ब्लड में ऑक्सीजन और कार्बन-डाइ-आक्साइड की सटीक मात्रा बताने वाली एबीजी (ब्लड गैस एनलाइजर/आरटेरिल ब्लड गैस) मशीन रहते हुए कोविड अस्पताल में मरीजों को अनुमान से ऑक्सीजन दिया जा रहा। दोनों सरकारी अस्पतालों में करीब 100 मौत हो जाने के बाद इस मशीन की तलाश हुई तो वह अपने जिला अस्पताल के ही स्टोर रूम में खराब मिली। जुनवानी में कोविड अस्पताल संचालित करने से पूर्व जिम्मेदार यहां के स्टोर रूम से वेंटिलेटर, सेमी ऑटो एनलाइजर और ऑक्सीजन कंसनट्रेटर तो ले गए, लेकिन इस जरूरी मशीन को कबाड़ समझ वहीं छोड़ दिया। रायपुर में बैठने वाले अफसरों ने नई एबीजी मशीन की डिमांड जब रद्दी की टोकरी में डाल दी। तब स्टोर रूम में पड़ी मशीन का ख्याल किया और इंजीनियर बुलाकर ठीक कराया। करीब 100 मौतें के बाद मंगलवार को यह जरूरी मशीन जुनवानी के कोविड अस्पताल पहुंचा दी गई। इंजीनियर ने स्टॉफ को ट्रेनिंग भी दी है।
जानिए क्या होती है एबीजी मशीन, सबसे बेहतर क्यों
फेफड़े को प्रभावित करने वाली किसी बीमारी की चपेट में आने के बाद ब्लड में ऑक्सीजन और कार्बनडाई आक्साइड के प्रवाह को बताने वाली मशीन को एबीजी मशीन कहते हैं। मरीज के थोड़ से ब्लड सैंपल को यूज कर यह मशीन चंद मिनट में उसमें सभी गैसों की मात्रा बता देती है। बाहरी अंग से कैल्कुलेट कर ऑक्सीमीटर जो ऑक्सीजन वैल्यू बताता है, उसकी वास्तविक वैल्यू कुछ और होती है। उसकी सटीक जानकारी एबीजी मशीन से ही मिलती है।
विशेषज्ञ से जानिए कोरोना के इलाज में कितना जरूरी
विशेषज्ञ के मुताबिक एबीजी मशीन का यूज कर ब्लड में गैसों की मात्रा को जाना जाता है। कोरोना के इलाज में इसकी सटीक वैल्यू जानना जरूरी होता है। ऑक्सीजन के कम या ज्यादा दोनों हानिकारक होती है। इसलिए वेंटिलेटर में ऑक्सीजन के मात्रा की अलग-अलग सेटिंग होती है।
दो दिन में 309 की डेथ ऑडिट, रायपुर से जांच करने पहुंची टीम...
17 दिन में 27 और 2 दिन में 309 कोरोना मौतों के ऑडिट का गणित समझने मंगलवार को रायपुर से अधिकारियों की टीम दुर्ग पहुंची। सर्किट हाउस में कोरोना रोकथाम व इलाज में लगे सभी जिम्मेदार अधिकारियों के साथ बैठक कर, उनके द्वारा किए गए कमाल को समझने की कोशिश की। रायपुर की टीम शाम करीब 4 बजे यहां पहुंची थी और इस विशेष गणित को समझने के लिए 2 घंटे से ज्यादा का समय दिया। इस बैठक में उन्होंने सीएमएचओ डॉ. गंभीर सिंह, जिला प्रशासन से डिप्टी कलेक्टर डॉ. प्रियंका, डीपीएम पियूली मजूमदार, कचांदुर अस्पताल की डेथ ऑडिट कमेटी के अध्यक्ष डॉ. अनिल शुक्ला, जुनवानी के लिए बनी डेथ ऑडिट कमेटी की अध्यक्ष डॉ. सुगम सावंत, जिला अस्पताल के पूर्व सीएस एवं डेथ ऑडिट टीम के सदस्य विशेष डॉ. के के जैन तथा दूसरे विशेषज्ञ डॉ. आर के देवांगन, डॉ. रितिका सोनवानी को भी बुलाया। सब कुछ समझने के बाद नए निर्देश देकर रायपुर लौट गए।
जिले के दोनों अस्पतालों में अब तक कितनी मौतें..
- 105 मौत- कोविड अस्पताल, जुनवानी।
- 15 मौत- कोविड अस्पताल, कंचादुर।
- 408 मौतें- 5 अक्टूबर 2020 तक जिले में हुई।
- 900 मरीजों की जुनवानी अस्पताल से छुट्टी भी हुई।
- 12746 मरीजों में से 9559 मरीज रिकवर हो गए हैं। एक्टिव मरीज की संख्या 2403 हो गई।
हम तो जरूरत से थोड़ा ज्यादा ऑक्सीजन दे रहे
"मशीन हो या न हो लाइन ऑफ ट्रीटमेंट बदलता नहीं है। हमारे कोविड अस्पतालों में जो मरीज भर्ती हैं, उनकी जरूरत से थोड़ी ज्यादा ही, आक्सीजन हमारे डॉक्टर दे रहे हैं। अब मशीन की रिपोर्ट देखकर ही मरीजों को आक्सीजन दे रहे है।"
-डॉ. गंभीर सिंह, सीएमएचओ
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source https://www.bhaskar.com/local/chhattisgarh/bhilai/news/while-being-an-abg-machine-corona-was-giving-oxygen-to-patients-by-guess-he-was-found-in-the-store-after-100-deaths-127787187.html
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