कोरोना की वजह से टली 70% शादियां, अब सात फेरों के लिए 5 माह का और इंतजार

साल 2020 शादियों के लिहाज से ठीक नहीं रहा। ऐसा नहीं है कि मुहूर्त कम थे। इस बार 30 दिन से ज्यादा मुहूर्त थे, लेकिन महामारी के चलते मार्च से जून के बीच इक्का-दुक्का शादियां ही हुईं। जबकि इस सीजन में सबसे ज्यादा शादियां होती हैं। जानकारी के मुताबिक कोरोना की वजह से इस बार प्रदेशभर में 70% शादियां टाल दी गईं। अब सात फेरों के लिए इंतजार और बढ़ गया है क्योंकि भगवान विष्णु बुधवार से 5 माह के लिए विश्राम पर चले गए हैं। यानी नवंबर तक मांगलिक कार्यों पर प्रतिबंध रहेगा।
देवशयनी के साथ जैन साधु-संतों का चातुर्मास भी शुरू हो जाता है। यह इस बार 4 जुलाई से मनाया जा रहा है। ज्योतिषियों का कहना है कि अधिकमास होने की वजह से क्वांर महीना 2 बार पड़ेगा। इसीलिए इस बार जग के पालनकर्ता भगवान विष्णु की विश्राम अवधि भी 5 माह की होगी। सामान्य तौर पर यह अवधि 4 माह की होती है। इस दौरान किसी भी तरह के शुभ कार्य नहीं हो सकेंगे। 25 नवंबर को देवउठनी एकादशी पर भगवान जागेंगे और मांगलिक कार्य दोबारा शुरू हो सकेंगे। विवाह के लिए मुहूर्त 27 नवंबर को है। इसके बाद 10 दिसंबर को। यानी अब साल 2020 के 2 मुहूर्त ही शेष हैं।

अगले 5 माह यानी नवंबर तक नहीं हो सकेंगे ये संस्कार

  • विवाह
  • मुंडन
  • कर्णभेदन
  • अक्षरारंभ
  • गृहप्रवेश

2021 के शुरुआती साढ़े3 माह भी रहेगा प्रतिबंध
जिनकी शादी नवंबर-दिसंबर में भी नहीं होगी, उन्हें अप्रैल 2021 के पहले पखवाड़े तक इंतजार करना होगा। ऐसा इसलिए क्योंकि कभी गुरु तो कभी शुक्र और कभी मलमास की वजह से मांगलिक कार्य प्रतिबंधित रहेंगे। ज्योतिषियों के मुताबिक 17 जनवरी से 12 फरवरी तक बृहस्पति अस्त रहेंगे। 16 फरवरी से शुक्र अस्त हो जाएंगे जिनका उदय अप्रैल में होगा। इस बीच मलमास भी पड़ रहा। इन्हीं वजहों से 2021 के शुरुआती साढ़े 3 महीने शुभ कार्यों नहीं होंगे।
सृष्टि संचालन का जिम्मा अब शिवजी के हाथों में
महामाया मंदिर के पुजारी पं. मनोज शुक्ला बताते हैं कि विष्णुजी के विश्राम पर जाने के बाद सृष्टि संचालन की जिम्मेदारी भगवान शिव और उनके परिवार पर आ जाती है। इसीलिए देवशयनी के बाद सावन मनाकर एक माह शिव की आराधना की जाती है। नागपंचमी में उनके सांप की पूजा होती है। नंदी की पूजा के लिए छत्तीसगढ़ में पोला मनाया जाता है। इसी तरह माता पार्वती के लिए तीजा, गणेश के लिए गणेश चतुर्थी और कार्तिक के लिए हलषष्ठी का पर्व मनाने की परंपरा है।

सितंबर के बाद पड़ने वाले त्योहार इस बार 15 दिन की देरी से आएंगे
"सितंबर के बाद पड़ने वाले सभी बड़े त्योहार पिछले साल की तुलना में 15 दिन के बाद पड़ेंगे। ऐसा अधिकमास की वजह से होगा। उन्होंने बताया इस वर्ष अधिकमास सितंबर-अक्टूबर के बीच रहेगा। 15 दिन का श्राद्ध पक्ष इस बार 3 सितंबर से शुरू होगा। इसके बाद 9 दिन की शारदीय नवरात्र 17 अक्टूबर से शुरू होगी। इस साल 25 अक्टूबर और दीपावली 16 नवंबर को मनाई जाएगी।"
-डॉ. दत्तात्रेय होस्केरे, ज्योतिषाचार्य



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source https://www.bhaskar.com/local/chhattisgarh/raipur/news/70-marriages-postponed-due-to-corona-now-wait-5-months-for-seven-rounds-and-because-127469059.html

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