राजधानी में जिला प्रशासन और नगर निगम के डोर टू डोर कोरोना सर्वे के एक महीने पूरे हो गए हैं। अभी सर्वे का तीसरा चरण चल रहा है। कोरोना संदिग्धों की जांच के लिए 25 जून से सर्वे की शुरूआत हुई। जिला नगर निगम प्रशासन के अलावा स्वास्थ्य, शिक्षा विभाग के कर्मचारी भी रायपुर के हर गली मोहल्ले में पहुंचकर इसको अंजाम दे रहे हैं।
भास्कर पड़ताल में पता चला है कि कोरोना संदिग्धों की जांच के लिए किए जा रहे सर्वे में ज्यादातर रसूखदार घरों में अभी तक सर्वे टीम को एंट्री नहीं मिल पा रही है। 20 मिनट से आधा घंटे तक टीमों को दरवाजे पर ही खड़े रहना पड़ रहा है। इसलिए ऐसे घरों में टीमों को बार बार जाने की नौबत आ रही है। भास्कर को श्यामनगर इलाके में सर्वे करने वाली टीम ने बताया कि ऐसे घरों में अब तक आधा दर्जन से बाहर चक्कर लगा चुके हैं, घर के अंदर से ही दरवाजा नहीं खोलेंगे जवाब मिल रहा है। इस सर्वे में टीमों को दर्जन भर से ज्यादा सवाल पूछने होते हैं, इसमें बाहरी राज्य या जिले से आने से लेकर सर्दी खांसी बुखार, गर्भवती बुजुर्ग जैसे तमाम बिंदु रहते हैं। लोगों की ओर से सर्वे टीम को नहीं मिल रहे सहयोग के कारण अभी तक शहर के 900 हिस्सों में काम कर रही दो हजार से ज्यादा लोगों की टीमों का केवल 60 फीसदी काम ही पूरा हो पाया है। सर्वे को इस तरह डिजाइन किया गया है कि एक घर में एक महीने में कम से कम दो से तीन बार टीम दस्तक दे, लेकिन रसूखदारों की लापरवाही के कारण टीमों का वक्त भी जाया हो रहा है।
दो लोगों की टीम को 500 घर तीन से चार बार दस्तक देनी है : नगरीय क्षेत्र के 900 हिस्सों में दो लोगों की टीम को 500 घर में तीन से चार बार दस्तक देनी है। हर दिन जोन के हिसाब से इसका रिकॉर्ड भी अपडेट होता है। एक घर में सर्वे के सवाल जवाब में टीम को पंद्रह से बीस मिनट लग रहे हैं। ऐसे इलाके जो बस्ती क्षेत्र में वहां सर्वे का काम पूरा हो चुका है। लेकिन कॉलोनियों और रिहायशी इलाकों में सर्वे अब भी वक्त से पीछे चल रहा है। सर्वे के लिए तीन तरह के प्रपत्र हैं। एक प्रपत्र उन लोगों के लिए है जिन्हें सर्दी खांसी बुखार के अलावा सूंघने, स्वाद नहीं आने, सांस लेने में दिक्कत जैसी समस्याएं है। ऐसे लोग जिन्हें टीबी, बीपी, शुगर, एचआईवी, कैंसर, हार्ट की बीमारी है, उनकी जानकारी अलग से ली जा रही है। गर्भवती महिलाओं बच्चों और बुजुर्गों के हेल्थ से जुड़े लक्षणों का ब्योरा अलग रखना है। ऐसे लोग जिन्हें किसी तरह के लक्षण या बीमारी नहीं है, उनकी एंट्री अलग प्रपत्र में होगी। बाहर की यात्रा की है या बाहर से कोई आया है तो इसकी भी एंट्री चल रही है।
संदिग्धों की जानकारी जुटाने रोजाना एक हजार कॉल
सर्वे के डेली रिपोर्ट के हिसाब से जो डाटा बेस बनाया जा रहा है, उसके आधार पर की जाने वाली कांटेक्ट ट्रेसिंग और ट्रेकिंग के लिए स्मार्ट सिटी ने कॉल सेंटर भी शुरु किया है। करीब चार महीने में कोरोना संदिग्धों तक फोन के जरिए जानकारी जुटाने में 30 लाख रुपए खर्च का अनुमान है। इसमें रोजाना एक हजार से ज्यादा कॉल किए जा रहे हैं।
आंकड़े में सर्वे इस तरह
- 10 जोन, 900 भागों में बांटी दो -दो लोगों की टीम
- 500 घर हर एक टीम के हिस्से ग्रिड में
- 10 इंसिडेंटल कमांडर
- 1900 से ज्यादा कर्मचारी
"डोर टू डोर सर्वे के जरिए कोरोना संदिग्धों की जानकारी जुटाने के लिए टीमें पूरे शहर में घूम रही है। सभी को इसमें सहयोग करना चाहिए इसके जरिए ही हम शहर को सुरक्षित कर सकते हैं।"
- पुलक भट्टाचार्य, अपर आयुक्त, नगर निगम
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source https://www.bhaskar.com/local/chhattisgarh/raipur/news/bungalow-doors-closed-for-corona-survey-team-figures-incomplete-even-after-many-rounds-127559735.html
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