कोंडागांव जिले के केशकाल के भंगाराम में लगने वाले भंगाराम जात्रा पर भी कोरोना का असर दिखाई दे रहा है। इस साल लगने वाले इस मेले में 9 परगना के सिर्फ 45 लोगों के साथ ही भंगाराम समिति के 15 प्रमुख लोग ही शामिल होंगे। हर दिन जिले में बढ़ रहे मरीजों को देखते हुए यह आदेश कलेक्टर के निर्देश पर एसडीएम दीन दयाल मंडावी ने जारी किया है।
मंडावी ने कहा कि कोरोना की मरीजों की संख्या बढ़े नहीं और मेला लगने की परंपरा कायम रहे इसको देखते हुए यह निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा कि पुजारी से लेकर मेेले में शामिल होने वाले लोगों को मास्क की अनिवार्यता और सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का पालन करना होगा। लापरवाही करने पर कार्रवाई होगी। मेले में शामिल लोगों की सुरक्षा और सुविधा का ध्यान रखा जाएगा।
सदियों से चली आ रही परंपरा इस बार भी होगी
भंगाराम जात्रा में देवी-देवताओं के भाग्य का फैसला किया जाता है। यह परिपाटी सालों से चली आ रही है। इस साल भी इस रस्म को पूरा किया जाएगा। समिति के सदस्यों ने बताया कि मान्यता है कि जब कोई देव या बाहरी शक्तियां किसी गांव में या किसी व्यक्ति को परेशान करें तो गांव वाले बैगा के माध्यम से उसे शांत करते हैं। उसकी इच्छा पूर्ति के लिए जो वस्तुएं लगती हैं उसको एक टोकने में भर कर गांव की सरहद में रख देते हैं। फिर वह अगले गांव तक पहुंचते हुए जात्रा के दिन केशकाल के इस मंदिर तक पहुंच जाता है।
आज आंगा देव पहले करेंगे परिक्रमा
शनिवार को लगने वाली अदालत में पहले आंगा देव परिक्रमा करेंगे। इसके बाद उन्हें उस स्थान पर ले जाया जाएगा जहां पर वस्तुएं फेंकी जाती हैं। वापस आने के कुछ देर बाद इंसान देवी-देवताओं की किस्मत का फैसला करेंगे। इस दौरान जो देव किसी गांव वाले को यदि ज्यादा परेशान करते हैं तो उनको कुछ महीने या कई वर्षों की सजा दी जाती है। इस दौरान गांव का कोई भी व्यक्ति उस देवता की पूजा-अर्चना नहीं करेंगे। इस प्रकार दोपहर से देर रात तक सुनवाई होती है फिर दूसरे दिन सुबह बिदाई होती है।
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source https://www.bhaskar.com/local/chhattisgarh/raipur/keshkal/news/bhangaram-fair-will-include-45-of-9-parganas-and-15-heads-of-committee-127596549.html
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