(पीलूराम साहू )राजधानी और प्रदेश में कोरोना की दहशत तो है ही, सरकारी एजेंसियों की कार्यप्रणाली को भी डर फैलने की वजह माना जा रहा है। भास्कर टीम ने राजधानी के 5 कोरोना पीड़ितों से बातचीत की, जो ठीक होकर लौट चुके हैं लेकिन उनका और परिवार का जीवन सामान्य नहीं हुआ।
उनका कहना है कि सैंपल देने वे खुद अस्पताल गए थे। सैंपल पाजिटिव निकला तो उन्हें सूचित करने के बजाय पुलिस के काफिले के साथ एंबुलेंस पहुंची। उन्हें इस तरह ले जाया गया, जैसे कोई अपराध किया है। कई बार ऐसे काफिलों के साथ निगम और पुलिस की गाड़ियां भी कंटेनमेंट जोन बनाने के लिए बांस-बल्लियां लेकर पहुंच रही हैं। इससे पूरा इलाका आतंकित होने लगा है। कुछ मरीज के परिजन ने दर्द बयान किया कि सरकारी एजेंसियों की यह शैली पूरे मोहल्ले में ऐसा व्यापक प्रभाव छोड़ रही है कि लोग बीमार व्यक्ति तो दूर, रिश्तेदारों से भी ऐसा बर्ताव करने लगे हैं जैसे अपराधी हों।
भास्कर को फोन पर कोरोना से ठीक हुए संक्रमितों और उनके परिजनों ने सरकारी एजेंसियों के तरीके पर घोर ऐतराज जताया है। जैसे, शहर के 64 वर्षीय बुजुर्ग मुंबई से कैंसर का इलाज करवाकर लौटे। तबियत ठीक नहीं लगी तो वे खुद सैंपल देने एम्स गए। रिपोर्ट पॉजीटिव आई तो स्वास्थ्य विभाग व पुलिस की गाड़ियां घर पहुंच गई। अासपास की कई गलियों के लोग घर में दुबक गए। इसकी जरूरत ही नहीं थी। फोन पर खबर मिलती तो वे भर्ती होने खुद अस्पताल पहुंचते।
कई मरीजों के परिजन ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग के पास उनके मोबाइल नंबर से लेकर घर का पूरा पता था। गौरतलब है, लंदन से लौटी राजधानी की पहली मरीज ने भी खुद एम्स जाकर जांच करवाई थी। अधिकांश लोग ऐसा कर रहे हैं। लेकिन इसके बाद सरकारी एजेंसियां जिस तरह की कार्यशैली अपना रही हैं, उस वजह से स्वस्थ होने के बाद भी वे और उनका परिवार कोरोना से उबर नहीं पा रहा है।
न्यूजीलैंड से लौटी, पुलिस 3 दिन बाद ले गई
शहर की एक युवती हाल ही में न्यूजीलैंड से लौटी। दिल्ली में वह 8 दिन क्वारेंटाइन थी। रायपुर एयरपोर्ट में यह पता चलने के बाद अफसरों ने घर जाने कह दिया। तीन दिन बाद पुलिस का फोन अाया कि युवती को होटल में क्वारेंटाइन कर दो। परिजन कहते रहे कि क्वारेंटाइन काट चुकी है, घर इतना बड़ा है कि वहीं अाइसोलेट कर सकते हैं, लेकिन पुलिस 3 दिन बाद घर पहुंच गई और होटल में रखवाकर ही मानी, जबकि रिपोर्ट नेगेटिव थी।
दहशत फैलाना उद्देश्य ही नहीं
देश के कुछ राज्यों में मरीज अस्पताल जाने से मना करते हैं, भाग भी जाते हैं इसलिए हो सकता है कि ऐसा किया जा रहा हो। कंटेनमेंट जोन जरूरी है ताकि दूसरों में संक्रमण की अाशंका न रहे। दहशत फैलाना तो उद्देश्य ही नहीं है। -डॉ. आरके पंडा, सदस्य कोरोना कोर कमेटी
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source https://www.bhaskar.com/local/chhattisgarh/raipur/news/sampled-by-yourself-if-you-come-out-positive-then-you-reached-the-health-staff-to-take-them-to-the-police-127434062.html
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