प्रदेश में पिछले 8 दिनाें से काेराेना जांच कराने वाले केवल 5 से साढ़े 5 फीसदी संक्रमित मिल रहे हैं। यानी जांच करवाने वाले हर 100 लोगों में से केवल 5 में ही कोरोना निकल रहा है। जबकि पीक के समय यानी सितंबर से मध्य अक्टूबर तक जांच करवाने वाले सौ लोगों में से 15 लोग पाॅजिटिव निकल रहे थे, अर्थात सितंबर की तुलना में संक्रमण एक तिहाई घट गया है। पिछले एक हफ्ते से पूरे प्रदेश में मिलने वाले मरीजों की संख्या (मंगलवार को छोड़कर) 2000 से कम है।
राजधानी और प्रदेश को नवंबर का आखिरी सप्ताह राहत देने वाला रहा है। दिवाली के बाद आखिर संक्रमण की दर कम क्यों हुई, इस पर विशेषज्ञों का कहना है कि यह रिसर्च के लायक है। 1 दिसंबर को प्रदेश में 1893 मरीज मिले। इस दिन 33413 सैंपलों की रिपोर्ट आई। इस दिन 5.66 फीसदी लोग पॉजिटिव रहे। 30 नवंबर को प्रदेश में 1324 मरीज मिले, जबकि 26484 सैंपलों की जांच हुई थी। इसमें केवल 5 फीसदी रिपोर्ट पॉजिटिव रही। पिछले सप्ताहभर में औसतन 23 हजार से 34 हजार सैंपलों की रिपोर्ट आ रही है। जबकि इस दौरान 1273 से 1890 मरीज मिले हैं। 21 से 23 नवंबर तक जरूर 6 से 7 फीसदी मरीज मिल रहे थे। भास्कर ने विशेषज्ञों से जाना कि आखिर इसकी वजह क्या है, क्या ठंड में संक्रमण कम हो गया है? कार्डियक सर्जन डॉ. कृष्णकांत साहू व हिमेटोलॉजिस्ट डॉ. विकास गोयल का कहना है कि सप्ताहभर में मरीज तो कम आ रहे हैं। अगर इस सप्ताह भी कम मरीज आए तो यह राहत वाली बात होगी।

अधिकांश लोगों में एंटीबाॅडी तो डेवलप नहीं हो गई?
ज्यादा संख्या में जांच के बावजूद कम पॉजिटिव केस आ रहे हैं तो यह जांच का विषय हो सकता है। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि कहीं लोगांे में कोरोना के खिलाफ एंटीबॉडी तो नहीं बन गई। यह देखने वाली बात है। हालांकि एंटीबॉडी जांच के संबंध में अभी कोई निर्णय नहीं लिया गया है। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार यही ट्रेंड बना रहा तो मरीजों के मामले में राहत है या नहीं, इसकी पुष्टि होगी। हालांकि उनका यह भी कहना है कि कुछ लोग अभी भी लक्षण के बावजूद जांच नहीं करवा रहे हैं।
70 फीसदी सेंसेविटी आरटीपीसीआर की
लक्षण के बावजूद अगर किसी की रिपोर्ट नेगेटिव आ रही है तो यह फाल्स नेगेटिव रिपोर्ट हो सकती है। नेहरू मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. विष्णु दत्त व पीडियाट्रिक के एचओडी डॉ. शारजा फुलझेले के अनुसार आरटीपीसीआर जांच की सेंसेविटी 70 फीसदी होती है। यानी 30 फीसदी जांच रिपोर्ट फाल्स नेगेटिव हो सकती है। एंटीजन किट से जांच की सेंसेविटी केवल 40 फीसदी होती है। अगर रिपोर्ट नेगेटिव आ रही है और लक्षण है तो आरटीपीसीआर जांच जरूरी है।
दो हफ्ते ऐसा ही रहा तो वास्तव में राहत
"8 दिनों से जांच की तुलना में कोरोना मरीजों की संख्या घटी तो है, लेकिन यही ट्रेंड दो हफ्ते तक जारी रहा तो राहत की बात हो सकती है। यह देखने वाली बात होगी कि कहीं लोगों में कोरोना के खिलाफ एंटीबॉडी तो नहीं बन गई। जरूरत पड़ी तो यह जांच करवाई जाएगी।"
-डॉ. आरके पंडा, सदस्य कोरोना कोर कमेटी
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source https://www.bhaskar.com/local/chhattisgarh/news/corona-turned-out-in-15-out-of-every-hundred-who-got-tested-in-september-october-now-only-5-127973109.html
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