सांस में तकलीफ वाले मरीजों के फेफड़े का अब सीटी स्कैन होगा, ताकि पता चले कितना इंफेक्शन

पीलूराम साहू | कोरोना का पता लगाने के लिए अब तक जितनी भी तरह की जांच हो रही है, जिनमें स्वाब का सैंपल लिया जा रहा है, उनमें कोरोना पाजिटिव तो पता चलता है लेकिन यह नहीं पता चल पाता कि फेफड़े में कितना इंफेक्शन फैल गया है। कोरोना मरीजों को सांस लेने में दिक्कत की वजह फेफड़े में इंफेक्शन ही है। इसका पता नहीं चलने से मरीजों की हालत और गंभीर होती जाती है। डाक्टरों का मानना है कि सीटी स्कैन मशीन से जांच होगी तो फेफड़े का इंफेक्शन तुरंत पता चल जाएगा। इससे मरीज कितना गंभीर है, यह भी पता चलेगा और इलाज आसान होगा।
वर्तमान में आरटीपीसीआर, रैपिड एंटीजन किट व ट्रू नॉट मशीन से कोरोना की जांच हो रही है। इसमें आरटीपीसीआर को जांच के लिए सबसे प्रमाणिक माना गया है। प्रदेश में कोरोना मरीजों की लगातार मौत ने डॉक्टरों की चिंता बढ़ा दी है। प्रदेश में कोरोना से 219 व रायपुर में 117 मरीजों की मौत हो चुकी है। कोरोना कोर कमेटी की बैठक में विशेषज्ञों ने इस पर सुझाव दिया है कि कोरोना की सबसे प्रमाणिक रिपोर्ट के लिए फेफड़े का सीटी स्कैन जांच की जाए। सीटी स्कैन से पता चल जाता है कि फेफड़े में कहां धब्बे हैं, यानी निमोनिया कितना दुष्प्रभाव डाल चुका है। जांच रिपोर्ट को एक से पांच नंबर तक ग्रेडिंग की जाएगी। इससे मरीज की गंभीरता का पता चलेगा। जिसे ग्रेड एक नंबर दिया जाएगा, वह माइल्ड होगा। पांच ग्रेडिंग वाले गंभीर होंगे, जिन्हें तुरंत आईसीयू में भर्ती कर इलाज किया जाएगा।
वर्तमान में कोरोना की जांच के लिए गले व नाक से स्वाब का सैंपल लिया जाता है। रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर संक्रमण की पुष्टि तो होती है, लेकिन गंभीरता का पता नहीं चलता। कई युवा अथवा जिनका इम्यून पॉवर ज्यादा रहता है, फेफड़े में गंभीर इंफेक्शन होने के बावजूद उनमें लक्षण नजर नहीं आ रहे हैं। यही वजह है कि कई मरीज अस्पताल आने के बाद कुछ घंटे के भीतर दम तोड़ रहे हैं। ऐसे में फेफड़ों का सीटी स्कैन मददगार होगा क्योंकि हालात पता चलते ही तुरंत उपचार शुरू हो सकेगा।

स्वाब सैंपल की जांच में फेफड़े का इंफेक्शन पता नहीं चलता, इससे गंभीर होने लगता है मरीज
अंबेडकर के सीटी स्कैनर में 2 मिनट में एक जांच संभव
अंबेडकर अस्पताल के रेडियो डायग्नोसिस विभाग में 128 स्लाइस एडवांस सीटी स्कैन मशीन लगी है। इसमें एक व्यक्ति की जांच में महज दो मिनट लगेंगे। विभाग के एचओडी डॉ. एसबीएस नेताम ने बताया कि जांच के दौरान ही रेडियोलॉजिस्ट स्क्रीन देखकर फेफड़े में इंफेक्शन का पता लगा लेगा। फेफड़े में इंफेक्शन है तो धब्बा या दाग दिखता है। इससे संक्रमण के ग्रेड का पता चलेगा। कोरोना संदिग्ध की जांच के लिए क्या टाइमिंग हो, इसकी योजना बनाई जा रही है। हर व्यक्ति की जांच के बाद मशीन को सेनेटाइज किया जाएगा ताकि संक्रमण की आशंका बिल्कुल न हो।

जांच और समय

  • आरटीपीसीआर - 6 से 8 घंटे
  • रैपिड एंटीजन - 30 मिनट
  • ट्रू नॉट - 3 से 4 घंटे
  • सीटी स्कैन - 2 मिनट

"फेफड़े में इंफेक्शन का पता करने के लिए सीटी स्कैन सबसे प्रमाणिक जांच है। इससे मरीज की स्थिति की गंभीरता पता चलेगा और इलाज आसान होगा।"
-डॉ. आरके पंडा, चेस्ट एक्सपर्ट व सदस्य कोरोना कोर कमेटी



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Corona will have a CT scan of the lungs of patients with respiratory problems, to know how much infection


source https://www.bhaskar.com/local/chhattisgarh/raipur/news/corona-will-have-a-ct-scan-of-the-lungs-of-patients-with-respiratory-problems-to-know-how-much-infection-127652550.html

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