खेल विभाग ने 4 खेलों का भेजा प्रस्ताव, सिर्फ आर्चरी को ही मिली अनुमति, उसके लिए भी गाइडलाइन के अनुसार मैदान नहीं, खिलाड़ियों को पर्याप्त धनुष और तीर भी नहीं

खेल विभाग ने खेलो इंडिया के तहत आर्चरी के लिए अनुमति तो ले ली। लेकिन इसके लिए संसाधन देने में कोताही बरत रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि न तो ओलंपिक की तर्ज पर आर्चरी शेड बनाया गया है और न ही खिलाड़ियों को हाई क्वालिटी की खेल सामग्रियां उपलब्ध कराई जा रही हैं।

भास्कर को जानकारी मिली कि खेलो इंडिया के तहत आर्चरी को अवसर मिलने के बाद भी सुविधाएं नहीं मुहैया कराई जा रही हैं। टीम ने इसकी पड़ताल की तो सामने आया कि खेल विभाग ने खेलो इंडिया प्रोजेक्ट के तहत चार खेलों का प्रस्ताव भेजा था। जिसमें से सिर्फ आर्चरी को ही स्वीकृति मिली। इसके बावजूद आर्चरी के लिए चयनित खिलाड़ियों को ओलंपिक गेम्स के अनुसार सुविधाएं नहीं दी जा रही हैं। आलम ऐसा है कि इसके लिए बनाया गया शेड भी अंतर्राष्ट्रीय या राष्ट्रीय स्तर का नहीं है। वहीं, बो और एरो की खरीदी भी छह साल पूर्व की गई है। जिनकी संख्या भी पर्याप्त नहीं है। ऐसे में अब 25 से ज्यादा खिलाड़ियों के बीच सिर्फ 5 रिकर्व और 5 कंपाउंड बो हैं। जिसकी वजह से अन्य लोगों को इंडियन राउंड में ही प्रैक्टिस करनी पड़ती है। जबकि ओलंपिक में सिर्फ रिकर्व केटेगरी ही शामिल हैं।

जानिए, क्या है रिकर्व और कंपाउंड बो
रिकर्व: इसमें धनुष के अंत में अंदर की ओर घुमावदार अंग होते हैं। जिससे तीर छोड़ते समय और अधिक वेग मिलता है।
कंपाउंड: कंपाउंड बो में उतना ज्यादा वेग नहीं मिलता है। वहीं, इसमें ज्यादा बल लगाने पर ही तेजी से जाता है।

साई की गाइडलाइन को दरिकनार करखिलाड़ियों के लिए बनवाया आर्चरी शेड
आर्चरी के लिए खिलाड़ियाें के लिए शेड बनाने में भी कोताही बरती गई है। खेल विभाग के जिम्मेदारों ने साई (स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया) की गाइडलाइन को ही दरिकनार कर दी है। गाइडलाइन के मुताबिक 15 फीटी की ऊंचाई तय की गई है, जबकि 9 फीट ही ऊंचाई रखी गई है। साथ ही लंबाई भी 35 से 50 मीटर की बजाय 30 मीटर ही रखी गई है।

साइकिल स्टैंड जैसा बना आर्चरी शेड

25 प्रशिक्षुओं के लिए सिर्फ पांच रिकर्व और कंपाउंड के बो एरो ही उपलब्ध
यहां प्रशिक्षण लेने वाले खिलाड़ियों को बो समेत अन्य सामग्रियां भी लो क्वालिटी की उपलब्ध कराई जा रही हैं। इसमें इंडियन राउंड के हिसाब की ही बो उपलब्ध कराई जा रही हैं। जिसकी रेंज 30 से 35 मीटर तक ही है। वहीं, इसके अलावा कोई भी हायर रेंज की बो खेल विभाग द्वारा उपलब्ध नहीं कराई जा रही है। इसके लिए एसोसिएशन के भरोसे है विभाग।

6 साल में नहीं खरीद पाए पर्याप्त तीर-धनुष
खेल विभाग द्वारा छह साल पहले कंपांउड और रिकर्व बो 5-5 खरीदे गए थे। जिसके बाद से अब तक खरीदी नहीं की गई है। ऐसे में हर साल फंड लेप्स होता गया है। वहीं, वर्तमान में 25 से ज्यादा खिलाड़ी हैं, जो कि ट्रेनिंग नहीं ले पा रहे हैं।

नॉर्म्स मंगाने से पहले ही बनवा दिया शेड
खेल विभाग ने साई से आर्चरी शेड के संबंध में तय नॉर्म्स मंगवाए थे, जिन्हें भेज दिया गया है। लेकिन शेड का निर्माण वे पहले ही करवा चुके हैं, हो सकता है नए शेड के लिए नॉर्म्स मंगवाए होंगे।
गीता पंत, प्रभारी, साई सेंटर, रायपुर

सीधी बात
उमेश पटेल, मंत्री, खेल एवं युवा कल्याण
सवाल - आर्चरी को खेलो इंडिया में स्वीकृति मिली है, लेकिन सुविधाएं नहीं दी जा रही हैं?
-अभी इसके लिए अकेडमी खोलने का प्लान बनाया गया है। जिसके लिए काम जारी है।
सवाल - शेड बनवाया गया है, लेकिन वह भी साई की गाइडलाइन से नहीं बना है?
-हां, नया शेड बनवाएंगे। पुराने निर्माण में गाइडलाइन का पालन क्यों नहीं किया गया, इसकी जांच करवा लेते हैं।



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खेलो इंडिया के लिए चयनित खिलाड़ी अभ्यास करते हुए।


source https://www.bhaskar.com/local/chhattisgarh/raipur/news/sports-department-sent-proposal-for-4-games-only-archery-got-permission-for-that-too-no-ground-as-per-guideline-players-dont-have-enough-bow-and-arrow-127383644.html

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