नगर निगम में तिफरा नगर पालिका, सकरी और सिरगिट्टी नगर पंचायत सहित 18 पंचायत क्षेत्रों को शामिल हुए अभी बमुश्किल साल भर नहीं हुए कि अवैध प्लाटिंग और अवैध निर्माण के सैकड़ों मामले सामने आ गए हैं। हैरत की बात तो यह है कि यह निगम प्रशासन, एसडीएम और तहसील के जिम्मेदार अधिकारियों की जानकारी में है, इसके बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।
नगर तथा ग्राम निवेश विभाग ने जरूर बिना ले आउट पास कराए अवैध प्लाटिंग के मामलों में नोटिस जारी किया है। ‘दैनिक भास्कर’ की पड़ताल के मुताबिक अवैध प्लाटिंग जिन स्थानों पर जोर शोर पर चल रहा है उसमें रायपुर रोड, मंगला गांव, घुरु-अमेरी, सकरी, उस्लापुर, लालखदान और मोपका शामिल है। अवैध प्लाटिंग और अवैध निर्माण से बिल्डर तो लाखों कमा ले रहे हैं, परंतु जीवन भर की पूंजी लगाकर जमीन, मकान खरीदने वालों को अनियमित विकास की त्रासदी झेलने पर विवश होना पड़ता है। कालोनाइजर एक्ट में कड़े प्रावधान हैं, परंतु जिनको इसका पालन कराना है, वह मामला दबाने की कोशिश करते नजर आते हैं।
सरकारी जमीन में कब्जे का मुद्दा सामान्य सभा में उठेगा
अवैध प्लाटिंग, बेजा कब्जा और अवैध निर्माण के मामले में मोपका कुख्यात है। अवैध प्लाटिंग का सिलसिला मोपका तालाब से शनि मंदिर जाने वाली रोड के दोनों ओर शुरू हो जाता है। इसी प्रकार कुटीपारा, धान मंडी रोड और बिलासा डेयरी के पास तो फ्लैट तक बना डाले गए हैं। मेयर रामशरण यादव का आरोप है कि मोपका की करीब 500 एकड़ सरकारी जमीन पर बेजा कब्जा कर बिल्डर अवैध प्लाटिंग कर रहे हैं। पिछले महीने उन्होंने भवन शाखा को निगम एरिया में अवैध निर्माण और अवैध प्लाटिंग के मामले में रिपोर्ट तैयार करने कहा था। ऊपर के अधिकारी ने 8 जोन कमिश्नरों को चिट्ठी लिखी और मामला ठंडे बस्ते में चला गया। पार्षद नंदनी साखन दर्वे ने बताया कि वार्ड क्रमांक 47 पं रामगोपाल तिवारी नगर में 5-6 बिल्डर अवैध प्लाटिंग में संलग्न हैं। राजस्व अमले के साथ इनकी मिलीभगत है, जिसके कारण कार्रवाई नहीं हो पा रही है। उन्होंने कहा कि 13 अगस्त की सामान्य सभा मंे वह इस मुद्दे को उठाएंगी।
अवैध प्लाटिंग के 78 मामले, बिल्डिंग सेक्शन ने फाइल दबाई
खबर है कि मोपका, बिजौर, दोमुंहानी, लिंगियाडीह, सकरी, उस्लापुर सहित शहर में अवैध प्लाटिंग के 78 मामले सूचीबद्ध किए गए हैं। इनमें कई रसूखदार शामिल हैं। निगम का बिल्डिंग सेक्शन मामले की फाइल दबाए बैठा है। आरोप है कि इसमें उन लोगों की छंटनी की जा रही, जिनके ताल्लुकात निगम के बड़े पदाधिकारियों से हैं। निर्वाचित परिषद ने अवैध निर्माण की सूची देने के लिए दो महीने पूर्व निर्देश दिए थे, पर सूची नहीं बनी। ‘दैनिक भास्कर’ ने हाल ही में सदर बाजार रोड पर अवैध निर्माण की फोटो प्रकाशित की थी। नोटिस के बाद मामला दबा दिया गया। अवैध प्लाटिंग के मामले में इंजीनियर लगातार हीलाहवाला कर रहे हैं।
कड़े कानून, अफसर, बिल्डर भी दायरे में
छत्तीसगढ़ नगर पालिक निगम अधिनियम 1956 के अंतर्गत यदि अवैध प्लाटिंग निगम आयुक्त के अधीन अधिकारी की जानकारी में है और वह कार्रवाई नहीं कर रहा है, तो उसे 3 साल की सजा दी जा सकती है। वहीं बिल्डर द्वारा एक्ट का पालन नहीं करने पर उसे 7 साल की सजा दी जा सकती है। विनीत नायर, प्रभारी संयुक्त संचालक टीएंडसीपी
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source https://www.bhaskar.com/local/chhattisgarh/bilaspur/news/illegal-plotting-in-panchayats-occupying-hundreds-of-acres-of-government-land-in-mopka-127595816.html
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