राजधानी में रोज निकल रहा 650 टन कचरा, 4.75 लाख टन कचरा दो साल से डंप, शहर का जमा कचरा खत्म करने में ही लगेंगे चार साल

शहर से निकलने वाले कचरे के निष्पादन के लिए प्रोसेसिंग प्लांट तो शुरू कर दिया गया है। लेकिन इसके बाद भी शहर से पूरा कचरा खत्म होने में चार साल से अधिक का समय लगेगा।
भास्कर को जानकारी मिली कि शहर से पूरा कचरा खत्म होने में चार साल से अधिक का समय लगेगा। टीम ने इसकी पड़ताल की तो सामने आया कि शहर से पिछले दो साल से निकला हुआ कचरा अब भी डंप पड़ा हुआ है। वहीं, प्रतिदिन 650 टन के करीब कचरा अब भी निकल रहा है। जबकि प्रोसेसिंग प्लांट की क्षमता 500 टन प्रतिदिन की है। वहीं, निगम के अधिकारी दो शिफ्ट में कचरा प्रोसेसिंग करने की बात कह रहे हैं। ऐसे में दो शिफ्ट के हिसाब से प्रतिदिन एक हजार टन कचरा ही निष्पादित हो पाएगा। इसी बीच आंकड़ों के हिसाब से पुराने कचरे और नए कचरे को पूर्णत: निष्पादित करने में तकरीबन 4 साल से अधिक का समय लगेगा। साथ ही इस पूरे प्रोसेस में 1275 रुपए प्रति टन के निष्पादन के हिसाब से तकरीबन 60 करोड़ से ज्यादा की राशि निगम को खर्च करनी होगी।

फैक्ट फाइल

  • 02साल से कचरा कलेक्शन
  • 04 लाख 74 हजार 500 टन
  • 01 हजार टन रोजाना का लक्ष्य
  • 650 टन कचरा प्रतिदिन शहर से
  • 350टन पिछला कचरा
  • 04साल में खत्म होगा शहर का पूरा कचरा

ऐसे समझें वेस्ट को प्रोसेस करने का गणित
350 टन कचरा रोज करवाएंगे प्रोसेस
आंकड़ों के हिसाब से शहर से निकलने वाला कचरा दो साल से डंप पड़ा है। ऐसे में हिसाब लगाने से 2 साल में तकरीबन पौने पांच लाख टन कचरा अब भी सरोना ट्रेंचिंग ग्राउंड और संकरी प्रोसेसिंग प्लांट में पड़ा हुआ है। इस हिसाब से 350 टन पुराना कचरा रोज निष्पादन किया भी जाता है, तो चार साल का समय पूरे कचरे को निष्पादन करने में लगेगा।
60 करोड़ से ज्यादा राशि होगी खर्च
निगम द्वारा एजेंसी को कचरा उठाने के लिए 650 रुपए प्रति टन और इसके निष्पादन के लिए प्रति टन 1275 रुपए का भुगतान किया जाना है। ऐसे में सिर्फ पुराने डंप पौने पांच लाख टन कचरे के हिसाब से ही तकरीबन 60 करोड़ रुपए खर्च हो जाएगा। वहीं, रोज निकलने वाले 650 टन कचरे के निष्पादन पर रोज आठ लाख रुपए से ज्यादा का खर्च भी हो रहा है।
650 टन कचरा रोज किया जाएगा निष्पादित
निगम के अधिकारियों की मानें तो शहर से प्रतिदिन 650 टन कचरा निकलता है। जबकि प्रोसेसिंग प्लांट की क्षमता तकरीबन 500 टन की है। ऐसे में दो शिफ्ट में कचरा निष्पादन करने से शहर से रोज निकलने वाला कचरा तो निष्पादित होगा, जबकि 350 टन पुराने कचरे को डिस्पोज किया जाएगा।

खाद व आरडीएफ भी बेचने का अधिकार एजेंसी को दिया
शहर से रोज निकलने वाले 650 टन कचरे के निष्पादन से तकरीबन 50 टन खाद निकलने का अंदाजा लगाया गया है। साथ ही आरडीएफ (75 एमएम से बड़े अवशेष) भी तकरीबन 300 टन के आसपास निकलने का अंदाजा लगाया जा रहा है। वहीं, इन दोनों पर ही एजेंसी का एकाधिकार होगा। आरडीएफ और खाद को अपने हिसाब से बेचकरमुनाफा कमाएगी।
सरोना से कचरा वापस लाने में भी खर्च करनी पड़ेगी राशि
सरोना ट्रेंचिंग ग्राउंड में कचरा डंप नहीं करने के आदेश के बावजूद तकरीबन सालभर का कचरा वहीं डंप पड़ा है। जो कि तकरीबन 2 लाख 37 हजार 250 टन है। वहीं, इसके निष्पादन के लिए फिर से इसे सरोना से प्रोसेसिंग प्लांट लाना होगा। इसमें भी तकरीबन 15 करोड़ रुपए का खर्च आएगा।

सीधी बात
पुलक भट्‌टाचार्य,
अपर आयुक्त, ननि, रायपुर

सवाल: प्लांट की क्षमता रोज 500 टन है,जबकि कचरा 650 टन निकलता है?
जवाब: शिफ्ट बढ़ाया जाएगा और प्रतिदिन कचरे का निष्पादन किया जाएगा।
सवाल: पुराना कचरा भी डंप है?
जवाब: हां, पिछले दो साल का कचरा अब भी सरोना और संकरी में डंप है।
सवाल: इसमें तो काफी समय लगेगा?
जवाब: लगभग 4 साल लगेंगे पूरे निष्पादन में।



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संकरी के प्रोसेसिंग प्लांट में चल रहा कचरा निष्पादन का कार्य।


source https://www.bhaskar.com/local/chhattisgarh/raipur/news/650-tons-of-waste-going-out-every-day-475-lakh-tons-of-garbage-dumped-for-two-years-it-will-take-only-four-years-to-finish-the-citys-accumulated-garbage-127455521.html

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