मनोज व्यास | राज्य की कमजोर आर्थिक स्थिति के बीच केंद्र सरकार ने कर्ज की सीमा के 2% अतिरिक्त कर्जके लिए ऐसी शर्त रख दी है कि किसानों के खेत में पानी नहीं मिलेगा तो आदिवासियों को अनाज मिलने में दिक्कत आ जाएगी। इतना ही नहीं, शहर के लोगों को पानी, सफाई और प्रापर्टी टैक्स भी ज्यादा देना पड़ेगा। हालांकि ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के लिए राज्य सरकार बड़ी छूट देने की तैयारी में है। इसमें सीधे फैक्ट्री लगाने और तीन साल में सारी अनुमति लेने की छूट शामिल है। दरअसल, केंद्र सरकार ने विद्युत संशोधन बिल का जो मसौदा तैयार किया है, उसमें राज्यों को किसानों को बिजली में दी जाने वाली सब्सिडी सीधे बिजली कंपनी को भुगतान करने के बजाय किसानों के खाते में ट्रांसफर कर दी जाएगी। इसके पीछे केंद्र की मंशा यह है कि बिजली कंपनियां सरकार के सामने कोई भी गलत आंकड़े पेश कर ज्यादा राशि न ले। इसके विपरीत किसानों के लिए जो सबसे बड़ी समस्या है, वह यह है कि छोटे किसानों का ज्यादा बिल आने पर यदि वे जमा नहीं करेंगे तो उन्हें सब्सिडी की राशि नहीं मिलेगी। ऐसे में बिजली भी नहीं दी जाएगी।
नक्सल प्रभावित जिलों में बैंक खातों से पैसे ट्रांसफर करना बड़ी चुनौती रही है। मनरेगा के भुगतान के लिए समय-समय पर नकद भुगतान की सुविधा की मांग की जाती रही है। यही स्थिति पीडीएस में भी आएगी, क्योंकि नेटवर्क की समस्या होने से ऑनलाइन पीडीएस काम नहीं करेगा। बड़ी संख्या में ऐसे भी आदिवासी हैं, जिनके पास आधार कार्ड और बैंक खाते नहीं हैं। ऐसे में वन नेशन वन राशन कार्ड योजना से नहीं जुड़ पाएंगे।
इन शर्तों को पूरा करना आसान नहीं
बिजली: सभी कृषि पंपों के लिए अलग फीडर के साथ-साथ बिजली मीटर भी सही होने चाहिए। मीटर को लेकर कई शिकायतें हैं। किसान बिल जमा नहीं कर पाते, इसलिए सरकार कंपनी को सीधे पैसे देती है। डीबीटी के लिए पहले किसान बिल जमा करेंगे, तब सुविधा मिलेगी।
राशन: राज्य के 14 जिले नक्सल प्रभावित हैं। बस्तर संभाग का एक बड़ा हिस्सा आज भी अबूझ है, जहां प्रशासन की सीधी पहुंच नहीं है। वहां के लोगों के पास आधार कार्ड या बैंक खाते नहीं हैं। इन्हें भी राशन में सब्सिडी के लिए आधार व बैंक अकाउंट की जरूरत पड़ेगी।
प्रॉपर्टी टैक्स: राज्य के सभी शहरी मकानों का कोई स्पष्ट रिकॉर्ड नहीं है। बड़ी संख्या में ऐसे भी लोग हैं, जो पानी-सफाई का टैक्स नहीं देते। जीपीएस सर्वे नहीं है, इसलिए जानकारी भी नहीं है। गाइडलाइन के साथ जोड़ देने पर टैक्स की राशि बढ़ जाएगी। यह काफी लंबी प्रक्रिया भी है।
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source https://www.bhaskar.com/local/chhattisgarh/raipur/news/the-condition-for-2-additional-debt-to-the-state-is-that-the-water-crisis-to-the-fields-and-food-grains-to-the-tribals-127394275.html
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