राकेश पाण्डेय |समय पूर्व मानसून आने के बाद शासन इस साल धान की फसल 37 लाख हेक्टेयर में लगाकर बाकी फसलों का रकबा बढ़ाने की तैयारी में है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार पिछले साल प्रदेश में धान की खेती 38.74 हेक्टेयर में हुई थी। कृषि वैज्ञानिक डॉ. संकेत ठाकुर के अनुसार छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था में धान की भूमिका अहम है। राज्य में धान का औसत उत्पादन 100 लाख टन से 110 लाख टन तक रहता है। लेकिन मानसून अच्छा होने के कारण उम्मीद है इस साल 2016 का रिकाॅर्ड टूट सकता है। 2016 में लगभग 125 लाख टन धान का उत्पादन हुआ था। शासन की इस बार कोशिश है कि धान का रकबा कुछ कम कर उतने में उसमें मक्का, दालें और तिलहन की फसल हो।
मानसून के जल्दी आने से फसल में बदलाव की संभावनाएं बढ़ गई हैं, क्योंकि धान के अलावा बाकी फसलों के लिए असिंचित क्षेत्रों में बारिश जरूरी है, जो ठीक समय पर हो सकती है। प्रदेश के सब मिलाकर लगभग 10 प्रतिशत सिंचित इलाकों में धान की बोआई मई अंत से शुरू हुई थी। लेकिन प्रदेश का 68 फीसदी इलाका ऐसा है, जहां खेती मानसून पर निर्भर है। अगर एक-दो दिन में सभी जगह समान वर्षा होती है कि वहां भी खेत तैयार कर बोआई का काम शुरू किया जा सकता है। जानकारों का कहना है कि भले ही शासन धान का रकबा कम कर रही है, लेकिन इसका उत्पादन लगातार बढ़ रहा है। 2018 के मुकाबले पिछले साल धान का उत्पादन लगभग 20 फीसदी बढ़ा था। इस बार भी मानसून के समय पर होने से रकबा कम होने के बावजूद धान का उत्पादन 10 फीसदी या अधिक बढ़ने की संभावना है।

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source https://www.bhaskar.com/local/chhattisgarh/raipur/news/may-break-record-of-125-lakh-tons-of-paddy-production-25-increase-possible-127401045.html
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