साल में पांच बार बनाएंगे वर्मी कम्पोस्ट गौठान समितियों को सरकार देगी कर्ज

गोधन न्याय योजना में शासन ने साफ कर दिया है कि निजी तौर पर कोई भी व्यक्ति 5 किलो गोबर ही बेच सकेगा, यानी 10 रुपए का। गांवों में जहां आजीविका मिशन और डीएमएफ से वहीं शहरी इलाकों में स्वच्छ भारत मिशन के माध्यम से गोबर खरीदा जाएगा। गोबर खरीदी गौठानों में होगी और गौठानों के विकास के लिए फंड का इंतजाम अप्रैल से शराब पर 5 रुपए के सेस के जरिए किया जा रहा है। गोबर खरीदी का भुगतान ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका मिशन व डीएमएफ और शहरी क्षेत्रों में स्वच्छ भारत मिशन से होगा। गौठान चलाने वाले स्वसहायता समूहों को इन मदों से कर्ज दिया जाएगा। खरीदे गए गोबर की प्रोसेसिंग की प्रक्रिया गोकुलधाम में की जाएगी। जहां साल भर में पांच बार वर्मी कंपोस्ट (जैविक खाद) बनाई जाएगी।
गोबर खरीदी और वर्मी कंपोस्ट बनाने की प्रक्रिया के लिए शासन ने गांवों में गौठान समितियों की भूमिका तय की गई है लेकिन शहरी इलाकों में इसका पूरा मैकेनिज्म अभी तैयार की किया जा रहा है। बताया गया है कि प्रदेश के लगभग सभी नगरीय निकायों में गोकुल धाम के लिए स्थान आरक्षित किए गए हैं साथ ही कई शहरी इलाकों में गाैठानों का निर्माण भी किया गया है।

हर गौठान में 630 क्विंटल खाद
गोबर खरीदी और वर्मी कंपोस्ट बनाने की शुरुआत प्रदेश के ढाई हजार गाैठानों में एक साथ शुरु की जाएगी। उसके बाद 3000 हजार गौठान और जोड़े जाएंगे। हर गौठान में 90 टांके बनाए जाएंगे। एक टांके की क्षमता 1000 किलो गोबर रखने की होगी। 1000 किलो गोबर से 700 किलो वर्मी कंपोस्ट का निर्माण होगा। यानी हर गौठान में लगभग 630 क्विंटल वर्मी कंपोस्ट बनेगा। इसे तैयार होने में 45 दिन का समय लगता है। इस तरह एक साल में 45-45 दिन के पांच चक्र में गोबर की खरीदी और खाद बनाया जाएगा। ढाई हजार गौठानों के अंतर्गत 20 लाख मवेशियों का चिन्हांकन किया गया है। एक किलो वर्मी कंपोस्ट बनाने में डेढ़ किलो गोबर की खपत होगी। डेढ़ किलो गोबर की खरीदी कर वर्मी खाद बनाने में 6 रुपए का प्रति किलो का खर्च आएगा। किसान और सरकार का वन विभाग, सहकारी सोसायटियां इसे 8 रुपए प्रति किलो की दर से खरीद सकेंगे। यानी प्रतिकिलो दो रुपए का मुनाफा सरकार के हिस्से में आएगी।

कचरा गाड़ी जैसा वाहन
प्रदेश में एक करोड़ 11 लाख गोधन हैं। इसमें से कितना गोबर खरीदा जा सकेगा इसका पूरा विवरण तैयार किया जा रहा है। सरकार की कोिशश है कि पूरा गोबर खरीदा जाए। शहरी इलाकों में गोबर एकत्रित करने के लिए वाहन चलाने की प्लानिंग भी की जा रही है।

योजना गौहत्या रोकने कारगर- संघ
इधर, आरएसएस के प्रांत चालक बिसराराम यादव ने भूपेश सरकार की इस योजना की तारीफ की है। उन्होंने मीडिया से चर्चा में कहा कि योजना छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था का आधार बनेगी। यह गौ हत्या रोकने में कारगर साबित होगी। यादव का आगे कहना है कि पीएम नरेंद्र मोदी की भी मंशा है कि रासायनिक खाद का उपयोग कम किया जाये और यूरिया का प्रयोग बंद किया जाये ऐसा उन्होंन कहा भी है इसके लिये ज़रूरी है कि केंद्र सरकार रासायनिक खाद पर सब्सिडी ख़त्म करे और जैविक खाद पर सब्सिडी बढ़ाये इससे कृषि उत्पाद का लागत मूल्य भी कम हो जायेगा,कृषि कर्म लाभ का उद्यम भी बन जायेगा। प्रांत संघ चालक ने भूपेश सरकार की गोबर ख़रीदी योजना की सराहना करते हुये सुझाव दिया है कि सरकार गोबर आधारित जैविक खाद ख़ुद बनाए और सेवा सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों को बिक्री करे।

वन विभाग की पुस्तिका हरियर भुईयां का किया विमोचन
रायपुर | हरेली तिहार के अवसर पर सीएम भूपेश बघेल ने ’हरियर भुईयां’ गढ़बो नवा छत्तीसगढ़ का विमोचन किया। इसे वन विभाग ने प्रकाशित किया है। इस अवसर पर कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे, नगरीय प्रशासन मंत्री डॉ. शिव कुमार डहरिया, मुख्यमंत्री की पत्नी मुक्तेश्वरी बघेल, पुत्री स्मिता बघेल, दामाद दिवाकर वर्मा, नाती अथर्व वर्मा समेत अन्य परिजन सदस्य उपस्थित रहे।



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वन विभाग की पुस्तिका का विमोचन करते मुख्यमंत्री बघेल।


source https://www.bhaskar.com/local/chhattisgarh/raipur/news/government-will-give-loan-to-vermi-compost-gauthan-committees-five-times-a-year-127535736.html

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