ठाकुरराम यादव | राजधानी में 15 अगस्त के बाद से कोरोना का इतना तेज है कि शहर की लगभग सभी गतिविधियों पर विराम लग गया है। भास्कर ने राजधानी में ऐसे पांच स्थानों और परिसरों में पड़ताल में पाया कि वहां 1 जनवरी को जितना फुटफाॅल था, 8 सितंबर को घटकर 25 फीसदी ही रह गया। कुछ जगह तो संख्या इससे भी कम है। अनलाॅक की प्रक्रिया लगभग डेढ़ माह पहले शुरू हुई थी और शहर के हालात सुधर भी रहे थे, लेकिन 15 अगस्त के बाद से कोरोना की बढ़ती रफ्तार ने हालात और बिगाड़ दिए हैं।
देश में कोरोना के मामले अप्रैल से बढ़ने लगे थे और संक्रमण मुंबई-दिल्ली में फैलने लगा था, लेकिन राजधानी में मई तक हालात काबू में थे। शहर से ही इक्का-दुक्का केस मिल रहे थे और 25 मई को तो यह स्थिति थी कि रिकवरी रेट 98 फीसदी से अधिक हो गया था। लेकिन कोरोना के मामले जून में बढ़ना शुरू हुए। जुलाई और अगस्त के पहले पखवाड़े में रोजाना मिलनेवाले केस बढ़ने लगे और अगस्त अंत से हालात बुरी तरह बिगड़ गए हैं। पिछले 15 दिन से राजधानी में रोजाना लगभग 700 के औसत से केस मिल रहे हैं। इसका असर यह हुआ है कि जो इलाके भीड़ और रौनक के मामले में शहर की पहचान माने जाते थे, वहां भीड़ इतनी तेजी से घटी है कि एक चौथाई लोगों का भी आना-जाना नहीं है।
| स्थान | 1 जनवरी | 8 सितंबर |
| जंगल सफारी | 5500 | 80 |
| एयरपोर्ट | 2500 | 1800 |
| मालवीय रोड | 12000 |
7000 |
| तीन मॉल | 20000 | 4000 |
| पंडरी मार्केट | 5000 | 1000 |
जंगल सफारी में सिर्फ 2% पर्यटक
कोरोना लॉकडाउन और इस महामारी का सबसे ज्यादा असर जंगल सफारी पर पड़ा है। जंगल सफारी डीएफओ एम मर्सीबेला के मुताबिक पहली जनवरी को सफारी में 5500 लोग एक ही दिन में आए थे। पिछले एक हफ्ते से औसतन 80 लोग ही यहां पहुंच रहे हैं। एक माह से केवल रविवार को ही डेढ़ सौ से ज्यादा लोग पहुंचते हैं, बाकी कई दिन तो संख्या 50 से भी कम होने लगी है।
हवाई यात्री अब भी 30 प्रतिशत कम
देश में तीसरे नंबर के सबसे व्यस्त घरेलू विमानतल रायपुर में लॉकडाउन के समय छाया सन्नाटा अब धीरे-धीरे छंट रहा है। एयरपोर्ट अथॉरिटी के डायरेक्टर राकेश आर सहाय के मुताबिक लगभग फ्लाइट चालू हो गईं, लेकिन जनवरी में यहां पैसेंजर ढाई हजार से ज्यादा होते थे, जो अब जाकर बमुश्किल 1800 से अधिक हुए हैं। अब भी 30 फीसदी से अधिक पैसेंजरों ने एयरपोर्ट से दूरी बनाए रखी है।
मॉल्स में तो 80% की कमी
राजधानी के प्रमुख मॉल में 1 जनवरी को लोगों का फुटफाॅल 30 हजार से अधिक था। राजधानी में फैले कोरोना ने माॅल्स को ही सबसे ज्यादा प्रभावित किया है। एक माॅल के जीएम राज कुजूर ने बताया कि अब माॅल्स में बमुश्किल 10 हजार का फुटफाॅल भी नहीं आ पाया है। जनवरी से सितंबर के बीच सिर्फ महज 60 फीसदी फुटफाॅल ही रिकवर हुआ है, बाकी की भरपाई में अभी तो समय लगेगा।
मालवीय रोड का बिजनेस आधा
प्रदेश में रायपुर की पहचान मानी जाने वाले मालवीय की रौनक भी पिछले एक माह से उड़ी हुई है। मालवीय रोड व्यापारी संघ के महामंत्री राजेश वासवानी के अनुसार जनवरी में इस सड़क पर रोजाना का फुटफाॅल यानी 12000 से अधिक लोगों का आना-जाना था। अनलाॅक के बाद हालात सुधरे हैं, लेकिन कुछ दिनों से भीड़ फिर कम हुई है। अभी मालवीय रोड पर बमुश्किल 6 हजार लोग ही पहुंच रहे हैं।
पंडरी मार्केट में 20 प्रतिशत लोग
पंडरी कपड़ा मार्केट में लॉकडाउन खुलने के बाद भी स्थिति कई हफ्तों तक खराब रही। पंडरी कपड़ा व्यापारी संघ के चंदर विधानी ने बताया कि जनवरी में पंडरी में रोज लगभग 5000 लोग पहुंच रहे थे, जो खुलने के बाद भी बहुत कम रहा। पिछले दिनों तीज के बाद से ही स्थिति थोड़ी सुधरी है। अभी बमुश्किल हजार लोग ही पंडरी पहुंच रहे हैं और सामान्य दिनों में संख्या उससे भी कम नजर आ रही है।
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source https://www.bhaskar.com/local/chhattisgarh/news/half-of-the-business-of-malviya-road-falls-80-in-malls-footfall-50-people-are-not-going-in-jungle-safari-in-a-day-127700182.html
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