी कर ली गई थी।
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source https://www.bhaskar.com/local/chhattisgarh/bilaspur/news/no-investigation-of-1274-suspected-deaths-in-10-years-maximum-280-case-quota-127451497.html
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