सारंगढ़ के यह महिला रविवार की देर शाम मेकाहारा लाई गई। यहां तीन कोविड डेडिकेटेड स्टाफ ने महिला का रैपिड टेस्ट किया। महिला ने हिस्ट्री बताई तो उसका आरटीपीसीआर सैंपल भी लिया गया। महिला को अलग लेबर रूम में भर्ती किया गया । दूसरी कोई भी गर्भवती महिला इसके सीधे संपर्क में नहीं आई। पॉजिटिव पाई गई महिला की जांच और इलाज कर रहे डॉक्टर्स ने पीपीई किट पहनी थी लेकिन सीधा संपर्क हुआ, ये लोग घर भी गए। लेबर रूम और वार्ड में घुसने और निकलने का रास्ता एक ही है इसलिए संक्रमण की आशंका होती है। इसलिए स्टाफ को क्वारेंटाइन और आइसोलेशन में भेजा गया है। सोमवार की शाम रिपोर्ट आते ही लेबर रूम समेत कॉरीडोर को सैनिटाइज कराया गया। महिला को कोविड अस्पताल में शिफ्ट किया गया।
डॉक्टर्स, नर्सिंग स्टाफ और सफाई कर्मी खतरे में
डॉ. सुश्री अमरावती, डॉ. एसएन पाणिग्राही (गायनेकोलॉजिस्ट), डॉ. पीएन पटेल (एनिस्थिया), कमला पटेल, मंजू धीवर (नर्स), सविता और मीरा गोस्वामी ( वार्ड आया) कुल 7 लोग सीधे संपर्क में आए, ये फिलहाल क्वारेंटाइन हैं। डॉक्टरों को जिंदल रिजेंसी होटल में क्वारेंटाइन किया गया है बाकी स्टाफ को मेडिकल कॉलेज कैम्पस में रखे गए हैं। इनके अलावा इंटर्न्स (जूनियर डॉक्टर) और स्टाफ मिलाकर अप्रत्यक्ष (इनडायरेक्ट) रूप से संपर्क में आए 7 अन्य लोगों को होम आइसोलेशन में रखा गया है।
स्वास्थ्य विभागकी लापरवाही
मेडिकल कॉलेज के एक डॉक्टर ने इस मामले में बताया कि, कोई भी गर्भवती महिला अगर 3 महीन से लंबी प्रेग्नेंसी के साथ क्वारेंटाइन की गई है तो उसका विशेष ध्यान रखना चाहिए। क्वारेंटाइन अवधि पूरी करने के बाद उसकी सही तरीके से जांच कराई जानी चाहिए। लेकिन सारंगढ़ की इस महिला को क्वारेंटाइन के बाद सीधे घर भेज दिया गया। वहां लेबर पेन हुआ तो उसे मेकाहारा भेज दियाजबकि ऐसे मामलों में जांच के बाद गर्भवती महिला को कोविड-19 अस्तपाल ही भेजना चाहिए ।
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source https://www.bhaskar.com/local/chhattisgarh/raigarh/news/health-department-lapses-in-sarangarh-endanger-corona-warriors-127368501.html
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