राजधानी के लिहाज से इस बार बारिश का मौसम पिछले 10 साल में हुई बारिश से बिलकुल अलग रहेगा। भास्कर की पड़ताल में यह बात सामने आई कि इस बार मानसून आने से पहले ही शहर का भूजल स्तर लबालब था। भूजल विभाग के प्री-मानसून सर्वे में यह बात आई कि गर्मियों में जिन कुओं और बोरवेल का जलस्तर औसतन 80 मीटर नीचे चला जाता था, इस बार वह राजधानी में औसतन 30 मीटर ऊपर है। वैज्ञानिक मान रहे हैं कि यह भूजल के लबालब होने के संकेत हैं। यही नहीं, मानसून आने के बाद से अब तक औसत से डेढ़ गुना ज्यादा बारिश हो चुकी है। इससे शहर के लगभग सभी तालाब और जलस्त्रोत फुल हो गए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार अगर बारिश का पानी शहर की बस्तियों में ज्यादा भरा, तो उसका जल्दी उतरना मुश्किल होगा। जहां पानी उतरने में 2-3 घंटे लगते थे, इस बार वहीं 8-8 घंटे लग रहे हैं। ऐसे में अगर निचले इलाकों में भरे बरसाती पानी को निकालने के लिए ड्रैनेज (नालियां) खुले और साफ नहीं हुए तो शहर में मुसीबत बढ़ सकती है।
राजधानी में 12 जून को मानसून ने दस्तक दी। उसके बाद से अब तक 40 फीसदी ज्यादा बारिश हो चुकी है। सामान्य तौर पर 1 से 30 जून तक 178.2 मिमी पानी गिरना चाहिए, लेकिन इस साल अब तक 246.7 मिमी पानी बरस गया है। मौसम विज्ञानियों के मुताबिक राजधानी में मानसून पहुंचने के बाद से लगातार बारिश हो रही है। इससे पहले भी 1 से 10 जून तक लगभग 47 मिमी पानी बरस चुका था। यानी मानसून आने के बाद 20 दिनों में लगभग 200 मिमी बारिश हुई है। यह सामान्य से 40 फीसदी से अधिक (लगभग डेढ़ गुना) है। इसी तरह, कोरोना काल में इस साल शहर में भूजल और सरफेस वाटर दोनों बहुत ज्यादा अच्छी स्थिति में है। भूजल विभाग के मई महीने में प्री मानसून सर्वे की रिपोर्ट के मुताबिक शहर में बोर में जमीन के अंदर पानी का लेवल औसतन 31.48 मीटर तक बढ़ गया है। शहर के तकरीबन 40 से ज्यादा छोटे बड़े तालाबों में भी पानी लबालब है।
1. जलविहार कॉलोनी
पानी उतर जाता था 2 घंटे में इस बार आधा दिन लग गया
तेलीबांधा के निचले इलाके श्यामनगर, जलविहार और सुभाष नगर में बरसों से बारिश में पानी भरता रहा है। लेकिन इन बस्तियों में भरा पानी 2-3 घंटे में उतर जाता था। एक हफ्ते पहले जलविहार कालोनी में तेज बारिश के कारण पानी भरा, लेकिन उतरने में 8 घंटे लग गए।
2. अवंति विहार काॅलोनी
पानी जमीन के नीचे जाने का ही विकल्प, यहां भी नहीं उतरा
अवंतिविहार के बड़े हिस्से में बरसाती पानी की निकासी के पुख्ता इंतजाम नहीं हैं। यहां के अनिल शर्मा, विजय शर्मा और संजय अग्रवाल ने बताया कि यह शिकायत पुरानी है। यहां भी पानी जमीन में ही जाता है, लेकिन पार्षद प्रमोद मिश्रा ने भी माना कि इस बार पानी उतरने में आधा दिन लगा।
एक्सपर्ट ओपिनियन
संजय भागवत, रिटायर्ड सीई-जल विभाग
नालियां साफ रखनी ही होंगी अन्यथा देर से उतरेगा पानी
भूजल और सरफेस वाटर अच्छी स्थिति में है। जलभराव को लेकर ये एक खास तरह की स्थिति है। जो बीते कई दशकों में पहली बार बनी है। रायपुर में ज्यादातर नालियां जाम रहती हैं। पानी जमीन के भीतर ही ज्यादा ज्यादा है, लेकिन इस साल इस भरोसे में रहना ठीक नहीं है। नगरीय निकायों की कोशिश होनी चाहिए कि किसी बस्ती में ज्यादा पानी न भरे। ग्राउंड वाटर अच्छी स्थिति में है, इसलिए बस्तियों में भरा पानी इस बार देर से उतरेगा। इसलिए जरूरी ये है कि नालियां रूटीन बेसिस पर साफ रखें ताकि बारिश का पानी निकलता रहे।
आपदा टीमें भी अलर्ट
"इस बार सभी शहरों को जलभराव के मामले में खास सतर्कता की हिदायत दी है। शहर और राज्य की आपदा टीमें भी अलर्ट हैं।"
-एके पिल्लई, अधीक्षक-ईपदा प्रबंधन
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source https://www.bhaskar.com/local/chhattisgarh/raipur/news/one-and-a-half-times-the-rain-in-the-city-ground-water-is-5-meters-above-ie-in-such-a-situation-if-the-settlements-are-filled-with-water-then-it-will-take-many-hours-to-descend-127465150.html
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