जिन छात्रों ने ऑल इंडिया से लिया प्रवेश, उन्हें स्टेट कोटे से भी सीटें, सूची रद्द

चिकित्सा शिक्षा विभाग ने मेडिकल कॉलेजों में पीजी सीटों में एडमिशन के लिए चल रही काउंसिलिंग में नियमों को ताक पर रख दिया है। जिन 11 छात्रों ने आल इंडिया कोटे से एडमिशन ले लिया है, उन्हीं छात्रों को फिर स्टेट कोटे से सीटों का आवंटन कर दिया है। जबकि यह नियम विरुद्ध है। सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही कह दिया था कि आल इंडिया कोटे से राउंड दो में एडमिशन लेने वाले छात्र अगले चरण की किसी भी काउंसिलिंग के लिए पात्र नहीं है। विवाद के बाद डीएमई कार्यालय ने आवंटन सूची रद्द कर दी है।
अब नए सिरे से आवंटन सूची जारी की गई है।
मेडिकल पीजी व एमबीबीएस की काउंसिलिंग में विवाद कोई नई बात नहीं है। मेडिकल पीजी के दूसरे चरण के लिए 3 जुलाई को आवंटन सूची जारी की गई थी। इनमें वे भी छात्र शामिल थे, जो आल इंडिया कोटे से एडमिशन ले चुके थे। ऐसे छात्रों की संख्या 11 थी। इसके अलावा आल इंडिया काउंसिलिंग में शामिल हो चुके 22 और छात्र हैं, जिन्हें आवंटन सूची में शामिल किया गया था। इन 33 छात्रों को अब स्टेट कोटे की काउंसिलिंग के लिए अपात्र घोषित कर दिया गया है। काउंसिलिंग कमेटी में शामिल अधिकारियों का कहना है कि मेडिकल काउंसिलिंग कमेटी से सूची जारी नहीं होने के कारण ऐसी गफलत हुई है। जबकि जानकारों का कहना है कि आल इंडिया कोटे की काउंसिलिंग होते ही मेडिकल काउंसिलिंग कमेटी तत्काल सूची भेज देती है। काउंसिलिंग में शामिल अधिकारियों ने इस पर ध्यान ही नहीं दिया और री-काउंसिलिंग की दूसरी सूची जारी कर दी। विवाद तब बढ़ा, जब पहले काउंसिलिंग में शामिल छात्रों को दूसरी री काउंसिलिंग में भी कोई सीट नहीं मिली। ऐसे छात्रों ने शनिवार को डीएमई से भी शिकायत कर दी। इसके बाद अधिकारी जागे और आवंटन सूची रद्द कर नए सिरे से सूची जारी की।
प्राइवेट कॉलेजों मेंकरोड़ों की सीटें
मेडिकल कॉलेजों में वैसे ही कम सीटों के कारण एडमिशन आसान नहीं है। इस पर काउंसिलिंग में भर्राशाही से छात्र परेशान होते रहे हैं। निजी कॉलेजों में रेडियो डायग्नोसिस जैसी सीटें करोड़ों रुपए की होती है। काउंसिलिंग में गफलत का यह नतीजा रहा कि एक छात्र को पहली काउंसिलिंग में रेडियो डायग्नोसिस की सीटें मिली थीं। अब उसे ऑर्थोपीडिक मिला है। यही नहीं एक छात्रा को पीडियाट्रिक मिला था, अब उसे छग में कोई सीट नहीं मिली है। ये गफलत काउंसिलिंग में लापरवाही की वजह से हुई है। ईडब्ल्यूएस कोटे का मामला हाईकोर्ट में है। इसकी 22 से ज्यादा सीटों पर एडमिशन अटका हुआ है। कोर्ट से निर्णय आएगा, तब इन सीटों पर एडमिशन होगा।

"ऑनलाइन काउंसिलिंग के कारण ऐसी गफलत हुई है। छात्रों ने आल इंडिया के साथ स्टेट कोटे का फार्म भी जमा कर दिया था। नए सिरे से सूची जारी की है। 33 छात्रों को दूसरी काउंसिलिंग के लिए अपात्र घोषित किया गया है।"
-डॉ. जितेंद्र तिवारी,प्रवक्ता डीएमई कार्यालय



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source https://www.bhaskar.com/local/chhattisgarh/raipur/news/students-who-took-admission-from-all-india-they-also-got-seats-from-state-quota-list-canceled-127479219.html

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