चंद्राकर ने ट्वीट कर दी चुनौती तो वर्मा ने लिखा-लड़ने की बारी आई, तब पीठ दिखा भागे

गोबर योजना पर दूसरे दिन भी छत्तीसगढ़ की राजनीति गर्म रही। गोबर को राजकीय चिह्न बनाने का सुझाव देने के बाद शनिवार को चंद्राकर ने फिर ट्वीट कर कांग्रेस को चुनौती दी। सीएम के सलाहकार विनोद वर्मा और रुचिर गर्ग ने ट्विटर पर पलटवार किया। वहीं भाजपा नेताओं ने इस पर टिप्पणी करने से इंकार कर दिया, जबकि आरएसएस ने राज्य सरकार के गोबर खरीदने की पहल की सराहना की है।
चंद्राकर ने सुबह ट्वीट किया- मत उलझो हम से, हमसे लड़ना मुश्किल होगा, वरना लिखेंगे ऐसा इतिहास कि पढ़ना भी मुश्किल होगा। इसके जवाब में सीएम के सलाहकार गर्ग ने लिखा-पत्ता पत्ता बूटा बूटा हाल हमारा जाने है, जाने न जाने गुल ही न जाने बाग तो सारा जाने है। वर्मा ने गोडसे और सावरकर को जोड़कर चंद्राकर पर हमला किया। उन्होंने लिखा- गोरों से माफी मांगी, गांधी को गोली मारी, जब लड़ने की बारी आई, तब पीठ दिखाकर भागे हो, गोडसे की जय जयकार करो, कायर को तुम वीर कहो, इतिहास लिखने की बारी आई, तब झूठ बोलकर भागे हो। इस विषय को लेकर जब एकात्म परिसर में पत्रकारों ने भाजपा नेताओं से सवाल किया तो वे भी बचते नजर आए और कोई जवाब नहीं दिया। हालांकि पूर्व सीएम डॉ. रमन सिंह ने कहा कि गोबर खरीदने का विरोध नहीं है। बाद में चंद्राकर ने एक और ट्वीट कर हल्दीघाटी की लड़ाई पर लिखी कविता के जरिए योजना पर टिप्पणी की।

संस्कृति की बात करने वाले चंद्राकर श्रद्धांजलि में ठहाके लगा रहे थे : त्रिवेदी
प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष शैलेश नितिन त्रिवेदी ने कहा है कि भाजपा नेता चंद्राकर को आज इस बात की तकलीफ है कि भूपेश सरकार क्यों गाय और गोबर को सम्मान देने की बात कर रही है। इस बात को भुलाया नहीं जा सकता कि परंपरा और संस्कृति की बात करने वाले चंद्राकर, अटल बिहारी वाजपेयी की श्रद्धांजलि सभा में ठहाके लगाते दिखाई दिए थे। त्रिवेदी ने कहा कि यह सच है कि भाजपा ने गौरक्षा के नाम पर प्रदेशभर में गौ शालाएं बनवाईं। 15 साल के रमन सरकार में उनको करोड़ों का अनुदान मिलता रहा। अंततः भाजपा के नेता गौ सेवा करने वाले नहीं गौ माता को मारकर चमड़े, हड्डी और मांस का व्यापार करने वाले निकले। ऐसा एक से अधिक जगहों पर हुआ। कांग्रेस रिसर्च विभाग के अध्यक्ष इदरीश गांधी ने चंद्राकर से सफाई देने के बजाय सार्वजनिक रूप से माफी मांगने कहा है। गांधी ने पूछा कि प्रतीक चिह्न बदलाव के पीछे उनकी मंशा क्या थी?



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source https://www.bhaskar.com/local/chhattisgarh/raipur/news/when-chandrakar-tweeted-verma-wrote-that-it-was-his-turn-to-fight-then-he-showed-his-back-127455277.html

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