बस्तर में 5% से भी कम कोरोना मामले के पीछे मलेरिया का प्रकोप तो नहीं, एम्स में होगा रिसर्च

प्रदेश में कोरोना काल के 96 दिन पूरे हो रहे हैं। इस दौरान पूरे बस्तर संभाग में कोरोना के पांच फीसदी से कम मामले सामने आए हैं। इतना ही नहीं, राज्य में मार्च में पहला कोरोना केस आने के बाद से लगातार 82 दिन तक बस्तर संभाग के अति नक्सल पीड़ित पांच जिलों कोंडागांव, दंतेवाड़ा, सुकमा, बीजापुर और नारायणपुर में एक भी केस नहीं आया था। इनमें भी दो जिलों नारायणपुर और सुकमा में 17 और 20 जून को पॉजिटिव केस मिले। बस्तर संभाग में सबसे ज्यादा मामले कांकेर जिले में है, पूरे संभाग के लगभग आधे से ज्यादा केस यहीं के हैं। प्रदेश में अब कोरोना के मामले ढ़ाई हजार के करीब पहुंचने वाले हैं। ऐसे में बस्तर में सैकड़े से भी कम मरीज होना अब मेडिकल के जानकारों को भी हैरत में डाल रहा है। लिहाजा इन इलाकों में एक रिसर्च की तैयारी भी की जा रही है।
दरअसल, बस्तर संभाग में अतीत में मलेरिया का खासा प्रकोप रहा है। फील्ड पर काम कर रहे हेल्थ विभाग और प्रशासन के ज्यादातर अधिकारी भी यहां मलेरिया के फैक्टर को एक वरदान की तरह देख रहे हैं। मलेरिया के फैलाव के कारण इन इलाकों में हर साल एंटी मलेरिया जैसी दवाएं अभियान चलाकर लोगों के बीच बांटी जाती है। वहीं दूसरी वजह के तौर पर यहां पर शुरूआत से ही बाहरी राज्यों या जिलों यहां तक कि गांव से आने वाले लोगों को लेकर बहुत ज्यादा सावधानी बरतना भी एक वजह मानी जा रही है। प्रदेश के बाकी संभागों की तरह हजारों की तादाद में प्रवासी अलग-अलग राज्यों और जिलों से लौटकर आए हैं। यहां तक कि पहुंचविहीन इलाकों और जंगल के रास्तों के आने वाले प्रवासियों में भी पॉजिटिव लक्षण नहीं पाए गए हैं।

सुकमा के कंजीपानी गांव ने सबसे पहले नाकाबंदी का बिगुल बजाया
कोरोना की शुरूआत के दौरान सुकमा जिले के कंजीपानी गांव ने सबसे पहले बैरिकेड लगाकर आसपास के गांव में भी इसी तरह की नाकाबंदी की शुरूआत कर दी थी। करीब पांच हजार आबादी वाले इस गांव में ज्यादातर लोग शिक्षित हैं और सरकारी या प्राइवेट नौकरियों में हैं। गांव में रहने वाली बची हुई आबादी जंगल और खेती के जरिए जीविका कमाती है। मार्च की शुरूआत में ही यहां की महिला सरपंच सुकुल दई ने गांव के लोगों के साथ मिलकर चारो तरफ से गांव की सीमाएं सील कर दी थी। जबकि उस वक्त तक पूरे प्रदेश में एक भी केस नहीं मिला था।

कोंडागांव, बीजापुर में दिन-रात अब भी सर्विलांस, गांव के लोग दे रहे सूचना
कोंडागांव के जिला कोविड नियंत्रण नोडल अधिकारी डॉक्टर आरके सिंह और बीजापुर के नोडल पोषणलाल चंद्राकर के मुताबिक अभी भी जिलों में एक्टिव सर्विलांस पूरी सजगता के साथ किया जा रहा है। गांव के लोग भी बाहरी आने वालों के बारे में लगातार सूचनाएं दे रहे हैं। अतिनक्सल पीड़ित इलाकों में भी हेल्थ विभाग की टीमें जा रही हैं, हर आने वाला की स्क्रीनिंग और टेस्ट सुनिश्चित किया जा रहा है। यहां तक कि जंगल में भी पंडाल लगाकर क्वारेंटाइन कर रहे लोगों की जांच की गई है। हर जगह क्वारेंटाइन के नियमों का सख्ती से पालन भी नियंत्रण की एक अहम वजह है।

निश्चित रूप से शोध का विषय

नक्सल पीड़ित बस्तर संभाग में कम संख्या में पॉजिटिव केस मिलना, मेडिकल साइंस के लिहाज से निश्चित ही एक रिसर्च का सब्जेक्ट है। अभी ये कह पाना मुश्किल है कि यहां लोग मलेरिया के एंटी डोज हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वीन जैसी दवाएं लेते रहे है या नहीं है? क्योंकि एंटी मलेरिया ड्रग्स के जरिए कोरोना प्रिवेंशन होता है या नहीं इस पर अभी रिसर्च हो रही है।-डॉ. नितिन एम नागरकर, डायरेक्टर, एम्स, रायपुर

बस्तर संभाग में अब तक सबसे कम मामले मिले हैं। इसकी कई वजहें हो सकती है। पहला ये यहां किसी भी पॉजिटिव केस में ट्रैवल या कांटेक्ट हिस्ट्री एकदम क्रिस्टल क्लियर मिली है। संभाग में मलेरिया का प्रकोप रहा है, हर साल यहां अभियान चलाकर मलेरिया की जांच और एंटी मलेरिया दवाएं बांटी जाती रही है। इसको रिसर्च के बाद ही समझा या जाना सकता है।- अखिलेश त्रिपाठी, मीडिया प्रभारी, छत्तीसगढ़ हेल्थ विभाग



Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
Less than 5% corona case in Bastar, there will be no malaria outbreak, research will be done in AIIMS


source https://www.bhaskar.com/local/chhattisgarh/raipur/news/less-than-5-corona-case-in-bastar-there-will-be-no-malaria-outbreak-research-will-be-done-in-aiims-127434263.html

Post a Comment

और नया पुराने