लव दुबे/अंकित द्विवेदी | खाद्य पदार्थों में मिलावट रोकने प्रदेश भर में लगाए गए खाद्य और औषधि प्रशासन विभाग के प्रभारी अभिहित अधिकारी ही अवैध हैं। इन अधिकारियों का कार्यकाल एक साल पहले ही खत्म हो चुका है, लेकिन इसके बाद भी इन्हें नहीं हटाया गया। ये अधिकारी अवैध तरीके से विभाग तो चला ही रहे हैं। साथ ही मिलावट की जांच भी कर रहे हैं। कानूनी जानकारों का कहना है कि पद की वैधानिकता खत्म होने के बाद की गई सभी कार्रवाई अवैध है। अंबिकापुर के पार्षद आलोक दुबे ने मामले में प्रधानमंत्री सहित संबंधित विभाग के मंत्री व अधिकारियों को पत्र भेजकर इन अधिकारियों की शिकायत कर एफआईआर की मांग की है।
बता दें कि अभिहित अधिकारी खाद्य पदार्थों की जांच के लिए सैंपल की पेपर स्लिप पर हस्ताक्षर से लेकर कोर्ट में केस फाइल करते हैं। अकेले सरगुजा संभाग में इन अफसरों ने एक साल के भीतर 200 से अधिक मिलावट की जांच के लिए सैंपल लिए हैं। वहीं 250 खाद्य पदार्थों के लाइसेंस जारी किए हैं। प्रदेश सरकार और उच्च अधिकारियों की लापरवाही से स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत आने वाले खाद्य व औषधि प्रशासन विभाग में एक साल से प्रभारी अभिहित अधिकारी का पद अवैध चल रहा है। केंद्र सरकार के गजट के अनुसार विभाग बनने के 8 साल के अंदर इस पद पर पूर्णकालिक अधिकारी की नियुक्ति करनी थी। यह समय-सीमा 4 अगस्त 2019 को समाप्त हो चुकी है, लेकिन इसके बाद भी न तो इन प्रभारी अफसरों ने शासन को पद अवैध होने की सूचना दी और न ही शासन ने इन पदों पर पूर्णकालिक नियुक्ति के लिए आदेश जारी किया। विभाग को सब डिवीजनल ऑफिसर रैंक के अफसर को सभी जिलों में पूर्णकालिक नियुक्ति देनी थी। खाद्य पदार्थों में मिलावट को रोकने व दोषियों को सजा दिलाने केंद्र सरकार ने 2011 में खाद्य व औषधि प्रशासन विभाग बनाया है।
अधिनियम में ये हैं समय सीमा का उल्लेख
सरकार ने खाद्य सुरक्षा व मानक अधिनियम के नियम 2.1.2 के उप नियम 1 में अर्हता के संबंध में खंड 3 के उपखंड ख में प्रभारी अधिकारी की समय सीमा का जिक्र है। इसके अलावा किस रैंक का पूर्णकालिक अधिकारी इस पद के लिए योग्य होगा, यह भी इसी नियम के उपनियम में तय किया है। इसमें सब डिवीजनल ऑफिसर या उसके समानांतर अधिकारी की पूर्णकालिक नियुक्ति की जा सकती है।
पूर्णकालिक नियुक्ति होने पर छोड़ना पड़ेगा मूल विभाग का पद
वर्तमान में 16 जिलों में सहायक औषधि निरीक्षक और 11 जिलों में सीएमएचओ प्रभारी बनाए गए हैं। यदि नियम के हिसाब से यदि इन प्रभारी अधिकारियों को पूर्णकालिक नियुक्ति दी जाती है तो उन्हें औषधि विभाग और स्वास्थ्य विभाग का पद छोड़ना पड़ेगा, जबकि वर्तमान में काम कर रहे अधिकारी खुद को सब डिवीजनल ऑफिसर रैंक का होना बताते हुए खुद का बचाव कर रहे हैं।
कोर्ट में पहली सुनवाई में ही खत्म हो जाएंगे मामले
शासकीय अधिवक्ताओं और अभियोजन अधिकारियों के अनुसार न्यायालय में यदि 4 अगस्त 2019 के बाद का कोई प्रभारी अधिकारी केस प्रस्तुत करेगा तो विपक्षी पार्टी का अधिवक्ता उस अधिकारी की वैधानिकता पर ही सवाल उठाते हुए और गजट में प्रकाशित बातों को पेश कर केस को पहली सुनवाई में ही खारिज करा लेगा। इससे मिलावटखोर आरोपी बा-इज्जत बरी कर दिए जाएंगे।
असिस्टेंट डायरेक्टर की सूचना के बाद भी नहीं हुआ अमल
जब विभाग बना तब पूर्णकालिक अधिकारी की नियुक्ति के लिए 1 साल का समय दिया गया। इसके बाद समय सीमा 18 जुलाई 2014 के गजट में बढ़ाकर 5 साल कर दी। 31 जनवरी 2017 को फिर केंद्र सरकार ने समय सीमा को 5 साल की जगह 8 साल कर दिया। इस तरह 5 अगस्त 2011 को अस्तित्व में आए विभाग के अधिकारी 8 साल बाद 4 अगस्त 2019 तक ही वैध माने जाएंगे। इस संबंध में फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया के असिस्टेंट डायरेक्टर प्रभात कुमार मिश्रा ने 25 फरवरी 2017 को सभी प्रदेश के फूड सेफ्टी कमिश्नर को पत्र जारी कर समय सीमा की सूचना दी थी। इसके बाद भी यही प्रभारी अधिकारी अब तक अपना काम कर रहे हैं।
अब क्लेम लेना संभव नहीं
इस लापरवाही का फायदा मिलावटखोरों को मिल रहा है। वैधानिकता समाप्त होने पर प्रभारी अधिकारियों के सभी काम कानूनन अवैध माने जाएंगे, पर अफसरों का इस ओर ध्यान नहीं है। वहीं लाइसेंस लेने वाले उपभोक्ताओं को किसी विभाग से क्लेम लेना भी संभव नहीं होगा, क्योंकि इन अधिकारियों की ओर से 4 अगस्त 2019 के बाद से जारी लाइसेंस और अन्य सभी कार्य कानूनी रूप से अवैध हैं।
मामले की लेंगे जानकारी, कार्रवाई करेंगे
"मामले की जानकारी आपके माध्यम से मिली है। मंगलवार को संबंधित विभाग के अधिकारियों को बुलाकर मामले की पूरी जानकारी लेते हैं। इसके बाद आगे की कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।"
-जिनेविवा किंडो, कमिश्नर, सरगुजा संभाग
क्या गड़गड़ी की गई, लेंगे जानकारी
"मामले की जानकारी अभी मिली है। अधिकारियों को पत्र जारी कर पूरे मामले की जानकारी लेते हैं कि क्यों नियुक्ति नहीं की गई है और क्या गड़बड़ी की गई है। जो भी खामियां हैं उनको तत्काल दूर किया जाएगा।"
-टीएस सिंहदेव, स्वास्थ्य मंत्री
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source https://www.bhaskar.com/local/chhattisgarh/news/term-ends-yet-illegal-officers-issuing-licenses-with-sample-investigation-127763112.html
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