लॉकडाउन फिर मजबूरी बन गई। हमारे लिए। आपके लिए। सरकार के लिए। आखिर क्यों? क्या कभी सोचा है इस बात को। आपको, हमको सोचना होगा आखिर ये लॉकडाउन का सहारा क्यों लेना पड़ रहा है। रायपुर शहर के बाजार देखिए। नजारा बिल्कुल वैसा ही जैसा कोरोना कॉल के पहले होता था। भीड़। भारी भीड़। आधे मास्क लगाए हुए और आधे निश्चिंत मानो कोराेना उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकता। नतीजा प्रदेश में कोराेना मरीज पांच हजार से अधिक फैल गए। याद करिए, लॉकडाउन दो समाप्त होते-होते अन्य राज्यों की तुलना में छत्तीसगढ़ कितनी सुखद स्थिति में था। पर अनलॉक होते ही हमारी सोच और हमारी गतिविधियां भी अनलॉक हो गईं। मानो कुछ हुआ ही नहीं। सब भूल गए। माना कि लॉकडाउन से सब थम गया था। भारी आर्थिक नुकसान हुआ। पर सोचिए ना। कोरोना का काेई इलाज तो नहीं है। कोई वैक्सीन भी नहीं है। फिर हम इतने बिंदास कैसे हो सकते हैं। सरकारी बंदिश से बेहतर हमारी अपनी बंदिश कारगर होगी। यही वजह है कि दोबारा लॉकडाउन का शिकंजा अब हमें कसेगा। पुलिस की सख्ती हमें देखने को मिलेगी। इस बार मेहरबानी करके कोरोना की चैन तोड़ने का हम संकल्प लें। कोरोना जहां तक पसर गया, उससे आगे ना बढ़ पाए, यह सुनिश्चित करना आपकी हमारी सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है। सरकारी व्यवस्था से ज्यादा जरूरी है हम-आप संकल्प लें। तभी हम रायपुर और छत्तीसगढ़ को मुंबई, दिल्ली या गुजरात जैसी भयावह स्थिति से बचा पाएंगे। अब भी नहीं चेते तो स्थिति नियंत्रण से बाहर हो जाएगी। इसलिए लॉकडाउन को नहीं, लॉकडाउन के महत्व को समझिए।
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source https://www.bhaskar.com/local/chhattisgarh/raipur/news/understand-its-importance-not-lockdown-127528615.html
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