पीने के पानी और हाईवे की क्वालिटी सुधारने पर रिसर्च करेगी NIT की टीम

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी यानी एनआईटी रायपुर के सिविल डिपार्टमेंट के स्टूडेंट्स अब नेशनल हाईवे की क्वालिटी सुधारने की दिशा में रिसर्च करेंगे। वहीं, संस्थान के केमिकल व जियोलॉजी डिपार्टमेंट के स्टूडेंट्स ड्रिंकिंग वाटर क्वालिटी पर रिसर्च करेंगे और वेस्ट वाटर को रीयूज करने की टेक्नोलॉजी भी डेवलप करेंगे। संस्थान की ओर से आयोजित दो दिवसीय इंडस्ट्रीयल इंस्टीयूट कॉन्क्लेव के अंतिम दिन दो कंपनियों के साथ एमओयू किया गया है। इंस्टीट्यूट के सिविल डिपार्टमेंट ने नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया के साथ और केमिकल व जियोलॉजी डिपार्टमेंट ने टायलोरमेड रिन्युएबल लिमिटेड के साथ एमओयू किया है। इस एमओयू का सीधा फायदा स्टूडेंट्स काे प्रैक्टिकल नॉलेज और राज्य को क्वालिटी रिसर्च वर्क के तौर पर मिल सकेगा। इंस्टीट्यूट के स्टूडेंट्स इस प्रोजेक्ट में इंटर्नशिप कर सकेंगे। इसके एवज में उन्हें 8 हजार से लेकर 15 हजार तक का स्टाइपेंड भी दिया जाएगा।

मटेरियल टेस्टिंग के साथ ही हाईवे बनाते वक्त होने वाली गलतियां पता करेंगे
संस्थान के सिविल डिपार्टमेंट के एचओडी डॉ. गंगाधर रामटेक्कर ने बताया, राज्य में नेशनल हाईवे के कई प्रोजेक्ट चल रहे हैं। हमारा फोकस हाईवे की गुणवत्ता में सुधार करने पर होगा। हाईवे बनाते वक्त यूज किए जाने वाले मटेरियल की क्वालिटी जांचने के साथ ही हम हाईवे बनने के बाद भी उसकी क्वालिटी की जांच करेंगे। हाईवे में कई बार दरार, गढ्ढ़े हो जाते हैं। परफॉर्मेंस इवैल्यूएशन के तहत ये स्टडी की जाएगी कि ऐसा किन गलतियों के कारण हो रहा है। उन्होंने बताया, इंडस्ट्री से कई तरह के वेस्ट मटेरियल निकलते हैं, सड़क निर्माण में उनका कैसे यूज किया जा सकता है, इस दिशा में भी साइंटिफिक रिसर्च करेंगे।

स्टाइपेंड: पीजी स्टूडेंट को 15 हजार और यूजी को 8 हजार
एमओयू के तहत स्टूडेंट्स को 2 महीने इंटर्नशिप करने का मौका मिलेगा। ग्रेजुएशन और पीजी के 20-20 स्टूडेंट्स को इंटर्नशिप का अवसर दिया जाएगा। ग्रेजुएशन के स्टूडेंट्स को प्रतिमाह 8 हजार और पीजी के स्टूडेंट्स को 15 हजार रुपए स्टाइपेंड दिया जाएगा। स्टूडेंट्स को इंटर्नशिप सर्टिफिकेट भी दिया जाएगा।

वेस्ट वाटर रीयूज करने के नए तरीके तलाशेंगे
अप्लाय जियोलॉजी डिपार्टमेंट के एचओडी डॉ. प्रभात दीवान ने बताया कि एमओयू के तहत हम रायपुर शहर के ड्रिंकिंग वाटर क्वालिटी पर काम करेंगे। हम मिलकर एक टेक्नोलॉजी डेवलप करेंगे जिससे वेस्ट वाटर को रीयूज किया जा सके। इससे वेस्ट वाटर को ट्रीट करके खेतों में या अन्य कामों में इस्तेमाल किया जा सकेगा। इस प्रोजेक्ट के तहत हम मिनी प्लांट भी लगा सकते हैं।



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एनआईटी के डॉ. एएम रवानी और एसएस चौधरी ने साइन किया एमओयू।


source https://www.bhaskar.com/local/chhattisgarh/news/nit-team-will-conduct-research-on-improving-drinking-water-and-highway-quality-127883342.html

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