जशपुर को पर्यटन स्थल बनाने के कई काम हो रहे हैं। इसमें ट्रायल टूरिस्ट विलेज भी शामिल हैं। शहर से 4 किलोमीटर दूर बालाछापर स्थित चार एकड़ जमीन पर पर्यटन विभाग इसका निर्माण करा रहा है है। यह नए साल के आने से पहले बनकर तैयार हो जाएगा।
जिले में निवासरत पहाड़ी कोरवा, बिरहोर जैसी जनजातियों की जीवन शैली पर आधारित चीजें जुटाई जा रही है, ताकि बाहर से आने वाले पर्यटक जनजातीय परिवार की रहन-सहन की जीवनशैली के रोमांच से रूबरू हो सके।जिले में पर्यटन के विकास को लेकर इन दिनों तेजी से काम किया जा रहा है। इसी के तहत पर्यटन विभाग ने टूरिस्ट सर्किट योजना के तहत जिले में ट्रायबल टूरिस्ट कॉटेज निर्माण के लिए 8 करोड़ की लागत से बना है। इसका निर्माण कटनी गुमला राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे स्थित ग्राम बालाछापर में किया जा रहा है। जशपुर के कलेक्टर महादेव काँवरे ने बताया कि इस कॉटेज में पर्यटकों को जिले के पहाड़ी कोरवा, उरांव सहित अन्य जनजातियों की जीवन शैली के अनुरूप आवासीय माहौल में रहने की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
आकर्षण का केंद्र वुड कॉटेज
इस कॉटेज में लकड़ी से निर्मित कमरे, पर्यटकों के लिए विशेष तौर से तैयार हैं। गेट से अंदर जाते ही सुंदर लकड़ी की संरचना सामने दिखती है। हमारे देश के छोटे और बड़े आर्किटेक्ट ऐसे घरों के लिए प्रसिद्ध थे। सबसे पहले, यह विकल्प सस्ती कीमत और लकड़ी के फायदे से उचित है। लकड़ी के बने सुंदर मकानों का विशेष महत्व है जिसमे रहकर पर्यटक को प्रकृति से निकटता की अनुभूति होगी , क्योंकि शहरी निवासियों को बस इसके लिए शोर-शराबे वाले शहर से छुट्टी लेने की जरूरत है।
Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
source https://www.bhaskar.com/local/chhattisgarh/raigarh/jashpur/news/wooden-cottages-are-being-prepared-for-tourists-tea-garden-will-increase-beauty-127434732.html
एक टिप्पणी भेजें