15 साल की सत्ता जाने के बाद एक बार फिर भाजपा के आदिवासी नेता मुखर हो गए हैं। दिग्गज भाजपा नेता नंदकुमार साय के बंगले में रामविचार नेताम समेत अन्य बड़े आदिवासी नेताओं की बैठक में साल 2024 में भाजपा की सरकार बनाने के साथ ही आदिवासी मुख्यमंत्री बनाने का एजेंडा तय किया गया है। बैठक में प्रदेशाध्यक्ष विष्णुदेव साय, पूर्व प्रदेशाध्यक्ष विक्रम उसेंडी, पूर्व मंत्री केदार कश्यप, लता उसेंडी, महेश गागड़ा, गणेशराम भगत भी बुलाए गए थे। इस बैठक से एक बार भाजपा की अंदरुनी राजनीति में खलबली मचने के आसार नजर आ रहे हैं। बैठक में ननकी राम कंवर भी बुलाए गए थे, लेकिन वे शामिल नहीं हो पाए। कंवर रविवार देर रात रायपुर आने के बाद नंदकुमार साय से मिलकर बैठक पर अपना समर्थन जताया। चंपादेवी पावले भी नहीं आईं। दो दौर की बैठक में पहले राजनीतिक नेता बैठे, जबकि दूसरे दौर की बैठक में समाज के बड़े नेता शामिल हुए। भाजपा के प्रदेश प्रभारी डी पुरंदेश्वरी के दूसरे दौरे के ठीक पहले आदिवासी नेताओं की इस बैठक को काफी अहम माना जा रहा है।
इसे संगठन के नेताओं पर आदिवासी नेताओं द्वारा दबाव बनाने की एक रणनीति से जोड़कर भी देखा जा रहा है। 14 बिंदुओं को लेकर हुई इस गोपनीय बैठक में आदिवासी नेताओं की उपेक्षा और संगठन और सत्ता में आदिवासी नेताओं की भूमिका को लेकर काफी देर तक चर्चा हुई। बैठक में प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदेव साय को पार्टी संगठन में आदिवासी नेताओं को ज्यादा से ज्यादा पद देने पर भी बात हुई। इसी तरह 15 साल सत्ता में रहने के दौरान सरकार में समाज को नजरअंदाज किए जाने को लेकर भी चर्चा हुई। सभी नेता अब नए सिरे से समाज की मजबूती के लिए उनके इतिहास और उपेक्षा के कारणों को किताब के रुप में सामने लाने की तैयारी कर रहे हैं।
ननकीराम कंवर ने बताया इन मुद्दों पर हुई चर्चा
प्रदेश में फिर से भाजपा सरकार के साथ आदिवासी सीएम बनाने
बहुलता के बावजूद राजनीतिक दल, मंत्रिमंडल में कम प्रतिनिधित्व
जनजाति के इतिहास, वर्तमान स्थिति से बाहर निकालने पर चर्चा
भरपूर खनिज संपदा के बाद आदिवासियों की विपन्नता के कारणों की खोज
इन क्षेत्रों में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ सुविधाओं की अनदेखी
नए आईएएस को आदिवासी क्षेत्रों में भेजकर उनकी उपेक्षा
बस्तर, सरगुजा में आदिवासियों के आर्थिक शोषण, उपायों पर चर्चा
कई सीटों को आबादी की बहुलता के बाद भी सामान्य घोषित करना
रामविचार के नेतृत्व में चल चुकी है आदिवासी एक्सप्रेस
इससे पहले साल 2002-03 भी दिग्गज नेता रामविचार के नेतृत्व में आदिवासी एक्सप्रेस चल चुकी है। नेताम के बंगले में हुई बैठक के बाद भाजपा की अंदरुनी राजनीति में खलबली मच गई थी। उस समय नेताम ने सभी आदिवासी नेताओं को एकजुट करते हुए छत्तीसगढ़ में आदिवासी मुख्यमंत्री की मांग को हवा दी थी।
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source https://www.bhaskar.com/local/chhattisgarh/news/the-issue-of-tribal-chief-minister-sprung-up-again-in-bjp-leaders-meeting-angry-over-neglect-of-tribal-leaders-128035153.html
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