जहां कम पानी होता था, इस बार वहां भी अच्छी बारिश, सूखे रहने वाले कई जिलों में औसत से ज्यादा वर्षा

ठाकुरराम यादव | छत्तीसगढ़ में इस साल मानसून तो अच्छा रहा ही, खास बात ये है कि राज्य में बारिश का औसत इस साल बस्तर की बारिश के भरोसे नहीं रहा। पिछले तीन साल में कई जिले ऐसे हैं, जहां बहुत कम बारिश हो रही थी लेकिन बस्तर में अच्छी बारिश की वजह से प्रदेश की बारिश का औसत सामान्य होता रहा था। लेकिन इस बार सरगुजा को छोड़कर पूरे प्रदेश में पानी एक जैसा ही बरसा है। कहीं कुछ कम तो कहीं कुछ ज्यादा। यहां तक कि रेन शैडो के असर वाले जिले कवर्धा, मुंगेली और बेमेतरा में भी इस बार अच्छी बारिश हो गई है। छत्तीसगढ़ में जून से लेकर 30 सितंबर तक 1234 मिमी बारिश हुई, जो औसत से 8 प्रतिशत अधिक है। जहां तक प्रदेश में बारिश के औसत का सवाल है, पिछले पांच साल से यह सामान्य के आसपास ही है। लेकिन अंतर यह था कि उत्तर-पश्चिम छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्से रेन शैडो एरिया में आते हैं, जिस कारण बारिश उन क्षेत्रों में थोड़ी कम होती रही।

मध्य छत्तीसगढ़ के भी कुछ जिलों में आमतौर पर कम वर्षा होती है, लेकिन इन जिलों की कम वर्षा को दक्षिण छत्तीसगढ़ यानी बस्तर में होने वाली भारी बारिश बराबर कर देती रही। इस कारण पूरे छत्तीसगढ़ की औसत वर्षा सामान्य हो जाती रही। लेकिन इस साल दक्षिण छत्तीसगढ़ में भी सामान्य बारिश हुई है। उत्तर, पश्चिम और पूर्वी छत्तीसगढ़ में भी लगभग समान वर्षा हुई है। यह कृषि सहित अन्य सभी दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है। क्योंकि पूरे राज्य में बारिश का समान वितरण होने से सभी क्षेत्रों में ग्राउंड वाटर लेवल अच्छा रहता है तथा कृषि के लिहाज से भी महत्वपूर्ण होता है। जैसे कवर्धा में 2018 में 644 मिमी बारिश हुई थी, 2019 में 893 मिमी लेकिन इस साल यहां पर 988 मिमी बारिश हुई है, जो औसत से ज्यादा है। इसी तरह मुंगेली में 2018 में 835 मिमी, 2019 में 813 मिमी बारिश हुई, लेकिन इस साल 905 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई। इसी तरह बेमेतरा, दुर्ग, बलरामपुर, बलौदाबाजार में भी इस साल अच्छी वर्षा हुई है, जबकि पिछले सालों में यहां कम वर्षा होती रही है।

कम बारिश वाले जिले

जिला 2018 2019 2020
कवर्धा 644.4 893.8 988.2
मुंगेली 835.4 813.7 904.9
बेमेतरा 880.4 971.2 1076.4
दुर्ग 865.8 813.7 1005.5
बलौदाबाजार 915.9 1005.8 1058.3

सिस्टम सही बनने का असर : वैज्ञानिक
लालपुर मौसम केंद्र के मौसम विज्ञानी एचपी चंद्रा के अनुसार इस साल पूरे राज्य में बारिश का वितरण अच्छा रहा है। सरगुजा को छोड़कर राज्य का कोई भी जिला इस साल कम वर्षा वाला नहीं है। आमतौर पर हमारे राज्य के 5 से 6 जिलों में कम बारिश होती है लेकिन इन जिलों की कम वर्षा को बस्तर में होने वाली भारी बारिश के कारण पूरी हो जाती है। इसलिए राज्य की वर्षा औसत के पास पास पहुंच जाती हैं। इस साल मुख्य रूप से बारिश कराने वाले सिस्टम और द्रोणिका मध्य भारत और उत्तरी छत्तीसगढ़ के आसपास रही हैं। इसकी वजह से बंगाल की खाड़ी से आने वाले नमी और बारिश वाले बादल उत्तर और पश्चिमी छत्तीसगढ़ तक पहुंच कर अच्छी बारिश कर आए हैं।

आज भी बारिश के आसार
मौसम विज्ञानियों के अनुसार छत्तीसगढ़ में शनिवार को भी कहीं-कहीं पर हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। एक चक्रीय चक्रवाती घेरा तटीय आंध्रप्रदेश और उसके आसपास 1.5 किलोमीटर ऊंचाई पर है। एक निम्न दाब का क्षेत्र उत्तर अंडमान से और उसके आसपास पूर्व मध्य बंगाल की खाड़ी पर बना है।

इसके साथ चक्रीय चक्रवाती घेरा मध्य क्षोभ मण्डल (वायुमंडल) तक है। इसके और अधिक प्रबल होकर और गहरा अवदाब के रूप में मध्य बंगाल की खाड़ी तक पहुंचने की संभावना है। इसके बाद यह सिस्टम पश्चिम उत्तर पश्चिम की ओर आगे बढ़ते हुए उत्तर आंध्रप्रदेश तट तक गहरा अवदाब के रूप में 12 अक्टूबर तक पहुंचने की संभावना है। 10 अक्टूबर को प्रदेश के कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम वर्षा होने या गरज चमक के साथ छींटे पड़ने की संभावना है।



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धमतरी में तेज बारिश व हवा के कारण तैयार धान की फसल खेताें में गिर गई है। खेताें में पानी भी भरा है। ऐसे में बड़े नुकसान की आशंका जताई जा रही है। जिले में 1.37 लाख हेक्टेयर में धान की फसल ली गई है। इसमें से ज्यादातर धान की फसल या ताे पककर तैयार हाे गई है या फिर पकने की स्थिति में हैं। यहां धान की फसल सबसे ज्यादा ली जाती है। अधिकतर खेताें में धान गिर गई है।


source https://www.bhaskar.com/local/chhattisgarh/news/where-there-was-less-water-good-rain-this-time-too-above-average-rainfall-in-many-dry-districts-127797876.html

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