भालुओं की सुरक्षा और उनसे होने वाली जनहानि रोकने शासन ने वन मंडल के प्रत्येक रेंज से एक-एक लाख रुपए का इस्टीमेंट मांगा है, लेकिन पैसे कम होने के कारण रेंज अफसर अब तक इस्टीमेट तैयार नहीं कर रहे हैं। उनके अनुसार इतनी राशि में भालुओं के लिए जंगल के भीतर न तो खाने की व्यवस्था की जा सकती है और न ही पानी की। वन मंडल व उप वन मंडल के अफसर इस बात से सहमत है, लेकिन यह निर्देश शासन के इसलिए उनकी मंशा अनुरूप काम करने को करने को कहा गया है।
रायगढ़ वन मंडल में पांच रेंज है। इन सभी क्षेत्रों के जंगल में भालुओं पाए जाते हैं। सबसे ज्यादा भालू खरसिया और सारंगढ़ रेंज में है। यहां राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद से लेकर अबतक करीब 9 से ज्यादा घटनाएं हो चुकी है। भोजन और पानी की तलाश इन जंगलों से भालू अबादी वाले इलाकों में पहुंचते हैं और ग्रामीणों से सामने होने पर हमला भी करते हैं। बीते 10 माह में भालुओं द्वारा जनहानि की घटनाओं में एक की मौत भी हो चुकी है, इसके बावजूद सरकार वन्य जीवों के रहवास और पेयजल व्यवस्था को लेकर अबतक कोई विशेष योजना नहीं है।
अब तक रेंजों से नहीं आए एक भी प्रस्ताव
"प्रत्येक रेंज के लिए एक रुपए का प्रस्ताव मंगाया गया है, लेकिन अबतक प्रस्ताव तैयार नहीं हुए हैं। रेंज अफसर भी इतने कम पैसे में भालुओं की सुरक्षा और उनसे होने वाली जनहानि रोकने क्या काम कराए यही सोच रहे हैं। क्योंकि इतने में उन्हें जंगल के भीतर रोक पाना संभव नहीं है।''
-एआर बंजारे, प्रभारी डीएफओ रायगढ़
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source https://www.bhaskar.com/local/chhattisgarh/raigarh/news/1-lakh-will-be-spent-in-every-range-to-protect-against-bears-127914496.html
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