सिंधी समाज ने सोमवार को थधड़ी पर्व मनाया। कोरोना संक्रमण के चलते समाज की महिलाओं ने घर पर ही मां शीतला की पूजा की। साथ ही परिजनों के साथ विश्वशांति की कामना की। अनुष्ठान में विशेष रूप से मीठा लोला, खट्टा भात, पुआ और एक दिन पहले बनाए व्यंजनों का भोग लगाया गया।
पं. अनूप शर्मा, पं. विकास शर्मा और प्रेम प्रकाश मध्यानी ने बताया कि सिंध में जहां शीतला माता का मंदिर है, वहां सदियों से यह परंपरा चली आ रही है। मां शीतला की पूजा कर लोग अपने व परिवार की सुख शांति के लिए कामना करते है। थधड़ी के दिन सभी सुबह माता की पूजा के बाद ठंडा भोजन खाया और विभिन्न प्रकार के व्यंजनों का स्वाद लिया। एक दिन पहले ही घरों में ही पकवान बनाए गए और पूजा के बाद खाया गया। वहीं सोमवार को घरों में कुछ भी नहीं बनाया गया। थधड़ी का अर्थ है शीतल करने वाली। थधड़ी मुख्य रूप से सुख-शांति व आरोग्यता की देवी मां शीतला की पूजा आराधना का पर्व है। भादो कृष्ण षष्ठी-कमरछठ से समाज की महिलाएं स्नानादि से निवृत्त कर सिंधी व्यंजन व पकवान तैयार करती है। इसे दूसरे दिन सप्तमी तिथी पर पूजा के बाद खाया जाता है। इन व्यंजनों को तैयार करने के बाद चूल्हे को पीली मिट्टी से लीपकर एक कलश में जल भरकर चूल्हे की पूजा अर्चना की जाती है। दूसरे दिन थधड़ी पर्व पर पूजा व कथा श्रवण के बाद थाली में पूजन स्थल से जल लेकर चूल्हे और घर में मंत्रोच्चार के साथ छिड़काव किया जाता है। इस पूजा में बच्चों को विशेष रूप से
शामिल किया जाता है और थधड़ी माता से उनकी कुशलता के लिए प्रार्थना की जाती है।
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source https://www.bhaskar.com/local/chhattisgarh/raipur/news/sindhi-society-celebrated-thadhri-festival-worship-in-homes-127606713.html
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