गोलबाजार में दुकानों की नापजोख पंद्रह दिन में, रजिस्ट्री अगले माह के अंत तक

गोलबाजार की दुकानों की नापजोख अगले पंद्रह दिन में पूरी कर ली जाएगी। नापजोख के बाद हर दुकानदार की एक-एक फाइल तैयार की जाएगी। दुकानों की साइज के अनुसार उनकी कीमत तय की जाएगी। अगले वर्ष जनवरी के अंत तक रजिस्ट्री की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी है।
निगम के राजस्व और बाजार विभाग ने दुकानों की नापजोख शुरू कर दी है। मंगलवार तक 100 से ज्यादा दुकानों की नापजोख कर ली गई है। हालांकि अभी तक रजिस्ट्री की दर पूरी तरह से स्पष्ट नहीं की गई है। मालवीय रोड की दुकानों की कलेक्टर गाइड लाइन दर 10 हजार है। भीतर के हिस्से की गाइड लाइन दर साढ़े सात हजार तय है। गोलबाजार के भीतर तंग गलियों में दुकानें हैं। चूंकि अब तक यह जमीन नगर निगम की है, इस वजह से अब तक वहां रजिस्ट्री नहीं हुई। यही वजह है कि वहां की कलेक्टर गाइड लाइन रेट को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। निगम अफसरों के अनुसार अभी बाजार की डिजाइन और दुकान की स्थिति की समीक्षा की जा रही है। उसके बाद ही रजिस्ट्री की कीमतें जारी की जाएंगी।

निगम अमला फिलहाल दुकानों की लंबाई-चौड़ाई नाप रहा है। ज्यादातर कारोबारियों ने अपनी दुकानों को पक्का कर लिया है। कुछ ने शटर और दरवाजे लगा लिए हैं। निगम फिलहाल उतनी जगह को नाप रहा है, जितने में कारोबारी काबिज हैं। यदि कोई सड़क पर सामान फैलाता है या दुकान के बाहर तक सामान रखा है तो उसे नाप में नहीं लिया जा रहा है। निगम अफसरों का कहना है कि बाजार व्यवस्थित होने के बाद लोगों को सामान दुकान के भीतर ही रखना होगा। राजस्व व बाजार विभाग के अफसर हर दुकानदार की एक फाइल तैयार कर रहे हैं। इसमें उनके नाम, मोबाइल नंबर, कब से काबिज हैं और दुकान से संबंधित दस्तावेज तथा दुकान की लंबाई-चौड़ाई क्या है। इन सभी जानकारियों के आधार पर निगम के अफसर बाजार में कुल कारोबारियों की वास्तविक संख्या और उनके कब्जों की एक डेटा तैयार करेंगे। यदि किसी ने एक दुकान को दो हिस्सों मंे कर लिया है और उनकी टैक्स रसीद अलग-अलग कट रही है तो एेसे कारोबारियों की भी अलग-अलग फाइल तैयार की जा रही है। बाजार में पसरा लगाकर कारोबार करने वालों की अलग लिस्ट तैयार होगी। इसमें मुख्य रूप से मटका, रुई, सील बट्टा वाले शामिल हैं।

मूल स्वामी और खरीदारों का नहीं सुलझा मामला
बाजार में मूल स्वामी और दुकान खरीदने वालों का मामला अब तक नहीं सुलझा है। निगम रिकार्ड में दुकानों के मालिक मूल आबंटित हैं। इस बीच कई लोगों की दुकानें बिक चुकी हैं और कई लोगों के वारिस काबिज हैं। वारिसों के नाम पर रजिस्ट्री में निगम को ज्यादा दिक्कत नहीं आएगी। दिक्कत दुकान खरीदने वाले कारोबारियों को लेकर है। जिन लोगों ने मूल आबंटिती से दुकानें खरीदी हैं, उन्हें अब दुकान के हक के दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे। मुख्त्यारनामा, पावर आफ अटार्नी या एेसे कोई दस्तावेज, जिससे दुकानों का हक और संचालन खरीदार को मिल चुका है।

"बाजार व राजस्व विभाग के अफसरों को निर्देश दिया गया है कि नापजोख की प्रक्रिया जल्द से जल्द पूरी की जाए। कारोबारियों की तैयार फाइल का विश्लेषण करने के बाद तय कमेटी की अनुशंसा पर कीमतें तय की जाएंगी। जनवरी अंत तक रजिस्ट्री शुरू करने की तैयारी है।"
-एजाज ढेबर, महापौर रायपुर



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Fifteen days worth of shops in Golbazar, registry by the end of next month


source https://www.bhaskar.com/local/chhattisgarh/raipur/news/fifteen-days-worth-of-shops-in-golbazar-registry-by-the-end-of-next-month-128042815.html

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