टॉप 10 में आने वाले केवल 2 छात्रों ने लिया मेडिकल पीजी में एडमिशन

मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन के लिए चल रही री-काउंसिलिंग में प्री पीजी में टॉप 10 में आने वाले छात्रों ने प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन लेने में रूचि नहीं दिखाई। दूसरे व 10वें नंबर के टॉपर ने नेहरू मेडिकल कॉलेज में एडमिशन लिया है। इन्होंने रेडियो डायग्नोसिस व जनरल मेडिसिन में एडमिशन लिया है। पहली री-काउंसिलिंग मेें 75 छात्रों को सीटों का आवंटन किया गया था। इसमें केवल 23 छात्रों ने एडमिशन लिया है। इसमें नेहरू मेडिकल कॉलेज में 20 व सिम्स में 3 छात्रों ने दाखिला लिया है। सरकारी मेडिकल कॉलेज रायगढ़ व जगदलपुर तथा भिलाई स्थित निजी मेडिकल कॉलेज का खाता नहीं खुला है।
सूची के अनुसार टॉप एक से तीन में आने वाले छात्रों को रेडियो डायग्नोसिस में एमडी सीटों का आवंटन किया गया था। इसमें केवल एक ने एडमिशन लिया है। चौथे नंबर पर जनरल मेडिसिन व पांचवें नंबर वाले स्टूडेंट को स्किन में एमडी आवंटित किया गया था। टॉप 6 में आने वाली छात्रा ने आश्चर्यजनक ढंग से ऑर्थोपीडिक च्वाइस किया था और उसे सीट का आवंटन भी हुआ था।
ऑर्थोपीडिक विभाग के एचओडी डॉ. एस फुलझेले नेे बताया कि सामान्यत: छात्राएं ऑर्थोपीडिक में एडमिशन इसलिए नहीं लेती, क्योंकि इसमें हार्ड वर्क की जरूरत पड़ती है। सर्जरी के दौरान छैनी, हथौड़े व ऑरी का इस्तेमाल करना होता है। 7वें नंबर पर ऑब्स एंड गायनी, 8वें व 10 नंबर पर जनरल मेडिसिन व टॉप 9 की छात्रा ने पीडियाट्रिक चुना था। इनमें 10वें नंबर वाले ने जनरल मेडिसिन में एडमिशन लिया है। टॉपरों का प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन नहीं लेना, कोई नईबात नहीं है। पिछले कई साल से ऐसा हो रहा है। वे एम्स, बीएचयू या दूसरे कॉलेजों में एडमिशन काे प्राथमिकता देते रहे हैं। वर्तमान में रेडियो डायग्नोसिस, ऑब्स एंड गायनी, जनरल मेडिसिन, पीडियाट्रिक, ऑर्थोपीडिक, जनरल सर्जरी, रेडियो थैरेपी, स्किन, रेस्पिरेटरी, एनीस्थीसिया व बायो केमेस्ट्री में एडमिशन हुआ है। सिम्स बिलासपुर में पीडियाट्रिक की दो व ऑप्थेलमोलॉजी की एक सीट पर एडमिशन हुआ है।

इस बार 31 जुलाई तक एडमिशन
कोरोना के कारण इस बार पीजी में एडमिशन की आखिरी तारीख 31 जुलाई है। पहले यह 18 मई थी। खाली सीटों को भरने के लिए जुलाई के पहले सप्ताह में दूसरे चरण की काउंसिलिंग होगी। एडमिशन के बाद कॉलेजों से रसीद जारी होने पर एडमिशन मान्य किया जाएगा। डीएमई कार्यालय ने कहा है कि छात्रों को कहा गया है कि वे कॉलेज से एडमिशन के बाद रसीद जरूर लें।

हार्डवर्क के कारण ऑर्थो में छात्राओं की रूचि कम
"प्री पीजी के टॉप 6 में आने वाली छात्रा को ऑर्थोपीडिक का आवंटन हुआ था। प्रदेश ही नहीं देश में गिनी-चुनी छात्राएं ऑर्थो में पीजी करती हैं। दूसरे विषयों की पीजी की तुलना में इसमें हार्ड सर्जरी, ट्रामा में ड्यूटी करनी होती है। यही कारण है कि ऑर्थो में छात्र ज्यादा एडमिशन लेते हैं।"
-डॉ. एस फुलझेले, एचओडी ऑर्थो अंबेडकर अस्पताल



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Only 2 students appearing in the top 10 took admission in Medical PG


source https://www.bhaskar.com/local/chhattisgarh/raipur/news/only-2-students-appearing-in-the-top-10-took-admission-in-medical-pg-127455258.html

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