छत्तीसगढ़ की राजधानी ने गढ़े नए आयाम, आत्मनिर्भर होकर मध्य भारत में बनाई अपनी अलग पहचान

दैनिक भास्कर की 32वीं वर्षगांठ पर आज हम अपने रायपुर को एक अलग नजरिए से देखने की कोशिश करते हैं। छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद सिर्फ राजधानी के रूप में ही रायपुर ने अपनी पहचान हासिल नहीं की, बल्कि बताया कि यह शिक्षा, उद्योग, चिकित्सा, इन्फ्रास्ट्रक्चर, आईटी, सुरक्षा इत्यादि मामलों में देश के बड़े शहरों से रेस में लगा हुआ है। रायपुर आत्मनिर्भर है, इसीलिए रायपुर यशस्वी है।

हमारी राजधानी लगातार बढ़ रही है। कल जहां कुछ नहीं था आज बहुत कुछ है और कल की सूरत भी आज ही तैयार की जा रही है। आज राजधानी रायपुर में तमाम कंपनियों के बड़े शो रूम हैं। कई सेक्टर में लोग यहां निवेश करना चाह रहे हैं। 20 साल के भविष्य को देखते हुए मेगाप्लान तैयार है। एक नजर डालते हैं भविष्य की संभावनाओं पर...


इंफ्रास्ट्रक्चर
हम कहां थे -
रायपुर 7 से 10 किमी का शहर था। सड़कों की चौड़ाई 30 फीट थी। फ्लाईओवर व ओवरब्रिज तीन थे। प्राइवेट शासकीय टाउनशिप का दायरा भी सीमित ही था।
अब कहां हैं - राजधानी का दायरा 15 किमी की परिधि से अधिक है। फोर व सिक्सलेन के साथ ही 13 फ्लाईओवर व ओबरब्रिज बने। दो हजार से अधिक कॉलानियां।
संभावनाएं - रायपुर को स्मार्ट सिटी के तौर पर डेवलप किया जा रहा है। कई मल्टीलेवल पार्किंग अंतिम चरण में है। तेलीबांधा से लाभांडी तक सबसे बड़े फ्लाईओवर का निर्माण होगा।

चिकित्सा
हम कहां थे -
चिकित्सा शिक्षा का एक मात्र केंद्र नेहरू मेडिकल कॉलेज था। इलाज के लिए अंबेडकर अस्पताल था। पहले शहर में सर्व सुविधायुक्त निजी हॉस्पिटल नहीं था।
अब कहां हैं - शिक्षा के लिए चार कॉलेज हैं। अंबेडकर, डीकेएस, एम्स भी संचालित हो रहा है। रिम्स के अलावा एक दर्जन से ज्यादा निजी सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल।
संभावनाएं - भविष्य में रायपुर मध्य भारत का चिकित्सा में सबसे बड़ा केंद्र होगा। गंभीर और घातक रोगों के इलाज के लिए अब मुंबई और दिल्ली जाने की जरूरत नहीं होगी।

शिक्षा
हम कहां थे -
राज्य गठन के समय रायपुर में में राजकुमार कॉलेज समेत कई शिक्षा के उत्कृष्ट केंद्र थे। उच्च शिक्षा के लिए भी कई कॉलेज थे। एनआईटी, मेडिकल व डेंटल कॉलेज थे।
अब कहां हैं - रायपुर अब 5 विवि संचालित हैं। इसके साथ ही आईआईएम, ट्रिपल आईटी और आईआईएचएम के अलावा मेडिकल एजुकेशन के लिए एम्स भी है। पत्रकारिता विवि भी है।
संभावनाएं - आगे रायपुर शिक्षा के क्षेत्र में मध्य भारत का बड़ा केंद्र होगा। यहां 5 विवि के साथ ही आधा दर्जन संस्थान है। प्रयास जैसे शिक्षा के उत्कृष्ट केंद्र स्थापित हैं।

पर्यटन
हम कहां थे -
रायपुर में पर्यटन के नाम पर बूढ़ातालाब को विवेकानंद सरोवर, दूधाधारी मंदिर, महंत घासी दास संग्रहालय था। कुलेश्वर महादेव व विष्णु मंदिर भी धार्मिक केंद्र था।
अब कहां हैं - फिलहाल, जिले में कई स्थानों के अलावा पुरखौती मुक्तांगन और जंगल सफारी महत्वपूर्ण पर्यटन केंद्र हैं। सौर ऊर्जा से रोशन राजीव गांधी ऊर्जा पार्क भी है।
संभावनाएं - चंदखुरी में माता कौशिल्या की जन्मभूमि डेवलप होगी। मरीन ड्राइव, कटोरा तालाब, बूढ़ातालाब में सौंदर्यीकरण का काम होगा।
सेंध लेक में वाटर स्पोर्ट्स।

इंडस्ट्रीज -
हम कहां थे -
पहले बीएसपी, औद्योगिक क्षेत्र उरला था। रायपुर जिले में उरला और सिलतरा दो बडे़ औद्योगिक क्षेत्र थे। खमतराई और भनपुरी अर्द्ध औद्योगिक क्षेत्र था।
अब कहां हैं - उरला क्षेत्र 700 हेक्टेयर में हैं। यहां 60 वृहद एवं मध्यम उद्योग, 550 लघु उद्योग और कुल 40 हजार लाख का निवेश है और 20 हजार से ज्यादा लोगों को नौकरी।
संभावनाएं - रावांभाठा में मेटल पार्क की स्थापना। पंडरी में 10 एकड़ जमीन पर जेम्स एंड ज्वेलरी पार्क बनेगा। अभनपुर में 108.50 हेक्टेयर पर लघु औद्योगिक क्षेत्र का विकास।

स्मार्ट पीपुल
हम कहां थे - शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन आदि के सीमित विकल्प थे। जन्म प्रमाण पत्र, मृत्यु प्रमाण पत्र के साथ ही जमीन संबंधी काम के लिए कलेक्टर दफ्तर जाना पड़ता था
अब कहां हैं - 126 सेवाएं ऑनलाइन। जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र के साथ आय-जाति निवास पत्र घर पहुंचा सेवा। हरी सब्जियां मिले इसलिए सीजी हाट वेबसाइट भी संचालित है।
संभावनाएं - आने वाले समय में मैरेज रजिस्ट्रेशन निवास प्रमाण पत्र, प्रापर्टी टैक्स, न्यूनतम शुल्क पर सभी तरह के प्रमाण पत्रों को सीधे घर तक पहुंचाने की व्यवस्था होगी।

पाठकों ने परिवार में भास्कर को दी जगह
दै निक भास्कर के रायपुर संस्करण ने आज अपने प्रकाशन के 32 साल पूरे लिए। 20 साल के युवा छत्तीसगढ़ के उतार-चढ़ाव और ऐतिहासिक पलों का भास्कर प्रत्यक्ष गवाह है। बुलंदी छू रहे छत्तीसगढ़ के साथ भास्कर ने भी लगातार नए सोपान तय किए हैं। आज आपका यह अखबार देश का सबसे विश्वसनीय अखबार है। भास्कर सामाजिक व आर्थिक बदलावों के साथ चलने वाला पहला अखबार है। इस दिशा में हमारा प्रयास लगातार जारी है। हर सोमवार को ‘नो निगेटिव’ अखबार निकालना भास्कर की एक ऐसी पहल है, जिसने पत्रकारिता को एक नई दिशा दी है। इस नई सोच ने नकारात्मकता के माहौल में उम्मीद की किरण जगाई है। इस सफलता का श्रेय हमारे पाठकों को जाता है। हम सभी गणमान्यजनों के प्रति कृतज्ञ हैं, जो इस मिशन में हमारे साथ खड़े हैं। भास्कर अपने पाठकों की जिंदगी का अहम हिस्सा है। सफलता की यह खुशी हमारी आपकी सबकी है। छत्तीसगढ़ और भारत का नंबर-1 अखबार बनने के बाद विश्व में हम यह उपलब्धि हासिल करने की ओर अग्रसर हैं। यात्रा अनवरत जारी है।
-दैनिक भास्कर समूह



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13 करोड़ से संवारा जाएगा तेलीबांधा तालाब।


source https://www.bhaskar.com/local/chhattisgarh/news/the-capital-of-chhattisgarh-carved-a-new-dimension-becoming-self-sufficient-and-established-its-own-identity-in-central-india-127804143.html

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