35 साल की शर्त से फंसा भाजयुमो, हारे नेताओं ने भी बढ़ाई मुश्किल

भाजपा की प्रदेश कार्यकारिणी में पहली बार उम्र सीमा के कारण युवा मोर्चा की नियुक्ति अटक गई है। राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष ने 35 साल से ज्यादा उम्र के नेताओं के नाम खारिज कर दिए हैं। अब इस वजह से छत्तीसगढ़ से भी प्रबल दावेदार माने जा रहे ओपी चौधरी, विक्रांत सिंह, नवीन मार्कण्डेय भी दौड़ से बाहर हो गए हैं। अभिषेक सिंह, गौरीशंकर अग्रवाल और जूदेव परिवार के सदस्य भी 35 साल से ज्यादा के हैं। इसके अलावा कोई चर्चित और प्रमुख नाम नहीं होने के कारण इनमें से ही किसी एक नाम पर आलाकमान को मनाने की कोशिश की जा रही है। नई कार्यकारिणी में विधानसभा चुनाव हारे कई नेताओं का नाम होने के कारण भी राष्ट्रीय नेतृत्व ने नए लोगों को ज्यादा मौका देने की शर्त रख दी है। राष्ट्रीय कार्यसमिति में भाजपा ने 29 साल के सांसद तेजस्वी सूर्या को युवा मोर्चा की कमान सौंपी है। इसे बेंचमार्क मानकर बाकी राज्यों में भी 35 साल से कम उम्र के युवा को युवा मोर्चा की कमान देने का दबाव है। इससे पहले भी यह शर्त थी कि 35 से 40 साल के बीच के किसी नेता को युवा मोर्चा अध्यक्ष बना दिया जाता था। मोर्चा की कार्यकारिणी में 40 से ऊपर के कार्यकर्ताओं को भी मौका दिया जाता था। इस बार संगठन इसमें छूट देने के लिए तैयार नहीं है। यहां तक कि युवा मोर्चा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के लिए जो नाम मांगे गए हैं, उसमें भी 35 वर्ष से कम आयु की शर्त रखी गई है।
पदों की संख्या बढ़ाने की मांग : भाजपा संगठन में पदों की संख्या पहले से ही निर्धारित है। विपक्ष में होने के कारण बड़ी संख्या में पार्टी के कार्यकर्ता संगठन में जगह बनाने के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं लेकिन सभी को मौका नहीं मिल पाएगा, इसलिए कांग्रेस की तर्ज पर पदों की संख्या बढ़ाने की मांग की जा रही है, जिससे ज्यादा लोगों को एडजस्ट किया जा सके।

40 पार नेताओं का अब क्या होगा
इधर, पार्टी के युवाओं में एक चर्चा है कि 35 से 50 साल के नेताओं का क्या होगा? यदि पार्टी युवा मोर्चा में 35 वर्ष तक के कार्यकर्ताओं को जगह देगी तो प्रदेश कार्यकारिणी में 60-70 साल की उम्र के नेताओं को रिटायर करना चाहिए। इसे लेकर युवाओं का तर्क है कि वरिष्ठ पदों पर 50 पार के नेताओं को रखा जा रहा है, जबकि 40-50 साल के नेता दोनों ही टीमों में जगह नहीं बना पा रहे हैं। संगठन में उपाध्यक्ष, महामंत्री और मंत्री के लिए पदाधिकारियों की संख्या निर्धारित होने के कारण भी कई लोगों को मौका नहीं मिल पा रहा है।

महामंत्री के लिए भी बड़ी जद्दोजहद
प्रदेश संगठन में राजेश मूणत, केदार कश्यप, महेश गागड़ा, अमर अग्रवाल, लता उसेंडी, हर्षिता पांडेय जैसे चेहरों को शामिल करने की चर्चा है। खबर है कि विधानसभा चुनाव हारे कई नेताओं को शामिल करने पर भी राष्ट्रीय नेतृत्व ने आपत्ति जताई है। इससे नए लोगों को मौका नहीं मिल पाएगा। हाल ही में दिल्ली दौरे से लौटे प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदेव साय और प्रदेश महामंत्री पवन साय के सामने कई नामों पर आपत्ति के बाद नए सिरे से कवायद की जा रही है। हालांकि नेताओं का कहना है कि आज-कल में सूची जारी कर दी जाएगी।



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Bjyumo trapped by 35-year condition, loser leaders also increased difficult
Bjyumo trapped by 35-year condition, loser leaders also increased difficult


source https://www.bhaskar.com/local/chhattisgarh/news/bjyumo-trapped-by-35-year-condition-loser-leaders-also-increased-difficult-127762985.html

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