बांगो बांध के तीन गेट खोलकर 14 हजार 500 क्यूसेक छाेड़ा पानी, निचली बस्तियों में बाढ़ का खतरा, अलर्ट

जिले में रुक-रुककर हो रही बारिश व कोरिया में भी बेहतर बारिश के बाद हसदेव नदी में अधिक पानी आने से बांगाे बांध लबालब हो गया। गुरुवार रात 12 बजे बांध का 6 नंबर गेट खोलकर 4028 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा था। शुक्रवार को दोपहर 1 बजे तक जलस्तर बढ़ने पर गेट नंबर 5 व 7 को भी खोल दिया गया। देर शाम तक बांध से 14 हजार 500 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा था।

पानी की मात्रा और बढ़ने की संभावना है। हाइडल पॉवर प्लांट से 9 हजार क्यूसेक मिलाकर 23 हजार क्यूसेक पानी दर्री बरॉज में आ रहा है। इसकी वजह से बरॉज का दो गेट खोलकर 8 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। बारिश के बीच बाढ़ के खतरे को देखते हुए प्रशासन निचली बस्तियों पर नजर रख रही है।

एक दिन पहले ही बस्तियों में अलर्ट जारी कर दिया था। शुक्रवार को भी रुक-रुककर बारिश होती रही। हसदेव बांगो बांध का निर्माण 1992 में पूर्ण हुआ। बांध बनने के 28 साल में छठवीं बार गेट खोलकर पानी छोड़ने की नौबत आई है। बारिश के समय बाढ़ की स्थिति न हो इसके लिए हाइडल प्लांट को 72 घंटे चलाकर 9 हजार क्यूसेक पानी प्रति सेकंड छोड़ा जाता है।

बांगो से पानी छोड़ने पर 8 घंटे में पहुंचता है दर्री बरॉज

बांगो बांध से पानी छोड़ने पर 50 किमी दूर दर्री बरॉज तक पहुंचने में 8 घंटे का समय लगता है। बरॉज में पानी आने के बाद दो गेट से 8 हजार 282 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा था। शाम को एक गेट खोलकर 6800 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। एसडीओ एसएन साय ने बताया कि दोपहर एक बजे दो गेट खोलकर पानी छोड़ने की मात्रा बढ़ाई गई है।

जांजगीर-चांपा, रायगढ़ व संबलपुर में भी दी सूचना

बांगो बांध का पानी दर्री बरॉज में आता है। दोनों ही बांध हसदेव नदी पर बने हैं। हसदेव जांजगीर-चांपा जिला होते हुए महानदी में जाकर मिलती है। महानदी का पानी रायगढ़ होते हुए संबलपुर ओडिशा के हीराकुंड बांध में जाता है। इसकी वजह से प्रशासन ने रायगढ़, जांजगीर-चांपा के साथ ही संबलपुर उड़ीसा के अधिकारियों को भी पानी छाेड़ने की सूचना दी है।

इन गांवों में रहता है बाढ़ का खतरा, कराई मुनादी

हसदेव बांगो क्षेत्र के साथ ही नदी किनारे रहने वाले ग्रामीणों को सतर्क रहने मुनादी कराई गई है। जिसमें बांगो, लेपरा, कछार, कोनकोना, पोड़ी उपरोड़ा, चिर्रा, पाराघाट, सिरकीकला, केरा, काथा, सिलयारीपारा, छिर्रापारा, डुग्गूपारा, तिलाईडांड, नवागांव, कोड़ियाघाट, पोड़ीखोहा, धनगांव, लोतलोता, नर्मदा, औराकछार, झाबू, सोनगुढ़ा, स्याहीमुड़ी, जैलगांव आदि शामिल हैं।

वर्ष 2011 में दो बार गेट खोलने की आई थी नौबत

हसदेव बांगो बांध बनने के 28 साल में बांध का गेट छठवीं बार खोलने की नौबत आई है। पहली बार वर्ष 1994 में गेट खुला था। वर्ष 2008 व 2011 में भी गेट खोलकर पानी छोड़ना पड़ा था। 2011 में दो बार गेट खोलने की नौबत आई थी। वर्ष 2014 में गेट खोलने की नौबत आई थी। इसके बाद सितंबर 2018 में चार गेट खोलकर 10 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया था।



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14 thousand 500 cusecs of water opened by opening three gates of Bango dam, danger of flood in lower settlements, alert


source https://www.bhaskar.com/local/chhattisgarh/bilaspur/korba/news/14-thousand-500-cusecs-of-water-opened-by-opening-three-gates-of-bango-dam-danger-of-flood-in-lower-settlements-alert-127595038.html

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