निगम-मंडलों के 400 करोड़ खजाने में, नए अध्यक्षों के लिए फंड हासिल करना चुनौती

राज्य के निगम, मंडल व आयोगों में नियुक्त अध्यक्ष और सदस्यों के सामने पहली चुनौती फंड की होगी, क्योंकि कोराेना के बाद 400 करोड़ की संपत्ति सरकारी खजाने में जमा है। वित्त विभाग के स्पष्ट आदेश हैं कि सीएम भूपेश बघेल की अनुमति के बिना बजट नहीं मिलेगा। इसमें भी यह संतुष्ट करना होगा कि खर्च करना कितना जरूरी है। यानी जरूरी काम के अलावा कोई नई योजनाओं के लिए बजट मिलना आसान नहीं होगा। सरकार ने तीन दर्जन से ज्यादा विधायक व पदाधिकारियों को निगम-मंडलों में जगह दी है। इसके बाद नेताओं-कार्यकर्ताओं में काफी उत्साह भी है। सोमवार से सभी काम संभालने की तैयारी में हैं। हालांकि नव नियुक्त अध्यक्षों के काम में सबसे बड़ा रोड़ा बजट का आ सकता है। ढाई महीने के सख्त लॉकडाउन में राज्य की आर्थिक स्थिति बुरी तरह गड़बड़ा गई है। जीएसटी समेत अन्य माध्यमों से राजस्व नहीं मिला। इसके बाद धीरे-धीरे सरकार का कामकाज पटरी पर लौट रहा है, लेकिन राजस्व की दृष्टि से अभी भी स्थिति अच्छी नहीं है। हाउसिंग बोर्ड, आरडीए, माइनिंग, नागरिक आपूर्ति निगम, गौ सेवा आयोग, क्रेडा जैसे निगम-मंडल सरकार से आर्थिक मदद मिलने के बाद ही संचालित होती हैं। वित्त विभाग ने फिलहाल नए प्रोजेक्ट्स की अनुमति देने की प्रक्रिया कठिन कर दी है।वित्त विभाग के मंत्री होने के कारण नव नियुक्त अध्यक्षों व सदस्यों को उनसे ही आग्रह करना पड़ेगा।

अब स्थापना व्यय बढ़ जाएगा : निगम-मंडलों में नियुक्ति के बाद वेतन, भत्ते, वाहन आदि की सुविधा देने में ही स्थापना व्यय बढ़ जाएगा। वित्त से जुड़े अफसरों के मुताबिक सभी निगम-मंडलों का स्थापना खर्च 200 करोड़ है। इसके बाद यदि सरकार बजट उपलब्ध नहीं कराएगी तो कोई भी नया काम शुरू करने में कठिनाई जाएगी। जो काम वर्तमान में जारी हैं, उन पर ही नई टीम को काम करना होगा, जिससे भविष्य में उपयोगिता के आधार पर सरकार राशि उपलब्ध कराए।

राजस्व बढ़ाने पर देना होगा जोर
निगम-मंडलों को अपने स्तर पर राजस्व बढ़ाने पर जोर देना होगा। खनिज, पाठ्य पुस्तक निगम, वन विकास निगम, ब्रेवरेज कॉर्पोरेशन, पर्यटन मंडल, हस्तशिल्प विकास बोर्ड आदि ऐसे निगम-मंडल हैं, जो अपने स्तर पर भी राजस्व जुटाते हैं। यहां के नई टीम ऐसे प्रोजेक्ट्स लाती है तो सरकार भी आगे बढ़कर मदद करेगी। हालांकि बीजेपी के 15 साल के शासन में कुछ निगम-मंडलों को छोड़कर बाकी सभी सरकार का खर्च बढ़ाने वाले ही साबित हुए हैं। ऐसी स्थिति में वर्तमान में मुश्किलें आ सकती हैं।



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source https://www.bhaskar.com/local/chhattisgarh/raipur/news/400-crore-in-the-treasury-of-corporations-and-boards-challenge-to-get-funds-for-new-presidents-127528683.html

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