ठाकुरराम यादव | लॉकडाउन के दौरान दोगुनी कीमत में सामान बेचो, या मनाही के बावजूद दुकानें खोल लो, कोरोना प्रोटोकाॅल का उल्लंघन हो या इस तरह का कोई अपराध... सरकारी एजेंसियां बढ़-चढ़कर सख्त कार्रवाई का ढोल यह कहते हुए पीटते हैं कि दुकान सील कर दी गई है। राजधानी में पिछले 15 दिन में सरकारी एजेंसियों ने 52 दुकानें अलग-अलग कारणों से सील की गईं। सबका संबंध कोरोना प्रोटोकाॅल के उल्लंघन से था। लेकिन हैरतअंगेज है कि लगभग सभी दुकानें 1 घंटे से अधिकतम 2 दिन की अवधि में वापस खुल गईं। भास्कर की पड़ताल में पता चला कि सील करने जैसी कार्रवाई इतनी कमजोर रही कि कभी व्यापारी संगठनों के दबाव में टूट गई, तो कभी नियम-प्रक्रिया ने सख्ती को गलाकर रख दिया। आम आदमी भले ही बिना लाइसेंस या मास्क के निकलने पर 500 से 2000 रुपए तक जुर्माना अदा करे, लेकिन सील दुकानें कई बार इससे भी कम जुर्माने पर खोल दी गईं।
कोरोना नियम तोड़ने के बाद कारोबारियों पर सील करने की कार्रवाई के इस लचीलेपन का खामियाजा सीधे लोगों को भुगतना पड़ रहा है क्योंकि सील खुलना इतना आसान है कि उन नियमों के पालन की बहुत अधिक मजबूरी नहीं रह गई, जिसका संबंध लोगों की सुरक्षा से हो। प्रशासन बार-बार चेतावनी दे रहा है। कार्रवाई सख्त नहीं होती, इसलिए लोगों के सामने् भीड़ लगाकर ही सामान खरीदने की मजबूरी है। 12 दुकानें ज्यादा कीमत लेने के कारण सील की गई थीं, लेकिन 24 घंटे में ही सील खुल गई। यही वजह है कि ऐसे समय में भी ओवररेट पर काबू नहीं हो पाया है।
नियम - सील यानी 15 दिन तक भी बंद
कोरोना की वजह से पिछले सात महीने में राजधानी में तीन बार लॉकडाउन हुआ। लॉकडाउन खुला भी तो कई नियम और शर्तों के साथ, लेकिन सबसे ज्यादा उल्लंघन बाजारों में हुआ। कोरोना प्रोटोकाॅल के अनुसार लॉकडाउन के दौरान नियम का उल्लंघन होने पर कोई भी संस्थान अनलाॅक होने तक सील किया जाना है। जुर्माना भी लिया जाना है। कलेक्टर के आदेश के अनुसार भी अगर किसी व्यापारिक संस्थान में सोशल और फिजिकल डिस्टेसिंग के अलावा अनलाॅक में कारोबार या ओवररेट पर दुकानों को सील करने की अवधि अलग-अलग है। सील 15 दिन तक लगाई जा सकती है। लेकिन शहर में ऐसा एक भी मामला नहीं है।
कार्रवाई - ये दुकानें सील हुई थीं
इम्पीरियल प्रीमियम फ्रूट, शंकर नगर, मारुति ब्रेकर्स, केनाल लिंकिंग रोड, जोन-पांच की 15 दुकानें, अम्बर केसरवानी गुढ़ियारी, मिलन थाली गुढ़ियारी, फिजा पार्लर शांति नगर, राजा रेस्टोरेंट बैरन बाजार, शांता स्वीट्स भनपुरी, मिलन थाली स्टेशन रोड, नेचुरल आईसक्रीम पार्लर, केनाल रोड, अमृतसरी रेस्टोरेंट घड़ी चौक, मां डेली नीड्स लाखेनगर, रेहान पोल्ट्री सेन्टर लाखेनगर, मोती महल तेलीबांधा, इजी सुपर मार्केट शंकर नगर, विशाल मेगामार्ट पंडरी, शिमला सुपर बाजार शंकर नगर, शिमला गिफ्ट शंकर नगर, गल्म आटी शंकर नगर।
राहत - एक कबूलनामा, और थोड़ा जुर्माना
अफसरों ने बताया कि दुकानों की सील खोलने के लिए दुकानदार की ओर से संबंधित सरकारी एजेंसी एक आवेदन लेती है। इस आवेदन में दुकानदार ऐसी गलती दोबारा नहीं करने का आश्वासन देता है। इसके बाद अपराध के हिसाब से तुरंत ही जुर्माना तय कर दिया जाता है। यह 500 रुपए से 5000 रुपए तक (संस्थानों के साइज पर) हो सकता है। दरअसल प्रशासन के पास नियमों का पालन करवाने का वही हथियार है, अगर सख्ती हो तो। लेकिन यह अफसरों पर निर्भर है कि वे सिर्फ जुर्माना लगाएं, या सील रहने दें। ज्यादातर सील जुर्माना देते ही खुली हैं।
एक घंटे में खुद खोली सील
इस बार के लाॅकडाउन के एक दिन पहले यानी 21 सितंबर को प्रशासन की टीम ने बीरगांव-भनपुरी में श्रीराम ट्रेडर्स, प्रदीप एंड कंपनी और शीतल एजेंसी को ज्यादा कीमत पर आलू-प्याज बेचने पर सील किया था। लेकिन इनमें एक एजेंसी एक व्यापारी नेता की थी, जिसकी वजह से प्रशासन की इस कार्रवाई का व्यापारिक संगठनों ने विरोध शुरू कर दिया। यह बात प्रशासन के आला अफसरों के पास पहुंची तो सख्ती के बजाय पूरा अमला मामले को रफा-दफा करने में जुट गया। अफसरों ने कहा कि सील हफ्तेभर नहीं खुली तो आलू-प्याज खराब हो सकता है। यह तय हुआ कि गोदाम खोलकर वहां का माल कम रेट पर बेचा जाए। इसके कुछ देर बाद सील खुल गई। तब तक सील हुए पूरे 60 मिनट भी नहीं हुए थे।
जांच भी कई बार कमजोर
बाजार में चीजों की कीमतें लगातार बढ़ने के बाद कलेक्टर ने खाद्य विभाग के अफसरों से कहा था कि वो टीम बनाकर दुकानों की जांच करें। लेकिन एक हफ्ते के लॉकडाउन के दौरान उसके बाद टीम जांच के लिए निकली ही नहीं। विभाग के खाद्य निरीक्षकों ने काम की अधिकता का बहाना कर फील्ड में निकले ही नहीं। इधर दूसरी बताया जा रहा था कि ओर कर्मचारियों ने बाजार में कोरोना होने के डर से कर्मचारियों ने जांच में जाने से इंकार कर दिया। इस वजह से बाजारों में दुकानों की जांच तक नहीं हो पाई।
निगम-खाद्य विभाग में टकराव
निगम और खाद्य विभाग के अफसरों में जांच और कार्रवाई को लेकर लगातार विवाद होता है। खाद्य विभाग के अफसरों का दो टूक कहना है कि दुकानें सील करने का काम निगम का है। इसे खुलवाने के लिए भी निगम अफसरों के पास ही आवेदन करना पड़ता है। वे केवल कार्रवाई के लिए साथ जाते हैं। दूसरी ओर निगम अफसरों का कहना है कि जरूरी खाद्य सामग्रियों की जांच और उसके गोदामों को सील करने का काम खाद्य विभाग का है, लेकिन विभाग के खाद्य निरीक्षक इस काम में दिलचस्पी नहीं लेते हैं।
"लॉकडाउन में सील हुई दुकान अनलाॅक में ही खोलने का नियम है, यह बात सही है। लेकिन कारोबारी दोबारा गलती नहीं करे और जुर्माना पटा दे, तो सील खोल देते हैं।"
- आरके डोंगरे, उपायुक्त बाजार
"चैंबर ने दुकानदारों को सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए थे। नियम का उल्लंघन पर कार्रवाई की गई। प्रशासन से अपील की गई थी कि अनावश्यक परेशान न किया जाए।"
-जितेंद्र बरलोटा, अध्यक्ष चैंबर आफ कामर्स
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source https://www.bhaskar.com/local/chhattisgarh/news/52-shops-sealed-for-breaking-lockdown-rule-15-days-closed-rule-127771990.html
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