छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में बुधवार को 18 नक्सलियों ने कलेक्टर के सामने सरेंडर किया है। इनमेंएक महिला भी शामिल है। वहीं, एक-एक लाख रुपए के चार इनामी भी हैं। यह लोग सड़कें काटने, पुल तोड़ने, विस्फोटक लगाने जैसे आदेशों और कामों से तंग आ गए थे। अब यही आत्मसमर्पित नक्सली उन टूटे हुए पुलों और सड़कों को फिर से बनाने में प्रशासन का सहयोग करेंगे।
पहली बार कलेक्टर के सामने सरेंडर
अक्सर सरकार की नीतियों से प्रभावित होकर नक्सलियों के सरेंडर करने की बात सामने आती है। संभवत: ऐसा पहली बार हुआ है, जब तोड़फोड़ से तंग आकर इतनी बड़ी संख्या में नक्सल का रास्ता छोड़ा है। इनमें एक-एक लाख रुपए के इनामी तेलाम भीमा औरतेलाम चैतू, संतू कुंजाम और मंगल भास्कर शामिल हैं। यह भी पहली बार ही हुआ है कि नक्सलियों ने बड़ी संख्या में कलेक्टर के सामने सरेंडर किया है।
पहले काम करने आंध्र प्रदेश भाग गए थे
सरेंडर करने वाले युवकों ने बताया कि करीब चार साल पहले 2016 में गांव से उनको जबरदस्ती नक्सली ले गए थे। इसके बाद से ही उनसे पुल तोड़ने और सड़कें कटवाने का काम लिया जाता। इन सबसे तंग आकर वे आंध्र प्रदेश भाग गए और वहां बोर गाड़ी का काम करने लगे, लेकिन नक्सलियों ने वहां भी परेशान करना शुरू कर दिया। इस पर उन्हें लगा कि सरेंडर करना ही ठीक होगा और वे घर लौट आए।
तोड़े गए पुल और सड़क बनाने के लिए प्रशासन संसाधनदेगा
नक्सलियों के सरेंडर करने के समय कलेक्टर दीपक सोनी, एसपी डॉ. अभिषेक पल्लव, डीआईजी सीआरपीएफ डीएन लाल मौजूद थे। इस दौरान सरेंडर करने वाले नक्सलियों से कलेक्टर दीपक सोनी ने कहा कि अब जो पुल और सड़कें तोड़ी हैं, उनको तुम ही लोग बनाओ। प्रशासन इसके लिए संसाधन उपलब्ध कराएगा। साथ ही आगे रोजगार भी देंगे। प्रशासन की ओर से सरेंडर करने वाले नक्सलियों को 10-10 हजार रुपए की सहायता दी गई है।
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source https://www.bhaskar.com/local/chhattisgarh/news/eighteen-naxals-surrender-in-chhattisgarh-dantewada-127466240.html
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