छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने नक्सल हमले में पीड़ित परिवार को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने पुलिस मुखबिरी के नाम पर कवर्धा जिले के मारे गए व्यक्ति के परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने का आदेश दिया है। इसके बाद IG और कलेक्टर ने राज्य शासन के नियमानुसार, तय समय सीमा में कार्यवाही के निर्देश दिए हैं। मामले की सुनवाई जस्टिस गौतम भादुड़ी की बेंच में हुई।
कवर्धा के बालोदा निवासी केकती बाई शर्मा ने वकील संतोष कुमार पांडेय के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इसमें बताया कि उनके पति हेमप्रसाद शर्मा को 25 अगस्त 2018 को नक्सलियों ने पुलिस की मुखबिरी के शक में मार डाला था। इसके बाद उनका परिवार बालोदा का घर, जमीन व व्यवसाय सब कुछ छोड़कर कवर्धा में किराए पर रह रहा है। परिवार गरीबी रेखा के नीचे जीवन गुजार रहा है।
छोटे बेटे की सरकारी नौकरी के लिए अनुशंसा
कोर्ट ने मामले की सुनवाई के बाद IG और कलेक्टर को इस मामले में राज्य शासन के नीति आदेश के अनुसार दी गई समय सीमा में उचित कार्यवाही के निर्देश दिए। इसके बाद याचिकाकर्ता ने IG दुर्ग के समक्ष अभ्यावेदन दिया। इसमें 12वीं पास सबसे छोटे बेटे कृष्ण कुमार शर्मा को पद की उपलब्धता के अनुसार तृतीय या चतुर्थ श्रेणी किसी भी पद में स्थाई शासकीय नौकरी प्रदान की जाए।
राज्य सरकार की नीतियों में 120 दिन में कार्यवाही का है नियम
छत्तीसगढ़ पुनर्वास नीति में नक्सल पीड़ित व्यक्ति या उसके परिवार को जिला स्तरीय समिति और सीधे प्राधिकारी के माध्यम से राहत पहुंचाने के लिए और पुनव्यवस्थापन की कार्यवाही 120 दिन में पूरी करने का नियम है। अगर मामला राज्य स्तर का हो तो ऐसे प्रकरण के प्राप्ति के 60 दिन में समिति के माध्यम से निराकरण कराया जाएगा। पीड़ित परिवार को कृषि योग्य भूमि भी प्रदान की जाती है। आवेदक को कोई सुविधा नहीं मिली थी।
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source https://www.bhaskar.com/local/chhattisgarh/bilaspur/news/chhattisgarh-high-court-gives-relief-to-naxalite-affected-family-127978247.html
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