हेमू नगर में रहने वाली 17 साल की मोनिका शर्मा। पिता फौज से रिटायर्ड और मां को कैंसर। इन सारी परिस्थितियों के बावजूद शूटर बनकर मोनिका ने बिलासपुर का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया है। उसने दिल्ली में हुई 10 मीटर की रेनॉल्ट शूटिंग प्रतियोगिता में अपने प्रतिद्वंद्वियों को हराने के साथ ही भारतीय टीम में जगह बनाई है। मोनिका का सपना है कि वह ओलिंपिक में मेडल लाए। इसके लिए वह भरपूर प्रयास कर रही है।
मोनिका की मां को कैंसर है। पिछले कुछ सालों से अस्पताल में कीमोथेरेपी के बाद उनका इलाज चल रहा है। पिता दीपक शर्मा फौज में रहे हैं। पैरा मिलिट्री सेना का हिस्सा रहे हैं और रिटायर्ड हो चुके हैं। पिता से ही उन्हें शूटर बनने की प्रेरणा मिली है। दैनिक भास्कर से बातचीत में मोनिका बताती हैं कि बचपन में पिता ने पूछा था कि बेटी खिलौने में क्या चाहिए? मैंने राइफल की मांग कर दी।
पिता ने अपनी आर्थिक स्थितियों को ना देखते हुए भी मुझे कानपुर से लाकर राइफल दी। फिर क्या मैं निशानेबाजी में जुट गई। बीमार मां की सेवा करने के अलावा मैंने 2 साल निशानेबाजी में मेहनत की। मैदान नहीं था इसलिए पिता मुझे छठ घाट की उन जगहों पर लेकर जाया करते जहां मटका रखा होता। मैं दूर से मटकों पर राइफल से निशाना साधा करती थी। मोनिका के पिता ने बिलासपुर विधायक को चिट्ठी लिखकर निशानेबाजी के लिए स्पोर्ट्स गन एवं एनाटॉमिक व किट दिलाने की मांग की है।
बिलासपुर से शुरुआत, केरल में भारतीय टीम का हिस्सा बनी
साल 2019 में मोनिका शर्मा ने केंद्रीय विद्यालय से जिला स्तरीय शूटिंग की शुरुआत की। रायपुर में राज्य स्तर प्रतियोगिता में जीत हासिल की। एक सितंबर 2019 को पश्चिम बंगाल के आसनसोल में फ्री नेशनल और इसके बाद भोपाल में राष्ट्रीय खेल का हिस्सा बनीं और जीत हासिल की। 1 फरवरी 2020 को तिरुवनंतपुरम केरल में ट्रायल क्वालीफाई कर बिलासपुर को पहचान दिलाई और भारतीय टीम का हिस्सा बन छत्तीसगढ़ की पहली शूटर बनी।
मेरी सिर्फ दो ही बेटियां, वह भी 100 के बराबर : पिता दीपक शर्मा 12वीं में पढ़ने वाली बेटी मोनिका शर्मा के खेल से संतुष्ट हैं। उन्होंने बताया कि मेरी बेटी 2 साल के कठिन मेहनत के बाद राष्ट्रीय खेल में रेनॉल्ट शूटर बनी है। उनकी सिर्फ दो ही बेटियां हैं और वह भी 100 के बराबर हैं। उन्होंने हर माता-पिता से अपील की है कि बेटियों को सपोर्ट करें।
लोगों ने ताने दिए, उलाहना दी फिर भी नहीं मानी हार: पिता दीपक ने बताया कि मोनिका को बचपन से निशानेबाजी का शौक था। मैं उसे ऐसी जगह लेकर जाता था जहां वह निशाना लगा सके। धूप, बारिश या ठंडी में बच्ची को ले जाने पर लोग तंज कसते थे। उलाहना देते फिर भी मैंने हार नहीं मानी। मैने अपनी बच्ची की आंखों के सपनों को पढ़ लिया था।
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source https://www.bhaskar.com/local/chhattisgarh/bilaspur/news/monika-became-a-shooter-by-targeting-the-chattis-of-chhat-ghat-127670144.html
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