प्रदेश में व्याख्याताओं को दी जाने वाली पदोन्नति को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। इस मामले को लेकर हेड मास्टर और व्याख्याता आमने-सामने आ गए हैं। दरअसल नए अधिनियम के तहत व्याख्याताओं के ऊपर हेडमास्टरों को सीनियारिटी मिल गई है। इस वजह से बरसों वरिष्ठता क्रम में आगे रहे हजारों व्याख्याता जूनियर हो गए हैं।
इस मामले को लेकर व्याख्याताओं में ही दो फाड़ हो गया है। नए व्याख्याता संघ खड़ा हो गए। जो पीड़ितों की लड़ाई लड़ रहा है। कई व्याख्याताओं ने पुराने संगठनों से नाता तोड़ लिया है। बताते हैं कि मामले की शिकायत राज्यपाल, सीएम व शिक्षा के विभाग के प्रमुख सचिव तक से की गई है। कुछ उम्मीदवार इसे लेकर हाईकोर्ट चले गए हैं।
बताते हैं पूरे मामले की शुरूआत ही बड़े गोपनीय तरीके से की गई। मई 2019 में ब्लाक स्तर से गलत वरिष्ठता वाली सूचियां संभागीय कार्यालयों को भिजवाई गईं। जैसे बतौर उदाहरण 2019 में व्याख्याता बने शिक्षक को 2010 का प्रधानपाठक होने के कारण व्याख्याता पर 2010 से वरिष्ठता दे दी गई। प्रत्येक जिले से व्याख्याताओं द्वारा डीईओ के जरिए शासन को शिकायतें भेजी गईं। प्रमुख सचिव को भी पत्र दिए गए। शासन से 2008, 2014 व 2019 के राजपत्रों के विवरणों का अध्ययन करने का आग्रह किया गया। प्रमुख सचिव डॉ. आलोक शुक्ला को भी ब्योरा देकर शिकायतें की गई हैं।
15 फीसदी को फायदा देने हजारों को किनारे किया
बताते हैं कि विभाग के आंकड़ों के अनुसार 1 अप्रैल 2020 की स्थिति में ई-संवर्ग के 4101 व्याख्याता हैं। इनमें से लगभग 15 प्रतिशत प्रधानपाठक हैं। बाकी 85 फीसदी व्याख्याताओं को सीनियारिटी का नुकसान हो रहा है। एक अप्रैल 2020 की ही स्थिति में टी-संवर्ग के 3074 व्याख्याता हैं। इनमें से केवल 13 प्रतिशत प्रधानपाठक हैं जिन्हें 87 फीसदी व्याख्याताओं पर तवज्जो दी जा रही है।
ज्यादातर यूनियन लीडर
व्याख्याता संघों के ज्यादातर यूनियन लीडर हेड मास्टर हैं। सूत्रों के अनुसार एक साल पहले अधिनियम बदलने का खेल प्रारंभ हुआ। तब इन लोगों ने सरकार पर अधिनियम में बदलाव करने दबाव बनाया। वे सफल भी रहे। हालांकि इसकी जानकारी उन्होंने व्याख्याताओं को नहीं दी। जिनके दम पर वे बरसों से नेतागिरी करते रहे। जब इसका खुलासा हुआ तो व्याख्याताओं का गुस्सा फूट पड़ा। तब कई लोगों संघों से किनारा कर लिया तो कुछ ने नए संगठन ज्वाइन कर लिए।
परीक्षण करेंगे, तभी प्रमोशन - शिक्षामंत्री
शिक्षामंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम ने कहा कि मसला उनके संज्ञान में नहीं आया है। यदि ऐसा है तो पहले इसका परीक्षण करेंगे। फिलहाल किसी को प्रमोशन नहीं दे रहे हैं।
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source https://www.bhaskar.com/local/chhattisgarh/news/in-promotion-head-masters-are-preferred-over-lecturers-head-master-and-lecturer-face-to-face-127807486.html
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