गोलबाजार की दुकानें व्यापारियों को बेचेगा निगम, कमाएंगे 400 करोड़ रु.

राजधानी के एक सदी पुराने और शहर के सबसे चर्चित गोलबाजार के व्यापारियों को उनकी दुकानों का मालिकाना हक देने की कवायद शुरू हो गई है। हर दुकानदार के नाम से उनकी दुकान की रजिस्ट्री होगी। निगम कलेक्टर गाइड लाइन के हिसाब से दुकानों की रजिस्ट्री करेगा। इसके एवज में निगम को एक मुश्त करीब 400 करोड़ तक की आय होगी। दुकानों की रजिस्ट्री होने से कारोबारियों को कई तरह की सहूलियतें भी मिलेंगी। निगम जल्द ही सर्वे करने के बाद यहां रजिस्ट्री की प्रक्रिया शुरू करेगा।
निगम के अफसर सोमवार से बाजार का सर्वे शुरू करेंगे। इसके लिए बाजार विभाग को जिम्मेदारी सौंपी गई है। प्रारंभिक तौर पर जो फार्मूला तैयार किया गया है, उसके मुताबिक निगम यहां के दुकानदारों से 15-15 साल का लीज एग्रीमेंट करेगा। इसे हर पंद्रह साल में नवीनीकरण कराना होगा। दुकानदारों से मासिक किराया भी लिया जाएगा। रजिस्ट्री होने से दुकानदार कभी भी जरूरत पड़ने पर दुकानें बेच सकेंगे। इसके अलावा नए निर्माण की छूट भी मिल जाएगी। महापौर एजाज ढेबर ने अफसरों को सर्वे के निर्देश दिए हैं।
वे शनिवार को निगम अधिकारियों के साथ गोलबाजार का निरीक्षण करने भी पहुंच गए थे। अफसरेां के अनुसार गोलबाजार में कारोबार करने वाले सभी व्यापारियों और छोटे-छोटे दुकानदारों का सर्वे किया जाएगा। निगम के पास उपलब्ध रिकार्ड और बाजार में काबिज दुकानदारों की लिस्टिंग की जाएगी। एक रिपोर्ट तैयार की जाएगी कि निगम किन-किन कारोबारियों से किराया ले रहा है और कितने लोग यहां अवैध रूप से कारोबार कर रहे हैं। अवैध कारोबार करने वालों को हटाया जाएगा।

पहले यहां किराना और तेल की ही दुकानें ज्यादा थीं
गोलबाजार करीब 1900 के आसपास बसाया गया है। बाजार के बीचोबीच गोल गुंबद है। इस वजह से इसका नाम गोल बाजार चर्चित हो गया। उस समय आस-पास कोई बड़ी बसाहट नहीं थी। शहर की आबादी पुरानी बस्ती की ओर थी। पहले यहां किराना और तेल इत्यादि की दुकानें ज्यादा थीं। धीरे-धीरे दुकानों की संख्या बढ़ती है। इस समय गोलबाजार में ढाई हजार से ज्यादा छोटे-बड़े कारोबारी हैं। यहां पर 50, 100, 200, 500 और 600 वर्गफीट की दुकानें हैं। कई दुकानदारों ने निगम रिकार्ड से ज्यादा जगह पर कब्जा कर लिया है। निगम व्यापारियों को दो तरह का विकल्प देगा। वे या तो रिकार्ड के मुताबिक जगह की रजिस्ट्री कराएं या फिर जितने जगह पर काबिज हैं उतनी जगह की रजिस्ट्री कराएं।

बदहाल बाजार को स्मार्ट बनाएगा निगम
जवाहर बाजार को शहर के पहले स्मार्ट बाजार के रूप में व्यवस्थित और नए सिरे से बसाने के बाद गोलबाजार को राजधानी के अनुरुप व्यवस्थित किया जाएगा। मालिकाना हक उसी दिशा में प्रयास है। यहां किराना, बर्तन, चूड़ी, मसाला, जड़ी-बूटी, कपड़े तथा पान-मसालों लेकर हर तरह का कारोबार है। बाजार के भीतर ढाई हजार से ज्यादा छोटी-बड़ी गुमटियां और दुकानें हैं। रायपुर नगर पालिका और नगर निगम बनने के बाद यहां कारोबारियों को उस समय के हिसाब से एक रुपए, दो रुपए किराया लिया जाने लगा। धीरे-धीरे बढ़कर यह 100, 200, 500 और हजार रुपए तक पहुंचा है। वर्तमान बाजार मूल्य के आधार पर इन दुकानों को किराया हजारों में है।
निगम व्यापारियों को दुकानों का मालिकाना हक देने के बाद नियमित: प्रीमियम पर दो प्रतिशत की दर से वार्षिक किराया भी लेगा। जैसे किसी दुकान की रजिस्ट्री 10 लाख रुपए में हुई है। निगम उसी आधार पर किराया तय करेगा। 10 लाख का दो प्रतिशत 20 हजार वार्षिक किराया दुकानदार से लिया जाएगा। मासिक आधार पर यह लगभग 1700 रुपए होगा। अभी दुकानदार इसी दुकान का महज 50 से 100 रुपए मासिक किराया दे रहें हैं।



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Corporation will sell Golbazar shops to traders, will earn 400 crores


source https://www.bhaskar.com/local/chhattisgarh/raipur/news/corporation-will-sell-golbazar-shops-to-traders-will-earn-400-crores-127479019.html

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