प्रथम व द्वितीय वर्ष के जिन छात्रों को मूल्यांकन में मिलेंगे कम नंबर, उन्हें मिलेगा दोबारा मौका

इंटर्नल असेस्मेंट और असाइनमेंट दोनों को मिलाकर भी यदि किसी प्रथम या द्वितीय वर्ष के छात्र के अंक कम होते हैं तो उन्हें दोबारा मौका दिया जाएगा। उनका पुन: मूल्यांकन किया जाएगा। इसके लिए प्रथम वर्ष का छात्र है तो उसके सालभर के परफार्मेंस का पुन: आंकलन किया जा सकता है और यदि द्वितीय वर्ष का छात्र है तो उसके प्रथम वर्ष के अंक और सालभर की पढ़ाई के दौरान उसके परफार्मेंस की जांच की जाएगी। इसके बाद परिणाम घोषित किए जाएंगे।
विश्वविद्यालयों की ओर से कोशिश होगी कि कोई भी छात्र असफल ना हो और मूल्यांकन में उन्हें ठीकठाक अंक मिले ताकि उनके अंतिम वर्ष के नतीजे और बेहतर बन सके। वहीं इधर एग्जाम नहीं होने की स्थिति में हेमचंद यादव विश्वविद्यालय दुर्ग में छात्रों के मूल्यांकन का फार्मूला तैयार किया जा रहा है। यह सिर्फ शिक्षा सत्र 2019-20 के लिए होगा। इसके लिए सभी विश्वविद्यालयों में मूल्यांकन की प्रक्रिया में बदलाव किया जाएगा। इसको लेकर नियमानुसार कार्य किया जाएगा। समितियों में यह अनुमोदित होने के बाद इसे लागू किया जाएगा।

तीन में से कोई दो नियम के आधार पर होगा मूल्यांकन: हेमचंद यादव विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. अरुणा पल्टा ने बताया कि पिछली बैठक में उच्च शिक्षा मंत्री उमेश पटेल कह चुके हैं कि विभाग की ओर से जारी तीन नियमों में से कोई दो नियम का पालन करते हुए छात्रों का मूल्यांकन किया जाए। यह सिर्फ इसी शिक्षा सत्र के लिए होगा। इसे दोबारा कभी भी ना तो आधार बनाया जाएगा और न ही इसका पालन किया जाएगा। नया शिक्षा सत्र शुरू होने पर पुराने नियमों के आधार पर मूल्यांकन कार्य किया जाएगा। छात्रों की परीक्षा होगी। उसमें छात्रों का मूल्यांकन उनके द्वारा उत्तर पुस्तिका में लिखे जवाब के आधार पर किया जाएगा। इसीलिए बार बार कहा जा रहा है कि नए नियम इसी सत्र के लिए होंगे।

50 नंबर असाइनमेंट के होंगे तो 50 नंबर यूनिट एग्जाम के: मान लीजिए कोई प्रश्न पत्र सौ नंबर का है तो उसके 50 -50 नंबर के दो भाग होंगे। पहले 50 नंबर का मूल्यांकन दिए गए असाइनमेंट के दिए गए जवाब के आधार पर अंक दिए जाएंगे। इसी तरह यदि दूसरे 50 अंक यूनिट एग्जाम के होंगे। मान लीजिए प्रत्येक यूनिट एग्जाम 20-20 अंक के हुए। प्रत्येक यूनिट में छात्र को 15-15 अंक मिले। यदि पढ़ाई के दौरान चार बार यूनिट एग्जाम हुए हैं और चारों को मिलाकर छात्र को 60 अंक मिले हैं तो आंतरिक मूल्यांकन करते समय छात्र को बचे हुए 50 अंक में 37 या 38 नंबर मिल सकते हैं। इस तरह असाइनमेंट और इंटरनल एग्जाम के अंकों को मिलाकर परिणाम घोषित किया जाएगा।

8 जून तक सभी विवि से मंगाए गए हैं प्रस्ताव
राजभवन ने सभी विश्वविद्यालयों के सामने तीन नियम प्रस्तुत किए। मूल्यांकन का आधार छात्रों को प्रथम वर्ष की परीक्षा में मिले अंक हो सकते हैं। शिक्षा सत्र 2019-20 के दौरान हुई यूनिट परीक्षा में उन्हें मिले अंक हो सकते हैं। छात्रों को असाइनमेंट दिया जाएगा। इन तीनों में से कोई भी दो विकल्प को लेकर छात्रों का मूल्यांकन किया जाना है। सभी विश्वविद्यालयों से राजभवन ने 8 जून तक प्रस्ताव मंगाए हैं।

यूनिवर्सिटी के 44 हजार परीक्षार्थी होंगे प्रभावित
1.46 लाख परीक्षार्थी है। 44 हजार को सीधा लाभ है।
44 हजार परीक्षार्थी फर्स्ट ईयर और सेकंड ईयर की रेगुलर छात्र रजिस्टर्ड है दुर्ग विवि में।
24 हजार छात्र फाइनल ईयर के रेगुलर स्टूडेंट हैं विवि में।
33 पेपर, 21 मार्च तक फाइनल और प्रीवियस के हुए हैं

बदलना पड़ेगा छात्रों के मूल्यांकन का नियम
मूल्यांकन की प्रकिया में बदलाव किया जाएगा। नियमानुसार विश्वविद्यालयों के विद्या परिषद में प्रस्ताव रखा जाएगा। इसके बाद उसे कार्य परिषद में रखा जाएगा। अनुमोदन के लिए राजभवन में समन्वय समिति की स्थायी समिति के पास भेजा जाएगा। प्रस्ताव पास होने के बाद उसे समन्वय समिति में रखा जाएगा। अंतिम मुहर लगने के बाद विवि को उस नियम के अनुसार कार्य की अनुमति मिलेगी।



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source https://www.bhaskar.com/local/chhattisgarh/bhilai/news/first-and-second-year-students-who-will-get-less-number-in-assessment-they-will-get-a-chance-again-127386869.html

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