प्रदेश में शिक्षा के नाम पर जमकर प्रयोग किया जा रहा है। हालात ऐसे हैं कि तीन साल पहले 100 करोड़ खर्च प्रदेश के सभी स्कूलों को टैबलेट बांटे गए, लेकिन इनका कोई खास लाभ विभाग को नहीं मिला। वहीं, इनके मेंटेनेंस के नाम पर भी करोड़ों रुपए खर्च किए गए, फिर भी ज्यादातर टैबलेट खराब हैं।
भास्कर टीमको जानकारी मिली कि शिक्षा विभाग टैबलेट के जरिये ऑनलाइन पढ़ाई की योजना बना रहा है। टीम ने इसकी पड़ताल की तो सामने आया कि इनमें से प्रदेश के स्कूलों के 50 फीसदी से ज्यादा टैबलेट खराब हैं। वहीं, इसके मेंटेनेंस के लिए भी पिछले 3 साल में इसके मेंटेनेंस पर ही 50 करोड़ रुपये खर्च किये जा चुके हैं। इसके बावजूद स्कूलों में इसका कोई खास लाभ नहीं मिल पाया है। वहीं, इसमें फीड किए गए डाटा में भी कई प्रकार की गड़बड़ियां हैं, जिसकी वजह से स्कूलों से एंट्री करने के साथ ही अटेंडेंस लगाने में भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, टैबलेट बांटने का मूल उद्देश्य स्कूलाें की ऑनलाइन मॉनीटरिंग थी, साथ ही स्कूलों में संचालित योजनाओं पर भी नजर रखना था। इसके बावजूद न तो स्कूलों से शिक्षकों और बच्चों की अटेंडेंस आ रही है और न ही योजनाओं की मॉनीटरिंग की जा रही है। ऐसे में करोड़ों रुपए पिछले तीन वर्ष में बर्बाद हो चुके हैं।

अभी भी रजिस्टर पर उपस्थिति
स्कूलों में टैबलेट बांटने के दौरान यह दावा किया गया कि शिक्षकों की अटेंडेंस भी इसी से लगाई जाएगी। वहीं, इसमें अटेंडेंस लगाने के दौरान भी दिक्कतें सामने आने लगी। वहीं, इसमें डाटा भी गलत होने की वजह से शिक्षकों की अटेंडेंस भी नहीं लग पाई। ऐसे में अब भी रजिस्टर के जरिए ही अटेंडेंस लगाई जा रही है।
किस उद्देश्य से बांटे गए टैबलेट
- सभी स्कूलों की सेंट्रलाइज मॉनीटरिंग
- बच्चों और शिक्षकों की उपस्थिति
- योजनाओं की मॉनीटरिंग
- ऑनलाइन पढ़ाई
- शिक्षकों की सैलरी
- संकलित डाटा
- यूडाइस वार स्कूलों में व्यवस्था
इन कारणों से योजना में गड़बड़िया
- दूरस्थ अंचलों में नेटवर्क का अभाव
- यूडाइस डाटा में गड़बड़ी
- टैबलेट में फीडेड डाटा में गड़बड़ी
- तकनीकी खराबियां
- हैंडलिंग की समस्या
- योजनावार लाभान्वितों की संख्या में गड़बड़ी
- प्रधानपाठकों की लापरवाही
- सुधार के लिए बीईओ कार्यालय में ही व्यवस्था
ज्यादातर टैबलेट खराब हो चुके हैं
"स्कूलों में बांटे गए ज्यादातर टैबलेट खराब हैं। कुछ में टूट फूट की भी शिकायतें हैं। ऑनलाइन पढ़ाई के लिए फिर से मेंटेनेंस की जरूरत पड़ेगी।"
-जीआर चंद्राकर, डीईओ, रायपुर
सीधी बात
डॉ आलोक शुक्ला,
सचिव, स्कूल शिक्षा विभाग
सवाल - 3 वर्ष पूर्व बांटे गए टैबलेट खराब हो गए हैं?
-हां, उनका मेंटेनेंस कराया जाएगा। उसके लिए एजेंसी है। जो कि बीईओ कार्यालयों में बैठकर मेंटेनेंस करती हैं।
सवाल -इसी से ऑनलाइन पढ़ाई कराने की योजना बनाई जा रही है?
-हां, योजना तो है। लेकिन आईसीटी के तहत भी कई स्कूलों में कंप्यूटर, प्रोजेक्टर दिए गए हैं। इनसे भी पढ़ाई कराई जाएगी।
सवाल -आईसीटी के तहत हाई और हायर सेकंडरी स्कूलों में व्यवस्था बनेगी, प्राइमरी और मिडिल वालों का क्या होगा?
-प्राइमरी और मिडिल स्कूलों के लिए टैबलेट मेंटेनेंस कराए जाएंगे। साथ ही पोर्टल भी है।
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source https://www.bhaskar.com/local/chhattisgarh/raipur/news/online-classes-become-a-challenge-more-than-half-of-tablets-are-defective-127376671.html
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