जशपुर में एक अंजान बीज के उत्पादन से किसान लाखों रुपए की कमाई कर रहे हैं। बिना किसी देख भाल के खेतों के मेढ़ में होने वाले इस वनस्पति के बीज की मांग विदेशों में लगातार बढ़ रही है। लेकिन इस बार कोरोना वायरस को लेकर हुए लॉकडाउन के कारण इसके संग्रहणकर्ता इस बार इस बीज की बिक्री नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे में उन्होंने बीज को घर में स्टाेर करके रखा है। 7 सौ रुपए प्रति किलो की दर से मिलने वाले इस बीज का उपयोग कैंसर के दवा बनाने में हाेता है।
रक्ती या गूंज के पौधे को जानवर भी नहीं खाते हैं। इसके फल देखने में सेम की तरह होते है और इसकी पत्ती इमली की पत्ती की तरह होती है। रक्ती के पौधे भी सेम के पौधे की तरह नार फैलाते हैं। इसका उत्पादन इस वक्त जिले में मुख्यतः पत्थलगांव और फरसाबहार विकासखंड में किया जा रहा है। सबसे अधिक मात्रा में इसका उत्पादन फरसाबहार ब्लाक के पंडरीपानी,तिलंगा,खुंटगांव और पत्थलगांव ब्लाक के बागबहार, मयूरनाचा, बागमाड़ा और गोढ़ी जैसे गांव में किया जा रहा है। स्थानीय किसानों ने बताया कि रक्ती या गूंज का उत्पादन लगभग 10 साल पहले शुरू हुआ था। यह वनस्पति क्षेत्र में किसके द्वारा और कैसे लाया गया,इसकी जानकारी किसी को नहीं हैं। बीजों के जानकार व्यवसायी गोपाल सोनी ने बताया कि रक्ती का उत्पादन जिले में मुख्यतः पत्थलगांव और फरसाबहार ब्लाक में होता है। इसके बीज का संग्रहण कर लोग व्यापारियों के पास बेचते हैं। बीज को रायगढ़ एवं बिलासपुर के व्यापारी यहां से खरीद कर ले जाते हैं।
सबसे महंगा औषधीय बीज
रक्ती को जशपुर जिले का सबसे महंगा वनस्पति उत्पाद माना जा रहा है। जानकारों ने बताया कि रक्ती बीज के रंग के आधार पर तीन प्रकार की होती है लाल,सफेद और चितकबरा। इसमें सबसे अधिक महंगा सफेद बीज 7 सौ रुपए किलो की दर से खरीदा जाता है। इसके अतिरिक्त लाल रक्ती 80 रुपए और चितकबरा 3 सौ रुपए की दर से खरीदते हैं।
देखभाल की जरूरत नहीं
पौधे को किसी प्रकार के देखभाल की जरूरत नहीं पड़ती। इसे खेत,बाड़ी या किसी भी खुले स्थान पर लगाया जा सकता है। इसे ना तो खाद की जरूरत पड़ती है और ना ही विशेष पानी की इसका पौधा किसी जंगली पौधे की तरह स्वमेव पनपते जाता है। इसका फल पक कर नवंबर के आखिरी में तैयार होता है। फल को तोड़ कर इसे सुखाया जाता है।
विदेशों में बढ़ रही है मांग- रक्ती के उपयोग के संबंध में ना तो उत्पादक किसानों को पता है और ना ही इसकी खरीदी करने वाले स्थानीय व्यापारियों को। कुछ लोगों ने बताया कि रक्ती या गूंज एक औषधीय बीज है। जानकारों के मुताबिक कैंसर के अलावा भी कई अन्य बीमारियों के इलाज में रक्ती का उपयोग किया जाता है।
Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
source https://www.bhaskar.com/local/chhattisgarh/raigarh/jashpur/news/seeds-are-not-stored-at-home-as-buyers-127532257.html
एक टिप्पणी भेजें