होशंगाबाद के घानाबड़ में नर्मदा में डूबने से चार भाई-बहन की मौत हो गई। मृत बच्चों की बड़ी बहन वैशाली गौर और उनके पति को बचा लिया। वैशाली कहती हैं कि एक साथ गंगा दशहरा मनाने की खुशी थी। कुछ दिन पहले ही पति नरेश भाेपाल से रायपुर गांव आए हैं।
हम गंगा दशहरे पर नर्मदा स्नान करने जा रहे थे ताे मामाजी के बच्चे निर्मेश, नमामि (सिद्धी), आयुष, और दीदी का बेटा आदी (13) भी चलने का कहने लगे। हम बाेलेराे से घानाबड़ ब्रिज के पास नर्मदा नदी में पहुंचे। सब किनारे पर कम पानी में नहा रहे थे। अचानक निर्मेश का पैर फिसला और वह डूबने लगा। बचाने के लिए आयुष मदद करने लगा लेकिन डूब गया। बचाने हम दाैड़े ताे बच्चे सिद्धी और आदी भी डूबने लगे। इसके बाद मैं बेहाेश हाे गई। होश आया तो सुना चाराें बच्चाें की माैत हाे गई। सदमा कभी नहीं भूल सकूंगी।

तीन बच्चों सहित 4 की हुई माैत
नर्मदा में डूबने से रायपुर निवासी निर्मेश (21) पिता दिनेश चंद्राैल, नमामि उर्फ सिद्धी (12) पिता नरेश चंद्राेल, आयुष (16) पिता उमेश चंद्राेल और आदी (13) पिता अमित गाैर (निवासी हाेशंगाबाद) की डूबने से माैत हाे गई। चाराें बच्चे एक ही परिवार के हैं। इनमें नर्मेश, सिद्धी और आयुष के पिता सगे भाई हैं। वहीं आदी के पिता अमित परिवार के भांजा दामाद हैं। वैशाली भी भांजी है। आदी और आयुष इकलाैते थे।
चश्मदीद : एक दूसरे को बचाने में सभी गहरे पानी में गए
मैं सुबह 11.10 बजे निर्माणाधीन फोरलेन ब्रिज के पास स्नान था। एक बोलेरो से एक दंपती और चार बच्चे से उतरे। एक-एक कर स्नान करने लगे। कुछ बच्चे गहरे पानी में चले गए। उन्हें सभी ने राेका। उनके कारण बाकी लाेग भी गहरे पानी में चले गए। अचानक तीन बच्चे चीखने लगे। एक बच्चा डूब गया। नर्मदा में केवल एक महिला (वैशाली) और उनके पति (नरेश) ही थी। उनकाें बमुश्किल बाहर निकाला। फिर अन्य लाेगाें काे बचाने गए लेकिन वे नहीं मिले। -अमन गाैर, वैशाली काे बचाने वाला ग्रामीण एवं चश्मदीद
एक और हादसा : भिलाड़िया घाट पर डूबा युवक, माैत
भिलाड़िया घाट पर गंगा दशहरा पर स्नान करने आए टिमरनी के युवक की डूबने से माैत हाे गई। पुलिस के मुताबिक टिमरनी निवासी सचिन उर्फ राहुल (25) पिता सुनील जायसवाल की नर्मदा नदी में नहाने के दौरान डूबने से मौत हो गई। सचिन टिमरनी से सुबह 5 बजे आया था।
पड़ताल हादसे की वजह दो चूक
1. सरपंच-सचिव मुनादी कराकर भूले
2. कोटवार की दूसरी जगह थी ड्यूटी
रायपुर पंचायत के घानाबड़ में नर्मदा के अघोषित घाट पर स्नान करने से चार जानें चली गईं। अफसर हर बार की तरह यह कहकर बचने में लगे हैं कि उक्त स्थान स्नान का घाट नहीं है। लेकिन, पूरे मामले ने विभागीय तंत्र के समुचित इस्तेमाल की विभागीय क्षमता पर सवाल खड़ा कर दिया है। पुलिसबल और होमगार्ड के अलावा ग्राम कोटवार, सरपंच, सचिव, रोजगार सहायक, ग्रामसेवक, पटवारी, गिरदावर जैसे तमाम ऐसा स्टाफ है जिसे गांवों में सरकार के निर्देश का पालन कराने की जिम्मेदारी है और इनका पूरा कार्यक्षेत्र गांवों में ही है। इस मामले में सरपंच-सचिव ने सिर्फ मुनादी करवा दी, फिर बेरियर के अलावा स्नान से रोकने के लिए कोई प्रबंध नहीं किए। ग्राम कोटवार की ड्यूटी दूसरी जगह बांद्राभान में लगा दी तो पटवारी कह रहे हैं कि उस जगह कोई स्नान करने नहीं जाता था।
जिम्मेदारों के जवाब
- घटना दुर्भाग्यपूर्ण है। त्याेहाराें, पर प्रशासन एेसे खतरनाक जगहाें पर गाेताखाेर तैनात करेगा। -जीपी माली, एडीएम
- 12 गाेताखाेराें का दल पहुंचा। चारों शव निकाल लिए। जहां घटना हुई वहां घाट नहीं था। वहां जाना भी प्रतिबंधित था। - आकेएस चाैहान, हाेमगार्ड कमांडेंट
- बैरियर लगाए हैं। सबकाे पता है कि स्नान प्रतिबंधित है, फिर भी लाेग जाते हैं और नहाते हैं। -अंगूरीबाई, सरपंच
- गांव और बांद्राभान घाट पर नर्मदा में स्नान नहीं करने की मुनादी कराई थी। घानाबड़ में स्नान के लिए काेई आता नहीं है। घटना की जानकारी मिली। -देवेंद्र जाटव, पटवारी
एक यह भी कारण : जिस ब्रिज के नीचे हादसा हुआ वहां इस समय पानी का बहाव बहुत ज्यादा है क्योंकि ब्रिज बनाने के लिए पिलरों के बीच में नर्मदा का पानी रोका है। कुछ जगह से ही पानी आगे बढ़ रहा है उसी जगह पर ये लोग नहा रहे थे। इस कारण बच्चे तेज बहाव के कारण गहरे पानी में चले गए। प्रशासन ने इस समय नर्मदा के सभी घाटों पर स्नान पर रोक लगा रखी है।
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source https://www.bhaskar.com/local/mp/hoshangabad/news/four-siblings-drowned-the-elder-sister-spoke-nirmesh-slipped-ayush-too-drowned-in-helping-she-ran-and-then-fainted-after-seeing-siddhi-and-adi-drowning-127364762.html
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