2003 बैच के डिप्टी कलेक्टरों को आईएएस अवॉर्ड के लिए पैनल बनने से पहले बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। इस पूरे बैच के चयन को भ्रष्टाचार के जरिए चयन करने का मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है। आईएएस अवॉर्ड के लिए डीओपीटी को प्रस्ताव भेजने 8 जून तक दावेदार अफसरों से नाम मांगे थे। सात रिक्त पद के लिए 21 अफसरों के नाम भेजे जाने हैं। इनमें वर्ष-2003 बैच के डिप्टी कलेक्टर संवर्ग के अफसर भी हैं।
इस बीच जेल अफसर वर्षा डोंगरे कुंजाम और उनके पति संतोष कुंजाम ने इस पर आपत्ति की है और इस सिलसिले में उन्होंने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को पत्र भी लिखा है। पत्र में उन्होंने बताया है कि उक्त बैच की चयन परीक्षा में हर स्तर पर भ्रष्टाचार हुआ है। हाईकोर्ट ने भी गड़बड़ी को माना है। यह प्रकरण सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने तक किसी भी प्रकार का प्रमोशन का लाभ नहीं दिए जाने की गुजारिश की है।
कुंजाम दंपत्ति हाईकोर्ट के फैसले पर अमल कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट में लड़ाई लड़ रही है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि जो लोग साक्षात्कार तक के लिए योग्यता नहीं रखते थे उन्हें चयनित किया गया है। इतना ही नहीं प्रकरण में न्यायालय के समक्ष खुद राज्य शासन और छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग ने लिखित में अपनी गलती होना स्वीकार किए हैं।
बड़ी बात यह है कि राज्य शासन व लोक सेवा आयोग ने हाईकोर्ट न्यायालय छत्तीसगढ़ के निर्णय को सुप्रीम कोर्ट में किसी भी स्तर पर चुनौती नहीं दी गई है। पत्र में यह भी बताया गया कि राज्यपाल द्वारा राज्य शासन और लोक सेवा आयोग छत्तीसगढ़ को अपनी गलती सुधार कर नई चयन सूची जारी करने निर्देशित किया गया है।
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source https://www.bhaskar.com/local/chhattisgarh/raipur/news/dispute-over-ias-award-varsha-and-santhosh-wrote-a-letter-for-promotion-127408555.html
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