भगवान जगन्नाथ की तबियत खराब है। बीमार होने के चलते पिछले शुक्रवार से ही भगवान एकांतवास में चले गए है। इसके चलते जगन्नाथ प्रभु की सेवा की जा रही है। विधि-विधान के साथ पूजा और उनकी तबियत का खास ख्याल रखा जा रहा है। करीब दस दिन और उनका इलाज चलेगा। गायत्री मंदिर समिति के अध्यक्ष पुरेंदर मिश्रा के मुताबिक कोरोना वायरस के चलते शासन से भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा को बाहर निकलने की अनुमति नहीं मिलने पर मंदिर में रथ खींचकर पूजा की जाएगी।
इस बीच उन्हें जड़ी बूटियों से काढ़ा बनाकर दिया जाता है। जिससे कि उनके तबियत में सुधार आए। जगन्नाथ मंदिरों में रथयात्रा से पहले नेत्रोत्सव मनाया जाता है। इसमें भगवान की तबियत में सुधार होता है और उनकी आंखें खुलने लगती है। जब वे पूरी तरह स्वस्थ्य हो जाते है, तो वे सैर पर निकलते है। यात्रा के 9 दिन बाद वे अपने मौसी के घर जाते है। इसमें प्रभु जगन्नाथ के साथ भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा रहती है।
इसके चलते शहर के मंदिरों में भगवान की पूजा अर्चना विधिवत की जा रही है। भगवान के इलाज के लिए जितनी औषधियां उन्हें दी जाती है। बाद में उन्हें भक्तों में बांट दिया जाता है। ऐसी मान्यता है कि भगवान का यह प्रसाद किसी बीमार को मिल जाए तो उसे बीमारी से राहत मिल जाती है। अभी करीब दस दिनों के बाद प्रभु की आंखें खुलेंगी तो इस अवसर पर नेत्रोत्सव मनाया जाएगा। उसके बाद वे भाई बहन के साथ रथ में सवार होकर शहर घूमने निकलेंगे। ज्यादा नहाने से प्रभु की तबियत बिगड़ती है और उनका श्रृंगार भी। नयन उत्सव में मंदिरों में प्रभु का विशेष श्रृंगार किया जाता है।
गायत्री मंदिर समिति के अध्यक्ष ने बताया कि भगवान की तबियत अभी खराब है। मंदिर में पुजारी विधिवत पूजा पाठ कर रहे है। उनकी तबियत ठीक होगी और वे बाहर घूमने निकलेंगे। वहीं कोरोना महामारी के चलते सरकार के आदेश का पालन किया जाए।
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source https://www.bhaskar.com/local/chhattisgarh/raipur/news/for-the-first-time-mahaprabhu-will-not-revolve-in-the-rath-yatra-temple-complex-in-the-city-127404618.html
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