टाटीबंध चौक की गाड़ियों को डायवर्ट करने का मार्ग 6 माह में ढूंढ नहीं सके, फ्लाइओवर फंसा

सड़क हादसों और बेतरतीब ट्रैफिक के लिए पूरे प्रदेश में चर्चित टाटीबंध चौराहे पर इंटरचेंज फ्लाइओवर दो साल पहले मंजूर हुआ, लेकिन अब तक काम शुरू नहीं हो पाया है। जमीन अधिग्रहण से लेकर कई तरह की दिक्कतों में यह डेढ़ साल अटका रहा। छह माह पहले निर्माण एजेंसी ने पुल बनाने के लिए चौराहे को बेरिकेड्स से घेर दिया, पर काम अब तक चालू नहीं हुआ। भास्कर की पड़ताल में चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि निर्माण एजेंसी से लेकर प्रशासन तक कोई भी तय नहीं कर पा रहा है कि आखिर यहां से दिनभर में गुजरने वाले डेढ़ लाख वाहनों को डायवर्ट कहां किया जाए, क्योंकि यहां से गुजरने वाले ज्यादातर वाहन भारी हैं। भारी वाहनों के हिसाब से डायवर्सन के लिए जितनी जगह चाहिए, उतनी नहीं मिल पाई है। निर्माण एजेंसियों से जुड़े अफसरों का कहना है कि डायवर्टेड रोड जरा भी संकरी हुई तो यहां रोजाना दिनभर कई-कई किमी का जाम लगा रहेगा।
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचआई) फ्लाईओवर निर्माण के दौरान ट्रैफिक सिस्टम को ठीक रखने का कोई वैकल्पिक उपाय नहीं कर पाया है। भास्कर की पड़ताल में पता चला कि इस प्रोजेक्ट को शुरू करने के लिए एनएच और निर्माण एजेंसी के साथ ट्रैफिक पुलिस के बीच एक भी बैठक नहीं हुई है। सभी एजेंसियां वैकल्पिक मार्क की तलाश में अलग-अलग लगी हैं और कोई भी डायवर्सन का मसला हल नहीं कर पा रही हैं। जानकारों के मुताबिक ऐसा नहीं होने से ट्रैफिक संभालना मुश्किल होगा और भारी वाहनों से हादसों का खतरा और बढ़ जाएगा। जानकारों का तो यह भी दावा है कि इस फ्लाइओवर में दो नए पेंच फंस गए हैं। पहला, अब तक इंटरचेंज फ्लाईओवर का फाइनल डिजाइन तय नहीं हुआ। दूसरा, कोरोना की वजह से निर्माण एजेंसी ने साफ कर दिया है कि वह तेजी से काम नहीं कर सकती है।

दिनभर में डेढ़ लाख भारी वाहन, डायवर्सन नहीं तो काम भी नहीं
ट्रैफिक पुलिस की सर्वे रिपोर्ट के अनुसार यहां से 24 घंटे में लगभग डेढ़ लाख वाहन गुजर रहे हैं, जिनमें करीब 60 फीसदी बड़े-छोटे ट्रक हैं। अगर डायवर्सन सही नहीं रहा तो सड़क संकरी होने तथा बिल्डिंग मटेरियल पड़ा रहने से जाम और हादसे, दोनों ही खतरे निर्माण पूरा होने तक बने रहेंगे। जबकि टाटीबंध चौक पर साल दर साल हादसों में मृतकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। दो साल में केवल इसी चौक पर सड़क हादसों में 39 लोग मारे जा चुके हैं। इनमें अधिकांश दोपहिया सवार थे, ट्रकों की चपेट में आ गए।
राजनीति और दोषारोपण भी चला : पिछली सरकार में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने इंटरचेंज फ्लाईओवर को मंजूर किया था। लेकिन सरकार बदलने के साथ ही केंद्र ने फ्लाईओवर का बजट रोक दिया। इधर, चौक पर निजी जमीन का अधिग्रहण भी समय पर नहीं हो सका। इसके लिए एनएचआई और जिला प्रशासन एक-दूसरे पर जिम्मेदारी थोपते रहे।छह माह पहले जमीन अधिग्रहण का विवाद सुलझने का दावा किया गया, लेकिन जानकारों का कहना है कि जैसे ही काम शुरू होता है, प्रभावित लोग मुआवजे के लिए सड़क पर आ जाते हैं।
डेढ़ साल में पूरा करने का दावा
एनएचआई अफसरों ने दावा किया है कि टाटीबंध चौक पर पुल डेढ़ साल में पूरा कर लिया जाएगा। ट्रैफिक डायवर्ट नहीं हुआ तो अलग-अलग पैच में काम करना होगा। तीन सड़कों से आने वाले फ्लाईओवर इस चौक के ठीक 30 फीट ऊपर मिलेंगे। निर्माण एजेंसी अब भी कह रही है कि ड्राइंग-डिजाइन फाइनल नहीं हो पा रहा है। सूत्रों के मुताबिक डायवर्सन की जगह नहीं मिली तो चौक को बंद किए बिना निर्माण शुरू होगा और ट्रैफिक वन-वे किया जाएगा। लेकिन ऐसा करने से यहां सुबह-शाम लंबा जाम लगने की आशंका है।



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Could not find route to divert vehicles of Tatibandh Chowk in 6 months, flyover stuck


source https://www.bhaskar.com/local/chhattisgarh/raipur/news/could-not-find-route-to-divert-vehicles-of-tatibandh-chowk-in-6-months-flyover-stuck-127485896.html

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