प्रदेश में कोरोना के मरीजों के लिए ऑक्सीजन सिलेंडर की कमी एक बड़ी समस्या बनकर सामने आई। इसके बाद एक और नई परेशानी खड़ी हो गई है। नए खाली सिलेंडर जिसमें फैक्ट्रियों से गैस फिलअप करके दी जाती है, उसकी सप्लाई डिमांड के अनुपात में नहीं हो पा रही है। यहां तक की सिलेंडर बनाने वाली कंपनियों को एडवांस पेमेंट करने के बाद भी नए सिलेंडरों का इंतजार करना पड़ रहा है। देशभर में डिमांड बढ़ने के बाद छत्तीसगढ़ में सिलेंडरों के आने में देरी हो रही है। भरे सिलेंडरों की महंगाई के बावजूद कोरोना काल में ऑक्सीजन सिलेंडर सबसे जरूरी हो गए हैं, लेकिन इनकी कमी से संकट गंभीर भी हो सकता है। बताते हैं कि प्रमुख रूप से अहमदाबाद की फैक्ट्रियों से नए सिलेंडर सप्लाई होते हैं। महाराष्ट्र में भी कुछ कारखाने हैं। सामान्य दिनों में अहमदाबाद से जल्द आपूर्ति हो जाती थी, लेकिन अब एडवांस दने के बाद भी दो हफ्ते वेटिंग चल रही है। सिलेंडर वक्त पर मिल जाएं इसलिए प्रदेश के सप्लायर नए सिलेंडरों के लिए एडवांस भुगतान भी कर रहे हैं। वे अस्पताल वालों से इसमें आर्थिक सहयोग ले रहे हैं, ताकि दोनों का काम निकल जाए। इसे सिक्योरिटी मनी का नाम दिया गया है। देश में प्रमुख रूप से नए सिलेंडर व गैस पाइप लाइन सप्लाई का काम करने वाले एक संचालक ने भास्कर को बताया कि नए सिलेंडरों का भारी शार्टेज हो गया है। पहले चायनीज सिलेंडरों से भी काम चल जाता था, लेकिन अब उसकी सप्लाई भी बंद हो गई है। इससे समस्या और गहरा गई है। पहले नया खाली बी-टाइस सिलेंडर ऑन में 5-6 हजार रुपए तक और जंबो सिलेंडर 10-11 हजार रुपए तक हफ्तेभर में ही मिल जाता था। अब इसकी कीमतों व सप्लाई के दिनों में भारी इजाफा हो गया है। कुछ महीने पहले मंदी की मार से अहमदाबाद की एक कंपनी बंद होने से भी सिलेंडर बनाने में कमी आई है।
लोकल को सप्लाई का दबाव
इधर, प्रदेश के प्रमुख अस्पताल संचालकों के सामने एक और समस्या आ गई है। बताते हैं कि सभी कलेक्टर चाहते हैं कि उनके जिलों में ऑक्सीजन की मांग पूरी की जाए। इसलिए जहां-जहां भी प्लांट हैं वहां के कलेक्टरों ने प्लांट वालों से कह दिया है कि पहले अपने जिले की मांग पूरी करें। उसके बाद बचत होती है तो दूसरे जिलों को दें। इस वजह से अब प्लांट वाले सिलेंडर सप्लाई करने अस्पताल वालों को ऑर्डर से कम देने की बात कह रहे हैं। यानी 150 मांगों तो 100 और 100 मांगों तो 50 सिलेंडर ही मिल रहे हैं।
150 का सिलेंडर 180 का हुआ
मालूम हो कि अप्रैल में जंबो सिलेंडर का रेट 150 रुपए था जिसमें 20 रुपए की बढ़ोतरी कर दी गई थी। पिछले पखवाड़े इसमें साढ़े दस रुपए और बढ़ने से इसकी फैक्ट्री सप्लाय कीमत बढ़कर 180 रुपए 80 पैसे हो गई। इसी तरह बी टाइप सिलेंडर अप्रैल में 90 से बढ़ाकर 100 रुपए कर दिया गया था। बाद में पांच रुपए और बढ़ा देने से यह अब 105 रुपए में मिल रहा है।
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source https://www.bhaskar.com/local/chhattisgarh/news/lack-of-empty-cylinders-even-if-oxygen-is-available-not-supplied-until-15-days-after-order-127747985.html
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