सरकार की ओर से भले ही ऑटो चलाने का फरमान जारी हो गया है, पर इनका पहिया अभी भी थमा हुआ है। इसका लाभ सवारी व ऑटो मालिक या चालकों को नहीं मिल रहा है। कोरोना संक्रमण के चलते सभी को सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना अनिवार्य है। लॉकडाउन में ऑटो को छूट मिलने के बाद यह शहर में इक्का-दुक्का ही नजर आ रहे हैं। यदि डीजल ऑटो से किसी को रेलवे स्टेशन से नेहरू चौक, बस स्टैंड, सीपत चौक, राजकिशोर नगर या मोपका चौक जाना हो तो आरटीओ से केवल 10 रुपए ही किराया फिक्स है। यह रेट पहले से तय है। कोरोना के चलते अन्य वाहनों के साथ ऑटो भी बंद कर दिए गए थे। ऐसे में ऑटो मालिक व चालकों के सामने रोजी-रोटी की समस्या शुरू हो गई। लॉकडाउन में छूट मिलने के बाद सरकार ने सोशल डिस्टेंसिंग बनाकर ऑटो चलाने का फरमान जारी किया है पर सड़क पर अभी भी काफी कम गाड़ियां देखने को मिल रही है। शहर में पेट्रोल की 2000, डीजल की 3000 व बैटरी से चलने वाली करीब 500 गाड़ियां सहित करीब 5500 गाड़ियां है। इनमें से केवल 100 गाड़ियां ही चल रही हैं।
किराया से अधिक डीजल लग रहा- ऑटो चालक
जरहाभाठा निवासी ऑटो चालक राजू मसीह ने बताया कि उसके पास डीजल गाड़ी है। दो सवारी बिठाना है। मोपका से नेहरू चौक जाने में ही कम 40-50 रुपए का डीजल जलता है। दो सवारी ले जाने पर 20 रुपए ही मिल रहा है। ऐसे में घाटा है। नूतन चौक निवासी किशोर भार्गव का कहना है कि ऑटो चालकों के पक्ष में सरकार को निर्णय लेना होगा। अभी तो वे ऑटो में सब्जी बेच रहे हैं। जब सबकुछ ठीक हो जाएगा तो देखा जाएगा। ।
अब नियम से चलाना होगा-आरटीओ
आरटीओ प्रेम प्रकाश शर्मा का कहना है कि अभी सोशल डिस्टेंसिंग में जितनी सवारियां ले जाना है, वह तो इनके परमिट में ही है। उतने ही की तो परमिट ले रखे हैं। ऐसा नहीं है अभी गाड़ी की कैपेसिटी कम कर दी गई है। अभी तक गलत तरीके से गाड़ी चलाकर फायदा उठा रहे थे। यदि गाड़ियों में सोशल डिस्टेसिंग का पालन नहीं करेंगे तो सवारी भी बैठने के लिए तैयार नहीं होगी। बात रेट की है तो इन्हें शासन का रेट गाड़ी खरीदने से पहले से ही पता है।
भूखे मरने की नौबत-संघ : डीजल ऑटो संघ केअध्यक्ष राकेश सोनकर का कहना है कि ऑटो चालकों के सामने भूखे मरने की नौबत है। एक-एक टाइम खाना खाकर गुजर बसर कर रहे हैं। सवारियां नहीं है। जब तक ट्रेन या बसें नहीं चलेंगी, उन्हें सवारियां नहीं मिलेंगी।
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source https://www.bhaskar.com/local/chhattisgarh/bilaspur/news/less-ride-in-auto-no-money-is-left-out-of-diesel-127368343.html
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