छत्तीसगढ़ में पहली बार अनूठा अायोजन हुआ। बालोद में डौंडीलोहारा ब्लॉक के वनग्राम टुंडेकुंडेल (चिलमगोटा) के जंगल 10 गांवों के कलाकारों ने गेड़ी नृत्य किया। खास बात यह है कि इस कार्यक्रम में न तो कोई दर्शक था और न ही मुख्य अतिथि। दुनिया के सामने लाने के लिए इसे फेसबुक पर लाइव किया गया। इस दौरान मोहरी, गुदुम, खड़पड़ी, डमऊ, गोला, दफड़ा जैसे प्रदेश के पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुन पर कलाकार सोशल डिस्टेंसिंग के साथ 2 घंटे तक थिरकते रहे।
दरअसल, कोरोना संक्रमण के बीच छत्तीसगढ़ी परंपरा को बचाने यह अनूठा प्रयोग वनांचल गेड़ी नृत्य दल समिति के निर्देशक व संचालक सुभाष बेलचंदन ने किया। वे चिलमगोटा प्राइमरी स्कूल के शिक्षक हैं। उन्होंने बताया कि जिस गांव के जंगल में गेड़ी नृत्य करेंगे, वहां कुल 18 परिवार बसे हुए हैं। इनमें 18 कलाकार गेड़ी में नृत्य करेंगे और 8 वादक रहेंगे। उन्होंने बताया कि इसे यू-ट्यूब में भी अपलोड किया जाएगा। बताते हैं कि प्रदेश में यह पहला मौका है, जब कलाकारों ने इस तरह प्रस्तुति दी है।
इंटरनेशनल मंच पर भी दे चुके हैं अपनी प्रस्तुति
सुभाष बेलचंदन ने बताया कि वर्ष 2018 में यू-टूयब में गुवाहाटी के इंटरनेशनल आर्ट फाउंडेशन के डायरेक्टर मिंटू डेका ने नृत्य करते कलाकारों को देखा था। उन्होंने गुवाहाटी में आमंत्रित किया। जहां भारत सहित श्रीलंका, इंग्लैंड, ब्रिटेन, इटली, साउथ कोरिया, भूटान, मिस्र, तुर्की सहित अन्य देशों के 150 कलाकार शामिल हुए थे। इन कलाकारों के पास जाने के लिए पैसे नहीं थे तो उन्होंने खुद के वेतन का 57 हजार रुपए खर्च किया।
जिले के इन गांवों के 20 सदस्य जुड़े हैं समिति में
डौंडीलोहारा, रेंगाडबरी, चिलमगोटा, बंजारी, दुर्गीटोला, खैरकट्टा, भीमपुरी, गुरामी, गोटाटोला, टुंडेकुंडेल गांव के 20 लोग वनांचल गेड़ी दल समिति में जुड़े हैं। शिक्षक जितेन्द्र साहू, मोरजध्वज इस्दा, अशोक निषाद, पिनेश कोठारी, सुपेश यादव, शेषलाल रावटे, भूपेन्द्र, खिलेंद्र, विनय, देवा, विश्राम, बाबूलाल, राकेश, जागृत, टेकराम नायक, जनता राम जम्दारे, अंकालू राम यादव, खोरबाहरा सहित अन्य जुड़े हैं। जो कलाकार के अलावा किसान व मजदूर हैं।
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source https://www.bhaskar.com/local/chhattisgarh/news/hareli-utsav-in-chhattisgarh-balod-artists-from-10-villages-danced-gedi-in-jungle-127533019.html
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